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सावन में शिव की आराधना के लिए क्यों जरुरी है यह संदेश
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वायरल वीडियो: मध्यप्रदेश के जबलपुर रेलवे स्टेशन पर श्रमिकों ने लूटा खाने का सामान

मध्यप्रदेश में भाजपा को चैन से नहीं बैठने देंगे कमलनाथ, कांग्रेस हाई कमान ने भी दी छूट

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस छोड़कर भाजपाई हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया से राजनीतिक बदला लेना चाहते हैं। कमलनाथ की इस मंशा को पूरा करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं और कांग्रेस हाई कमान इस मामले में चुप है। जीतू पटवारी की भी सक्रियता बढ़ गई है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक बागी विधायकों ने भी इसे महाराज की इज्जत का सवाल मानकर तैयारी तेज कर दी है। पूर्व मंत्री इमरती देवी के बयान के बाद सूबे की राजनीति काफी गरमाई है।

दिलचस्प है कि कोविड-19 संक्रमण के कारण अभी उपचुनाव कब होगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन पिछले 18 साल में यह पहला समय है, जब शिवराज सिंह चौहान पीछे छूट गए हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता शिवराज के पीछे छूटने और राजनीति के कमलनाथ बनाम सिंधिया का रूप लेने पर मुस्कराकर कहते हैं कि होने दीजिए। जब चुनाव की तारीखें घोषित होगीं तो सब बदल जाएगा। सूत्र का कहना है कि ग्वालियर के महाराज अब भाजपा के नेता हैं।

उनके  मान, सम्मान की हिफाजत हमारा काम है। सिंधिया ने कमलनाथ को कुर्सी से पलट दिया है तो पूर्व मुख्यमंत्री आखिर इसे कैसे भूल सकते हैं?

भाजपा के एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का भी कहना है कि उपचुनाव से पहले का माहौल भले सिंधिया बनाम कमलनाथ का रूप लेता दिखाई दे, लेकिन अंतत: यह भाजपा बनाम कांग्रेस ही होगा। शिवराज सिंह चौहान भाजपा का मध्यप्रदेश में चेहरा हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

कमलनाथ को वह जवाब देने में सक्षम हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। इसलिए भाजपा के लिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। अभी तो पार्टी का उससे ज्यादा ध्यान मध्यप्रदेश में सही समय पर मंत्रिमंडल के विस्तार पर है।

क्या है कमलनाथ का प्लान?

मध्यप्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होना है। 22 सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बागी हुए विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई हैं और दो सीट एक भाजपा और एक कांग्रेस के विधायक की मृत्यु से रिक्त है।

इनमें से कमलनाथ की निगाह 18-20 सीटों पर टिकी है। टीम कमलनाथ इसे सिंधिया का कांग्रेस पार्टी को धोखा देने के रूप में लगातार प्रचारित कर रही है।

कांग्रेस के नेताओं का यह भी कहना है कि भाजपा ने कोविड-19 संक्रमण के बाबत कांग्रेस की सरकार गिराने के चक्कर में पूरे प्रदेश के निवासियों की जान खतरे में डाल दी। अब राज्य उसका खामियाजा भुगत रहा है।

इसके साथ-साथ ग्वालियर चंबर संभाग में 15 सीटों पर कांग्रेस के नेताओं ने कोशिशें तेज कर दी है। पार्टी की निगाह उन नेताओं पर है जो भाजपा का यहां खेल बिगाड़ सकते हैं।

इस क्षेत्र के तमाम भाजपा नेता जीवन भर ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का विरोध करते रहे हैं। अब उनके सामने अपना राजनीतिक वजूद बनाए रखने की चुनौती है। इस बीच ज्योतिरादित्य ने भाजपा विधायकों और नेताओं के संपर्क में होने का बयान देकर भी भाजपा के खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा भी गोटी बिछाने में माहिर हैं

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी तेल और तेल की धार दोनों देख रहे हैं। उनका ध्यान अभी प्रशासनिक कामकाज की तरफ ज्यादा है। लेकिन भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा चुप नहीं बैठे हैं।

वह ग्वालियर चंबल संभाग के नेताओं से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। भाजपा के जिलाध्यक्षों, क्षेत्रीय नेताओं के संपर्क में हैं। वीडी शर्मा की टीम को लग रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के साथ वह भाजपा की नैया पार लगा ले जाएंगे।

सूत्र बताते हैं कि सिंधिया समर्थक नेताओं ने भी कसरत बढ़ाई है। हालांकि अभी वह भाजपा नेताओं के बीच में घुलमिल नहीं पा रहे हैं। सिंधिया समर्थक नेताओं के बयान, व्यवहार को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के पास शिकायत आने का सिलसिला जारी हैै।

भाजपा ने संक्षिप्त विस्तार में दिया संदेश, लेकिन परेशानी भी कम नहीं

भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान के संक्षिप्त मंत्रिमंडल विस्तार में अपना संदेश तो दिया, लेकिन अंदरखाने में बात नहीं बनी है। बताते हैं इसके चलते अभी तक शिवराज चौहान मंत्रिमंडल के 29 मंत्रियों का शपथ ग्रहण रुका है।

संक्षिप्त मंत्रिमंडल में तीन मंत्री भाजपा के, दो सिंधिया के साथ गए विधायक बने। नरोत्तम मिश्रा न केवल मंत्री बने हैं, उनके पास महत्वपूर्ण विभाग भी है। नरोत्तम के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह सबको साथ लेकर चलेगी।

हालांकि अब सबसे बड़ी चुनौती साथ लेकर चलना ही बन रही है। भाजपा के कई दिग्गज, उत्साही नेता मंत्रिमंडल में जगह चाहते हैं। वह इसके लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।

सिंधिया का खेमा भी अपने राजनीतिक तरीकों से अपना दबाव बनाए है। उपचुनाव भी होना है। इस पर कांग्रेस की भी नजर है। इतना भाजपा की परेशानी बढ़ाने के लिए काफी है।
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प्रयागराज से 137 छात्र-छात्रा भेजे गए मध्य प्रदेश

यहां आकर पढ़ाई करने वाले दूसरे राज्य के छात्र-छात्राओं को भी उनके गृह जनपद भेजे जाने की कवायद शुरू हो गई है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश के 137 विद्यार्थियों को उनके घर भेजा गया। रवानगी शाम को एंग्लो बंगाली इंटर कालेज परिसर से हुई।

प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उनके घर भेजने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पहले उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के करीब 16 हजार विद्यार्थियों को गृह जनपद भेजा गया। इसके बाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश के विद्यार्थियों को भेजा गया। घर जाने के इच्छुक विद्यार्थियों को कंट्रोल रूम में फोन करके नाम, पता आदि डिटेल नोट कराने के लिए कहा गया था। फिर सभी को एंग्लो बंगाली में एकत्रित किया गया। वहां से उन्हें मध्य प्रदेश भेजा गया।
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भोपाल: कोविड-19 की रोकथाम के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करने पर तीन दिन तक बंद करनी पड़ेगी दुकान

कोरोना वायरस की रोकथाम को लेकर राज्य सरकारें अपनी ओर से जारी दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन करवाने पर जोर दे रही हैं। इसी सिलसिल में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में जिला प्रशासन ने निर्देश दिए हैं कि अगर कोई दुकान, मॉल, कार्यस्थल, व्यावसायिक प्रतिष्ठान निर्देशों का पालन नहीं करेंगे तो उन्हें तीन दिन के लिए बंद कर दिया जाएगा। 


जिला कलेक्टर अविनाश लवानिया ने आदेश जारी किया है कि शहर के प्रतिष्ठान जो खुद कोविड-19 को लेकर जारी दिशानिर्देशों का अनुपालन नहीं करेंगे या आंगुतकों की ओर से इन पर अमल कराने में विफल रहेंगे उन्हें तीन दिन के लिये बंद कर दिया जाएगा। इसके अलावा उल्लंघनकर्ता को शहर के चेक पोस्ट, बुखार दवाखानों और कोविड-19 संबंधित जागरुकता के कार्य में कोरोना योद्धा के तौर पर काम करना होगा।

जिला प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि यह आदेश मंगलवार से लागू कर दिया गया है। आदेश के उल्लंघन की निगरानी के लिये अधिकारियों के दलों का गठन किया गया है। आदेश में कहा गया है कि विभिन्न प्रतिष्ठानों की ओर से कोविड-19 से संबंधित दिशा निर्देशों के उल्लंघन की खबरों के बाद यह फैसला लिया गया है। 

इससे पहले सोमवार को प्रदेश के ग्वालियर में भी जिला प्रशासन ने ऐसा ही आदेश जारी किया था। इसमें सार्वजनिक स्थलों पर कोविड-19 की रोकथाम के दिशा निर्देशों का पालन ना करने वाले या मास्क नहीं पहने जाने पर लोगों से जुर्माने के साथ-साथ तीन दिन तक कोरोना कार्यकर्ता के रूप में कार्य कराने के आदेश दिए गये थे।
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मध्यप्रदेश: इन विभागों के लिए अड़े सिंधिया, अभी तक नहीं बनी कोई सहमति

मध्य प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद अब विभागों का बंटवारा भी केंद्रीय टीम के हाथ में चला गया है। दिल्ली में दो दिन की कड़ी मेहनत के बाद भी इस बात का फैसला नहीं हो सका है कि भाजपा के पास कौन-सा विभाग रहेगा और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के खेमे में क्या आएगा।


सूत्रों की माने तो विभागों के बंटवारे में नगरीय विकास, राजस्व, पीडब्लूडी, स्वास्थ्य, परिवहन, जल संसाधन, पीएचई, वाणिज्यिक कर, आबकारी, स्कूल शिक्षा और महिला और बाल विकास जैसे विभाग शामिल हैं। दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोप के साथ गृहमंत्री अमित शाह की भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुलाकात हुई।

इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की लेकिन विभागों को लेकर कोई बंटवारा अभीतक नहीं हुआ है। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी बात केंद्रीय संगठन को बताई, जिसके बाद हाईकमान ने विभागों की सूची भी अपने पास रख ली है। 

इसके बाद राज्य के संगठन से भी इस बात को लेकर चर्चा हुई लेकिन देर रात तक कोई सहमति नहीं बनी, जिसकी वजह से मंगलवार को होने वाली कैबिनेट बैठक को निरस्त कर दिया गया है। 

सूत्रों की माने तो ज्योतिरादित्य सिंधिया ने सात कैबिनेट मंत्रियों के लिए बड़े विभाग की मांग की है और स्पष्ट किया है कि चार राज्यमंत्रियों के पास कुछ विभाग स्वतंत्र प्रभार के तौर पर रहे। कांग्रेस से बीजेपी में आए हरदीप सिंह डंग, बिसाहूलाल सिंह और एंदल सिंह कंसाना को भी विभाग दिया जाना है। 

इसके अलावा सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री भी वाणिज्यिक कर, आबकारी, महिला बाल विकास, परिवहन, ऊर्जा, उद्योग, जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास समेत कुछ विभाग अपने करीबी मंत्रियों के पास रखना चाहते हैं। केंद्रीय नेतृत्व इस पर तैयार नहीं हो रहा। हालांकि प्रदेश संगठन ने कुछ नए नाम सुझाएं हैं लेकिन इस पर अंतिम निर्णय नड्डा और संतोष को लेना है।

इस बीच सिंधिया देर रात प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे से मिलने उनके निवास पर पहुंचे। माना जा रहा है कि सहस्त्रबुद्धे ने कुछ विभागों को लेकर सिंधिया से बात की है।
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मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के साथ 'अग्निपथ' पर चल पड़े हैं सिंधिया और कमलनाथ

मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह सरकार का बहुप्रतीक्षित मंत्रिमंडल विस्तार हो गया। मंत्रिमंडल विस्तार में केंद्रीय नेतृत्व ने ज्योतिरादित्य सिंधिया की लाज रख ली है। केंद्रीय नेतृत्व (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा) ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए नई यथार्थवादी भाजपा का संदेश दिया है।

सभी वर्गों, अंदरूनी गुटों,वरिष्ठ-युवाओं के प्रतिनिधित्व का ख्याल रखा है। मंत्रिमंडल विस्तार ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को अग्निपथ पर लाकर खड़ा किया है। उनके सामने कांग्रेस पार्टी के अग्निपथ के नायक कमलनाथ हैं।



कुल मिलाकर 24 सीटों उपचुनाव न केवल दोनों के निर्णायक, बल्कि बड़ा रोचक होने वाला है।

मंत्रिमंडल विस्तार हुआ तो समय पर उपचुनाव भी होगा?

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार हो गया। अब यकीन मान लीजिए कि समय पर 24 सीटों का उपचुनाव भी हो जाएगा।

सूत्र का कहना है कि 24 सीटों में 20 से अधिक भाजपा सीटें जीतेगी। ग्वालियर-चंबल संभाग में 16 सीटों पर उपचुनाव होना है, हम जीतेंगे।

दो सीटें कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के निधन से खाली हुई हैं। छह सीटें ज्योतिरादित्य के समर्थक विधायकों के साथ आए कांग्रेस पूर्व विधायकों की हैं।

मध्यप्रदेश की राजनीति पर गहरी पकड़ रखने वाले भाजपा नेता का कहना है कि इनमें 22 सीटें भाजपा के खाते में आ सकती है। बताते हैं मंत्रिमंडल के विस्तार में इसका खास ख्याल रखा गया है।

अग्निपथ के दोनों नायक की अब शुरू होगी बाजी!

कांग्रेस पार्टी के पूर्व महासचिव का मानना है कि मध्यप्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार के बाद पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। कांग्रेस हाई कमान ने मध्यप्रदेश में राजनीतिक मामले में अभी कमलनाथ के ऊपर ही सारा दारोमदार टिका रखा है।

कमलनाथ के कंधे को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सहारा दे रहे हैं। मध्य प्रदेश के पूर्व प्रभारी का कहना है कि ऐसे में उपचुनाव काफी अहम है। कमलनाथ और दिग्विजय सिंह इसमें सफलता पाने के लिए अप्रैल महीने के बाद से ही गोट बिछा रहे हैं।

भाजपा की तरफ से उपचुनाव का बड़ा चेहरा ज्योतिरादित्य सिंधिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस फिगर में सेंध लगाना चाह रहे थे। इसके लिए भाजपा के ग्वालियर चंबल संभाग के तमाम नेताओं (पूर्व विधायकों और अन्य) का समर्थन हासिल था।

केंद्र के भी कुछ नेता ज्योतिरादित्य को बहुत ज्यादा महत्व देने के पक्ष में नहीं थे। लेकिन मध्यप्रदेश के प्रभारी, राज्यसभा सांसद विनय सहस्त्रबुद्धे का एक वाक्य लाख टके का है। वे कहते हैं कि ज्योतिरादित्य अब भाजपा में हैं। वह और उनके सभी समर्थक हमारे हैं।

सहस्त्रबुद्धे की यह लाइन सच पूछिए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की लाइन है। पार्टी अंदरुनी मतभेद निबटाकर बड़ी सफलता चाहती है।

इसलिए केंद्रीय नेतृत्व ने न केवल उनका मान रखा, बल्कि कई पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की सलाह को नजरअंदाज भी किया। केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की सलाह को वरीयता दी। अब ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसके महत्व को साबित करना है।

उपचुनाव में मिली सीटों की संख्या ही इसका मूल्यांकन और भाजपा की राजनीति में मध्यप्रदेश से लेकर केंद्रीय नेतृत्व तक उनके भविष्य का रास्ता तय करेगी।

समझा जा रहा है कि ज्योतिरादित्य इसे बखूबी समझ रहे हैं। वह इसे पूरा करने के लिए केंद्रीय नेतत्व, राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर हर स्तर का दबाव भी बनाकर रखेंगे।

भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने रखी सबकी लाज, शिवराज को किया शांत

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दो दिन पहले अपनी तुलना समुद्र मंथन के बाद निकलने वाले विष को पीने वाले भगवान शिव से की थी। यह तुलना अकारण नहीं थी। शिवराज जो फार्मूला लेकर आए थे, केंद्रीय नेतृत्व ने उसमें कई बारीकियों को समझते हुए संशोधन कर दिया है।

हालांकि अंत में शिवराज की पसंद का ख्याल रखा है। शिवराज के मंत्रिमंडल में उनके विरोधी माने जाने वाले कैलाश विजयवर्गीय की छाप दिखाई पड़ रही है। नरेंद्र सिंह तोमर मौजूद हैं।

किसी गुट में न रहने वाले पुराने नेता भी मौजूद हैं। शिवराज के सिवा कई गुटों में पकड़ बनाने वाले नरोत्तम दमदारी से मौजूद हैं। परिवारवाद की राजनीति की परवाह न करते हुए भाजपा ने यशोधरा राजे सिंधिया को मंत्री बनाया है।

भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव को स्थान मिलना काफी कुछ कह रहा है। जो कभी मंत्री नहीं बने उन्हें, नए विधायक और युवाओं को महत्व मिला है।

सिंधिया के बागी होने के बाद उनके गुट से अलग और साथ गए तीन विधायकों से भी भाजपा नेतृत्व ने किया अपना वादा पूरा किया।

कुल मिलाकर केंद्रीय नेतृत्व ने संदेश देने की कोशिश है कि सबको केंद्रीय नेतृत्व देख रहा है। वह अपने अच्छे नेताओं की मेहनत को नजरअंदाज नहीं कर सकता।

इसका एक संदेश यह भी है कि कड़वा घूट पीकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सबको साथ लेकर चलने की आदत डाल लें।
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कल होगा मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के 'संतुलित' मंत्रिमंडल का विस्तार और फेरबदल

Madhya Pradesh Cabinet Expension
मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर छाए धुंध के बादल धीरे-धीरे छंटते नजर आ रहे हैं। गुरुवार का दिन शिवराज सिंह सरकार के लिए काफी अहम माना जा रहा है और उम्मीद जताई जा रही है कि गुरुवार दोपहर को मंत्रिमंडल विस्तार हो सकता है। इससे पहले मंगलवार को मंत्रिमंडल विस्तार होने की चर्चा थी।

25 से 27 नए मंत्रियों को शपथ

सूत्रों के मुताबिक गुरुवार को मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार तय माना जा रहा है। इस दौरान 25 से 27 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। वहीं एक से दो नए मंत्रियों को बाद में शपथ दिलाए जाने की संभावना है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह दो दिन पहले तक दिल्ली में डेरा डाले हुए थे और इस दौरान उन्होंने अमित शाह, अध्यक्ष जेपी नड्डा, ज्योतिरादित्य सिंधिया और प्रधानमंत्री से भी मुलाकत की थी, लेकिन शिवराज सिंह के फॉर्मूले को लेकर केंद्रीय नेतृत्व को आपत्ति थी।

सूची को शाह और नड्डा का आशीर्वाद

सूत्रों को कहना है कि शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल विस्तार के फॉर्मूले में थोड़ा फेरबदल करके उसे हरी झंडी दे दी गई है।

बुधवार को शाम मध्य प्रदेश की राजनीति के कद्दावर नेता विनय सहस्त्रबुद्धे भोपाल पहुंच रहे हैं और उनके साथ केंद्रीय नेतृत्व की तरफ से तैयार मंत्रियों की अंतिम सूची भी साथ होगी।

माना जा रहा है कि इस सूची को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा की अंतिम सहमति के बाद ही तैयार किया गया है।

सभी धड़ों का संतुलित ख्याल

सूत्रों का कहना है कि आगामी उपचुनावों को देखते हुए मंत्रिमंडल में भाजपा ने विशेष संतुलन बनाने का प्रयास किया है।

राज्य के मंत्रिमंडल में कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, और कांग्रेस से भाजपाई बने ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत सभी का संतुलित ख्याल रखा गया है।

नए मंत्रिमंडल विस्तार में ज्योतिरादित्य सिंधिया के कोटे से 5-6 मंत्री और बनेंगे, इनमें इमरती देवी, मध्य प्रदेश के ग्वालियर से भाजपा नेता प्रद्युमन सिंह तोमर के अलावा कांग्रेस से बागी हुए पूर्व विधायक हरदीप सिंह डंग को भी मंत्री बनाया जाएगा।

इसके अलावा ज्योतिरादित्य गुट के अलावा जो विधायक कांग्रेस से भाजपा में गए थे, उनमें से तीन का मंत्री बनाया जाना तय है। 

दो डिप्टी सीएम का फॉर्मूला?

वहीं मध्य प्रदेश को इस बार दो डिप्टी सीएम भी मिल सकते हैं। कर्नाटक और उत्तर प्रदेश का फॉर्मूला मध्य प्रदेश में भी आजमाया जा सकता है। इसे लेकर बुधवार तक शाम तक स्थिति साफ हो जाएगी क्योंकि इसका फैसला केंद्रीय नेतृत्व को लेना है।

वहीं अगर ऐसा हुआ तो सिंधिया के करीबी तुलसी सिलावट को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है। ज्योतिरादित्य सिंधिया भी यही चाहते हैं।

वहीं यह प्रस्ताव शिवराज के लिए भी मुश्किलें खड़ी कर सकता है। क्योंकि इसी बात के मान सम्मान को लेकर उनकी कांग्रेस पार्टी से नाराजगी थी।

नरोत्तम मिश्रा का कद मध्य प्रदेश सरकार में लगातार बड़ा हो रहा है। वे पुराने भाजपाई भी हैं और ग्वालियर संभल प्रभाग में अच्छी पकड़ रखते हैं, साथ ही कई वरिष्ठ भाजपा नेताओं के करीबी भी हैं।

आज शपथ लेंगी आनंदीबेन पटेल

राज्य में मंत्रिमंड़ल विस्तार को लेकर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल भी बुधवार शाम को भोपाल पहुंच रही हैं और उन्हें आज ही राज्यपाल की शपथ दिलवाई जाएगी।

मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश अजय कुमार मित्तल उन्हें राजभवन में आयोजित एक सादे समारोह में शाम साढ़े चार बजे राज्यपाल के पद की शपथ दिलाएंगे।

मध्यप्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन बीमार हैं और लखनऊ में एक निजी अस्पताल में उपचार चल रहा है। उनकी अनुपस्थिति में 28 जून को ही आनंदीबेन को मध्यप्रदेश के राज्यपाल के कार्यों का निर्वहन करने के लिए नियुक्त किया गया है।

जिसके बाद गुरुवार को मंत्रिमंडल विस्तार के लिए शपथग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा और राज्यपाल आनंदीबेन नए मंत्रियों को शपथ दिलाएंगी।      
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सिंधिया और शिवराज के दबदबे पर लगाम लगाने के लिए टला मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार

सोमवार की सुबह तक मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल का बन रहा आकार फिर टल गया। मंगलवार को भोपाल पहुंच कर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान फिर कोविड-19 से जूझने समेत तमाम कार्यों में व्यस्त हैं। बताते हैं दिल्ली का दो दिन से अधिक समय का दौरा शिवराज सिंह चौहान के लिए काफी कड़वा रहा।

केंद्रीय नेतृत्व न तो शिवराज के फार्मूले से सहमत है और न ही शिवराज को केंद्रीय नेतृत्व का फार्मूला रास आया। मंत्रिमंडल के विस्तार की एक पूरी कवायद करके फिर जल्द ही शिवराज को दिल्ली पहुंचना है।

तब तक राज्य सरकार पांच मंत्रियों के मंत्रिमंडल से ही सरकार चलाएगी। भाजपा ज्योतिरादित्य सिंधिया को साधे तो रखना चाहती है, लेकिन उनके ज्यादा लोगों को मंत्री बना कर और उन्हें मनचाहे विभाग देकर सिंधिया को इतना ताकतवर नहीं बनाना चाहती कि वो बीच बीच में दबाव बनाकर सौदेबाजी करें।

भाजपा सिंधिया को काबू में रख कर उनकी सियासी सौदेबाजी की ताकत भी खत्म करना चाहती है।

दो डिप्टी सीएम- एक नरोत्तम, दूसरे तुलसी सिलावट

मध्य प्रदेश सरकार में दो डिप्टी सीएम होने चाहिए। यह प्रस्ताव शिवराज के लिए भी कड़वे घूंट की तरह है। ज्योतिरादित्य सिंधिया चाहते हैं कि तुलसी सिलावट को उप मुख्यमंत्री बनाया जाए।

इसी बात के मान सम्मान को लेकर उनकी कांग्रेस पार्टी से नाराजगी थी। दूसरी तरफ नरोत्तम मिश्रा का कद मध्य प्रदेश सरकार में लगातार बड़ा हो रहा है। वह राज्य के गृहमंत्री हैं। मुख्यमंत्री हमेशा गृह मंत्रालय अपने किसी विश्वसनीय मंत्री को देता है या फिर अपने पास रखता है।

नरोत्तम शिवराज का दरबार छोड़कर बाकी भाजपा के सभी बड़े दरबारों में अपनी साख बनाए हुए हैं। पार्टी का एक धड़ा चाहता है कि तुलसी सिलावट कांग्रेस से ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ आए हैं।

उन्हें डिप्टी सीएम का पद देने के साथ नरोत्तम को भी दिया जाए। नरोत्तम पुराने भाजपाई हैं। ग्वालियर चंबल संभाग में भी अपनी पकड़ रखते हैं। इस बार भाजपा की सरकार बनने के बाद से वह बेहद सक्रिय हैं।

इस तरह से एक संतुलन आएगा। शिवराज की परेशानी यह है कि वह ऐसी जटिल परिस्थिति में पुराने नेता, तीन बारत भाजपा की सरकार में मंत्री रहे लोगों का क्या करें? भूपेन्द्र सिंह, गोपाल भार्गव, यशोधरा राजे सिंधिया को मंत्रिमंडल में क्यों न शामिल करें?

इस तरह के करीब 13-14 वरिष्ठ नेताओं को वह भोपाल लौटकर क्या जवाब दें? बताते हैं कहानी कुछ इसी तरह की पेचीदगियों में फंसी है।

ज्योतिरादित्य बनाम कांग्रेस के चक्रव्यूह से निकलना चाहते हैं शिवराज

शिवराज सिंह चौहान ने तीन बार की सरकार अपने मिजाज से चलाई है। मुख्यमंत्री और भाजपा नेता के तौर पर हर गुट पर भारी रहे हैं। इस बार पर्दे के पीछे से पुराने सहयोगी कैलाश विजयवर्गीय झटका दे रहे हैं तो कुछ अन्य भाजपा नेताओं ने भी सिर उठाना शुरू कर दिया है।

राज्य सरकार को अभी 24 सीटों पर उप चुनाव का सामना करना है। इनमें से 16 सीटें ग्वालियर चंबल संभाग की हैं। इन सभी 16 सीटों पर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बागी होकर आए पूर्व विधायकों के लिए सिंधिया लगातार बैटिंग कर रहे हैं।

सिंधिया इनमें से कम से कम आठ के लिए मंत्रीपद चाहते हैं। पांच सदस्यीय मंत्रिमंडल में सिंधिया के अभी दो मंत्री हैं। छह को और मंत्री बनाने का दबाव बना रहे हैं। इसके समानांतर 16 सीटों पर 2018 में हारे भाजपा प्रत्याशी, पुराने नेता उप चुनाव में टिकट मिलने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं।

सिंधिया के समर्थक इस पूरी लड़ाई को सिंधिया बनाम कांग्रेस बनाकर जीतने के पक्ष में हैं। शिवराज सिंह चौहान का खेमा चाहता है, यह हवा और सूरत दोनों बदलनी चाहिए। भाजपा के पुराने नेताओं का सम्मान भी बने रहना चाहिए।

मध्य प्रदेश में आखिर शिवराज भी कब तक?

भाजपा में नेताओं का एक धड़ा और भी है। वह मध्य प्रदेश में आखिर शिवराज कब तक, जैसी सोच को मजबूती से आगे बढ़ा रहा है। बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व के पास तक अच्छी पहुंच रखने वाले इन नेताओं को मध्य प्रदेश में चेहरा बदलने के लिए यह सही समय लग रहा है।

शिवराज सिंह चौहान भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। तीन बार के मुख्यमंत्री, अनुभवी नेता हैं। एक सूत्र का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कैबिनेट और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा की टीम को संगठन में इस तरह के नेताओं की आवश्यकता है।

वैसे भी नड्डा ने अभी अपनी टीम को अंतिम रूप नहीं दिया है। एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री शाह ने पार्टी में युवा नेतृत्व को पैदा किया है। उन्हें जिम्मेदारियां दी हैं।

वह भविष्य की भाजपा का निर्माण कर रहे हैं। इसलिए जहां तक हो सके नए चेहरे को आगे लाया जाना चाहिए। बताते हैं कुछ इसी तरह के कारण रहे और सोमवार को नरोत्तम मिश्रा को अचानक दिल्ली जाना पड़ा।

लेकिन अभी तक यह साफ नहीं हो पाया कि नरोत्तम ने दिल्ली आकर कब और किससे मुलाकात की।

अचानक बदला सीन

रविवार देर रात तक चली भेंट मुलाकात के बाद मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल का फेर बदल तय माना जा रहा था। भाजपा के एक बड़े नेता का कहना था कि मंत्रिमंडल विस्तार के साथ मंत्रिमंडल फेरबदल भी होगा।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, राज्य ईकाई के संगठन मंत्री सुहास भगत केंद्रीय नेताओं (केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन मंत्री बीएल संतोष) से मेल मिलाप में व्यस्त थे।

विनय सहस्त्रबुद्धे समेत तमाम नेता हर घटनाक्रम पर निगाह लगाए थे। इस क्रम में शिवराज की केंद्रीय गृहमंत्री से दो बार मुलाकात हुई। जेपी नड्डा से कई बार की बात हुई। सोमवार को चार बजे प्रधानमंत्री से मिलने का समय प्रस्तावित हो गया।

इससे पहले सिंधिया से भी भेंट हुई। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के सोमवार शाम को चार बजे तक भोपाल पहुंचने का कार्यक्रम भी तय था। तय कार्यक्रम के अनुसार ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी भोपाल पहुंचना था, लेकिन बताते हैं कि प्रधानमंत्री से आधा घंटे की हुई मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को हकीकत का अहसास हो गया।

वह लौटकर मध्य प्रदेश भवन आए और एक नई उधेड़बुन में उलझ गए। जेपी नड्डा से फिर बात हुई और मंगलवार को सुबह टीम भोपाल पहुंच गई। अब मंत्रिमंडल का विस्तार थोड़ा रुक कर होने के संकेत हैं।
 
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मध्यप्रदेश में कल हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार, 25 नए मंत्री बनाए जाने की तैयारी!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आशीर्वाद मिलने के बाद मंगलवार को मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। प्रधानमंत्री से मुख्यमंत्री की भेंट चार बजे प्रस्तावित है। रोड-मैप बन चुका है।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के यथार्थवादी सोच की मंत्रिमंडल पर छाप दिखने की पूरी संभावना है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर से मिलने के बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गृह मंत्री से विशेष मंत्रणा की है।

समझा जा रहा है कि इस मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठ नेता कैलाश विजयवर्गीय, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अन्य के करीबियों को जगह मिलेगी।

25 मंत्री ले सकते हैं शपथ, युवाओं को वरीयता के आसार

प्रधानमंत्री के साथ भेंट के बाद शाम को शिवराज सिंह चौहान के भोपाल जाने का कार्यक्रम है। समझा जा रहा है कि राज्य में सही संदेश देने के लिए उनके साथ ज्योतिरादित्य सिंधिया भी भोपाल जा सकते हैं।

भोपाल में शाम को शिवराज सिंह चौहान प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा, राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ बैठक करके मंत्रिपरिषद के नामों की सूची को अंतिम रूप दे सकते हैं और मंगलवार को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल राजभवन में नए मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिला सकती हैं।

गौरतलब है कि राज्य के राज्यपाल लालजी टंडन की तबियत खराब होने के कारण इस समय उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल के पास मध्य प्रदेश का अतिरिक्त प्रभार है।

सूत्र बताते हैं कि शिवराज सिंह चौहान सरकार मंत्रिमंडल में अभी पांच मंत्री हैं।

मंगलवार को 25 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। इसमें से छह ज्योतिरादित्य समर्थक और दो अन्य कांग्रेस के पूर्व बागी विधायक मंत्री बन सकते हैं।

17 मंत्री भाजपा के मूल नेताओं में से होंगे।

इनमें भी भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय गृहमंत्री और प्रधानमंत्री की युवाओं को अवसर देने की है। इस तरह से राज्य में सत्ता के गलियारे के कई पुराने चेहरों का पत्ता कटना करीब-करीब तय है।

ज्योतिरादित्य की बुआ भी हैं कतार में

मंत्री बनने की इच्छा पालने वालों में नए पुराने तमाम दावेदार हैं। शिवराज सिंह चौहान के पिछले मंत्रिमंडल की सदस्य रहीं ज्योतिरादित्य की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया की उम्मीद बनी हुई है।

शिवराज के करीबी भूपेंद्र सिंह, गोपाल भार्गव, रामपाल सिंह, राजेन्द्र शुक्ला, गिरीश गौतम, केदार शुक्ल जैसे चेहरे दौड़ में शामिल हैं।

संजय पाठक ने आपरेशन लोटस में भूमिका निभाई थी। उन्हें भी अपनी भूमिका बढ़ने की उम्मीद है। विश्वास सारंग, रमेश मंदोला, लल्लू राम वैश्य, नीना वर्मा या फिर उषा ठाकुर, अरविंद भदौरिया, रामेश्वर शर्मा मंत्री बनने के प्रमुख दावेदारों में हैं।

सिंधिया खेमे से इमरती देवी, प्रद्युम्न सिंह तोमर, प्रभुनाथ चौधरी की किस्मत खुल सकती है।

दो दिन से दिल्ली में डटे हैं शिवराज

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान रविवार से दिल्ली में डटे हैं। मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, प्रदेश संगठन मंत्री सुहास भगत भी हैं। दो दिन में शिवराज सिंह चौहान ने भाजपा के अध्यक्ष जेपी नड्डा, संगठन मंत्री बीएल संतोष, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, नरेंद्र तोमर से भेंट की है।

उन्होंने सोमवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया से भी मुलाकात की। उनका संघ मुख्यालय झंडेवालान भी जाने का कार्यक्रम है और प्रधानमंत्री से मार्गदर्शन लेने के बाद भोपाल रवाना हो जाएंगे।

शिवराज के लिए आसान नहीं रहेगी डगर

शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ भले ले ली है, लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें राष्ट्रीय नेतृत्व के आधार पर चलना पड़ रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार शिवराज सिंह के तीन करीबी नेताओं के मंत्रिमंडल में जगह पाने की उम्मीद अब काफी कम है।

शिवराज के विरोधी कैलाश विजयवर्गीय के करीबी चेहरे को मंत्रिमंडल में स्थान मिलना तय माना जा रहा है। वहीं भाजपा नेतृत्व उपचुनाव तक ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों को पूरा भाव दे रहा है।

भोपाल के एक सूत्र की मानें तो नरेंद्र सिंह तोमर के वीटो लगाने के बाद एक चेहरे का भी मंत्रिमंडल में जगह पाना तय माना जा रहा है।

कुल मिलाकर शिवराज के मंत्रिमंडल का गठन उनकी इच्छा के अनुसार कम और समझौते के साथ अधिक होने की संभावना है।

23 मार्च को मुख्यमंत्री ने ली थी शपथ

शिवराज सिंह चौहान 23 मार्च को मुख्यमंत्री बने थे। उनके  संक्षिप्त मंत्रिमंडल का विस्तार करीब एक महीने बाद हो पाया था। तब नरोत्तम मिश्रा, तुलसी सिलावट समेत पांच लोगों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।

शिवराज सहित मंत्रिमंडल में कुल 36 सदस्य हो सकते हैं। इस तरह से अभी 29 चेहरों को मंत्री बनने का अवसर मिल सकता है।
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ट्विटर हैंडल पर भाजपा का न होना क्या ज्योतिरादित्य सिंधिया की यह रणनीतिक चाल है?

मनुष्य बली नहीं होत है, समय होत बलवान। कहावत पुरानी है। कांग्रेस के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया का जिक्र आते ही चटखारे लेकर यह लाइन दोहरा रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह कहते हैं कि बस समय की धार देखिए।

अब आइए भाजपा की तरफ चलते हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र तोमर भाजपा नेता होने के नाते ज्योतिरादित्य सिंधिया को यथोचित सम्मान देते हैं।

भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती उपचुनाव की 24 में से कम से कम 16 सीटें जीतने की है। भाजपा उपाध्यक्ष कैलाश कैलाश विजयवर्गीय तो 24 सीट जीतने का लक्ष्य रखकर चल रहे हैं।

भाजपा की बड़ी चुनौती 24 सीट जीतकर मध्य प्रदेश में झंडा बुलंद करना है

कैलाश विजयावर्गीय के 24 सीट जीतने के लक्ष्य से भाजपा के सभी नेता इत्तेफाक रखते हैं। इनमें से 22 वह सीटें हैं, जो कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए विधायकों से खाली हुई है।

एक सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के विधायक के निधन से खाली हुई हैं। कांग्रेस के नेता कहते हैं कि 22 में से 12-14 विधायक ज्योतिरादित्य के समर्थकों में हैं।

पार्टी छोड़ने वाले 4-5 विधायक मंत्री बनने की लालच में गए हैं

दो-तीन विधायक किसी आश्वासन पर गए हैं। इस तरह से ग्वालियर चंबल संभाग की 16 सीटों में से सभी सिंधिया के करीबी विधायक नहीं हैं।

कांग्रेस और मध्य प्रदेश भाजपा के नेताओं का कहना है कि इन 16 सीटों को जीतने वाले विधायक उपचुनाव में दोबारा टिकट पाने पर सभी विधायक बनने की क्षमता नहीं रखते।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र तोमर हों या शिवराज सिंह चौहान की टीम। मध्य प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा हों या भाजपा के एक पूर्व राज्यसभा सांसद और यहां तक मध्यप्रदेश के अध्यक्ष वीडी शर्मा के एक करीबी, सभी का मानना है कि सभी 22 विधायकों के उपचुनाव जीत जाने की गारंटी कैसे जा सकती।

उपचुनाव में विधायकों के टिकट के सवाल पर मध्य प्रदेश भाजपा के नेता कहते हैं इसका फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा।


कांग्रेस में शामिल हुए बालेंदु शुक्ला - फोटो : ANI (File)

पीएम मोदी और गृहमंत्री शाह कभी गलत दांव नहीं लगाते

प्रधानमंत्री मोदी और केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने राजनीति का नया अध्याय लिखा है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा कुशलता के साथ इसे आगे बढ़ा रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी और पूर्व भजपा अध्यक्ष अमित शाह ने हमेशा जमीनी तैयारी, चुनाव जीतने की क्षमता रखने वाले उम्मीदवार और भाजपा तथा संगठन के हित में फैसला लिया है।

दबाव के आगे नहीं झुके हैं। इतना ही नहीं पार्टी नेताओं, कार्यकर्ताओं का उत्साह बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया है। इस परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो भाजपा के सामने तीन बड़ी चुनौती है।

पहली चुनौती कम से कम उपचुनाव की 16 सीटें जीतकर मध्य प्रदेश की शिवराज सिंह चौहान बचाना। दूसरी चुनौती राज्य सरकार का दीन-ईमान बनाए रखकर सही ढंग से मंत्रिमंडल के विस्तार को आगे बढ़ाना, ताकि भाजपा के युवा और वरिष्ठ नेताओं में पार्टी को लेकर द्वंद की स्थिति न खड़ी हो।

तीसरी बड़ी चुनौती कांग्रेस से भाजपा नेता बने ज्योतिरादित्य सिंधिया और बागी विधायकों से किए वादे को पूरा कर उनका पार्टी में सम्मान बनाए रखना।

समझा जा रहा है कि पार्टी पहली दो चुनौती से कोई समझौता नहीं कर सकती। तीसरी चुनौती से कुछ हद तक समझौता करके उनके सम्मान को समायोजन के जरिए बनाए रखने का प्रस्ताव दे सकती है।

इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा इसी रणनीति के तहत दांव लगाएगी।

ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अच्छे संकेत नहीं

ज्योतिरादित्य सिंधिया मे 19 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए पहली प्राथमिकता की सीट से नामांकन कर दिया है। वह राज्यसभा सदस्य तो बन जाएंगे। आगे जो होगा, वह समय बताएगा, लेकिन पार्टी नेताओं से चर्चा के बाद निकलकर आ रहे निष्कर्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं।

शिवराज सिंह चौहान ने मार्च में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। पांच मंत्रियों का मंत्रिमंडल गठित होने में एक करीब महीना लग गया। इसमें सिंधिया समर्थक दो मंत्री जगह भी पा गए।

सिंधिया से थोड़ा दूर का रिश्ता रखने वाले नरोत्तम मिश्रा मंत्री ही नहीं बने बल्कि अहम विभाग मिल गया। उसके बाद से शिवराज सिंह चौहान का मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा के लिए तीन बार अनौपचारिक रूप से तय कार्यक्रम टल गया।

बताते हैं इसके पीछे बड़ी वजह ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरफ से समर्थकों को मंत्री बनाने का दबाव, शिवराज की तरफ से अपने करीबियों को मंत्री बनाने का प्रयास, भाजपा के अन्य युवा, वरिष्ठ नेताओं की मंत्री पद पाने की कोशिश और सिंधिया विरोधी भाजपा के नेताओं की नाराजगी है।

भाजपा इस मामले में फूंक-फूंककर कदम रख रही है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का टैक्टिकल मूव

ज्योतिरादित्य सिंधिया के करीबियों ने 24 सीटों के उपचुनाव को सिंधिया के मान-सम्मान से जोड़ दिया है। कांग्रेस इसे अपने साथ धोखा, गद्दारी से जोड़ रही है। ऐसे में ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अपना मान-सम्मान अधिक से अधिक बागी विधायकों को टिकट दिलवाने, उन्हें मंत्री बनवाने, महत्वपूर्ण विभाग दिलवाने और खुद के लिए भी केंद्र सरकार में मंत्री के तौर पर अच्छा विभाग पाने से जुड़ा है।

सिंधिया को जिस तरह से शिवराज के संक्षिप्त मंत्रिमंडल के गठन में मशक्कत करनी पड़ी, उन्हें लग रहा है कि सब कुछ बहुत आसान नहीं है। इसलिए इसे सिंधिया का संदेश देने का टैक्टिकल मूव माना जा रहा है। इसी तरह से उन्होंने कांग्रेस पार्टी छोड़ने से कुछ महीने पहले भी संदेश दिया था।

दूसरे, प्रेमचंद गुड्डू जनाधार वाले नेता हैं। ज्योतिरादित्य के कारण कांग्रेस छोड़कर भाजपा में गए थे। ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने के बाद पैतृक पार्टी में लौट आए हैं। बालेंदु शुक्ला को ज्योतिरादित्य चाचा कहते थे।

शुक्ला जी ज्योतिरादित्य के पिता माधव राव सिंधिया के बेहद निकटवर्तियों में रहे हैं। बाद में ज्योतिरादित्य से संबंध थोड़ा तल्ख हो गए थे। अब कांग्रेस में लौट आए हैं।

राकेश चतुर्वेदी भी कांग्रेसी हो गए हैं। सिंधिया के लिए इस तरह से नेताओं का भाजपा के साथ जाना भी अच्छा नहीं माना जाएगा।
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