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Mars Transit 2020: मंगल का कुंभ राशि में प्रवेश, कैसा होगा इसका असर

पं जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य Updated Sat, 02 May 2020 01:10 PM IST
mars transit 2020: वर्तमान समय में मकर राशि में शनि-मंगल का युतिदोष भंग हो जायेगा और पृथ्वी पर फैली अराजकता में कमी आएगी।
mars transit 2020: वर्तमान समय में मकर राशि में शनि-मंगल का युतिदोष भंग हो जायेगा और पृथ्वी पर फैली अराजकता में कमी आएगी।

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अदम्य साहसी तथा पराक्रमी ग्रह पृथ्वी पुत्र मंगल 04 मई की 08 बजकर 37 मिनट पर अपनी उच्चराशि मकर की यात्रा समाप्त करके कुंभ राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इस राशि में ये 18 जून की रात्रि 08 बजकर 13 मिनट तक रहेंगे, उसके बाद मीन राशि में प्रवेश कर जायेंगे। ज्योतिषीय दृष्टिकोण से ये बड़ी घटना है क्योंकि, वर्तमान समय में मकर राशि में शनि-मंगल का युतिदोष भंग हो जायेगा और पृथ्वी पर फैली अराजकता में कमी आएगी।
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मंगल मेटल्स, पावर, पेट्रोरसायन, हैंडीक्राफ्ट, प्रापर्टी, रियलस्टेट, इंफ्रा, सीमेंट, ज्वलनशील पदार्थों, कमोडिटीज के कारक होते हैं अतः स्टॉक मार्केट में इन पदार्थों के सेक्टर्स में भारी उतार-चढ़ाव की आशंका बनी रहेगी। प्राणियों के शरीर में इनका सर्वाधिक प्रभाव खून में रहता है। अशुभ प्रभावी होने पर रक्तविकार, लो या हाई ब्लड प्रेशर, ब्लडकैंसर आदि रोगों को जन्म देते हैं यही नहीं न्यूरोलोजिकल (तंत्रिकातन्त्र)समस्याएं एवं विषाणु जनित गुप्त रोगों की समस्याएं देने में भी मंगल पीछे नहीं रहते। जन्मकुंडली में इनके द्वारा बनाये गए 'रुचक योग' से प्राणियों में अद्भुत शक्ति, साहस, सामर्थ्य, शारीरिक बल तथा मानसिक क्षमता रहती है। जिसके फलस्वरूप व्यक्ति को सेना, पुलिस विभाग, इंजीनियरिंग के क्षेत्र, कुशल सर्जन, प्रशासन, आग्नेयास्त्र बनाने वाले कारखानों में, अग्निशमन विभागों, अनेकों खेल के क्षेत्र में भरपूर कामयाबी मिलती है। 
ये अग्नि तत्व कारक मेष और बृश्चिक राशि के भी स्वामी हैं मकर इनकी उच्च और कर्क नीच राशि है। मंगल मृगशिरा, चित्रा तथा धनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी हैं। ये प्रत्येक व्यक्ति में शारीरिक ताकत, मानसिक शक्ति, शीघ्र निर्णय लेने की क्षमता अति ऊर्जा प्रदान करते हैं। निर्णय लेने की क्षमता और दृढ निश्चयता के साथ उस निर्णय पर टिके रहना इनकी नियति है। ऐसे जातक सामान्यतया किसी भी प्रकार के दबाव के आगे घुटने नहीं टेकते तथा इनके उपर दबाव डालकर अपनी बात मनवा लेना बहुत कठिन होता है। इन्हें दबाव की अपेक्षा तर्क देकर समझा लेना ही उचित होता है।

जन्मकुंडली में यदि मंगल शुभ स्थान में हों अथवा बलवान हों तो जातक को सभी प्रकार के ऐश्वर्य और भौतिक सुख प्रदान करते हैं किन्तु अशुभ,अकारक एवं बलहीन हों तो ये प्राणियों के शारीरिक तथा मानसिक उर्जा पर विपरीत प्रभाव डालते हैं, जिसके परिणाम स्वरूप जातक में बलहीनता, सिरदर्द, थकान, चिड़चिड़ापन, तथा निर्णय लेने में अक्षमता रहती है इसलिए इनके अशुभ प्रभाव से बचने और शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए इन नक्षत्रों से उत्पन्न वृक्षों पीपल, खैर, बेल, शमीवृक्ष के साथ-साथ आंवला और मंदार का आरोपण करना अति शुभ फलदायी रहेगा।
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