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चंद्र ग्रहण में छोटा सा दान, बनाएगा धनवान : 5 जून 2020
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मध्य प्रदेश के इंदौर में कोरोना संक्रमित क्यों हुआ घर बेचने पर मजबूर

शिवराज सिंह चौहान ने आईफा को बताया तमाशा, जुटाई गई रकम मुख्यमंत्री राहत कोष में डाली

IMA इंदौर उपाध्यक्ष ने बताया, डॉक्टर शत्रुघ्न पंजवानी की कोरोना से कैसे हुई मौत

मध्य प्रदेश में उपचुनावों की चुनौती से भाजपा तनाव में, अब सात जून के बाद मंत्रिमंडल विस्तार के आसार

मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर होने वाला उपचुनाव भाजपा केंद्रीय नेतृत्व और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नाकों चने चबवा रहा है। ग्वालियर के महाराज ज्योतिरादित्य सिंधिया की टीम भी इसे उनके मान-सम्मान से जोड़ रही है।

कांग्रेस छोड़कर गए 22 विधायकों में से गैर-सिंधिया गुट के कुछ विधायक मंत्री बनने के लिए राजभवन के फोन का इंतजार कर रहे हैं, वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, भाजपा उपाध्यक्ष कैलाश विजयवर्गीय के करीबी विधायकों को भी इसी क्षण का इंतजार है।

पिछली सरकार के मंत्री उम्मीद लगाए बैठे हैं, तो कुछ नए चेहरे भी हैं और सबके बीच में भाजपा को सबसे पहले उपचुनाव की 24 में कम से कम 22 सीटों पर सफलता का लक्ष्य दिखाई  पड़ रहा है।

किसे बनाएं मंत्री और किसे छोड़ें?

19 जून को राज्यसभा चुनाव होगा, तो ज्योतिरादित्य सिंधिया को दूसरी विजयश्री मिल जाएगी। 29 अप्रैल को उन्होंने शिवराज सरकार में पांच में से अपने दो समर्थक पूर्व विधायकों को मंत्री बनवाकर पा ली थी।

तीसरे और चौथे लक्ष्य के लिए वह भी पूरा जोर लगा रहे हैं। ज्योतिरादित्य ने इसी इरादे से पहली जून को भोपाल दौरे का कार्यक्रम बनाया था। उनके करीबी बताते हैं कि सिंधिया के हिसाब से सबकुछ ठीक चल रहा है।

उनके खास कांग्रेस के पूर्व विधायक मंत्री बन सकते हैं। इसके अलावा तीन-चार और बागी विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। इस तरह से भाजपा के विधायकों, नेताओं या पूर्व मंत्रियों में से केवल 21-22 लोगों के मंत्री बनने की संभावना है।

इनमें से तीन चेहरे पहले ही शपथ ले चुके हैं। बताते हैं बचे हुए चेहरों के लिए भोपाल से लेकर दिल्ली तक का पारा चढ़ा हुआ है। भाजपा के लिए यह तय कर पाना मुश्किल हो रहा है कि किसे मंत्री बनाए और किस छोड़ें।

सात जून के बाद कभी मंत्रिमंडल विस्तार

सूत्र बताते हैं अब शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार सात जून के बाद कभी भी हो सकता है। छह या सात जून को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय नेताओं से मंत्रणा करने के लिए दिल्ली आ सकते हैं।

इससे पहले दो बार मुख्यमंत्री के दिल्ली आने का कार्यक्रम था, लेकिन ऐन वक्त पर टल गया। पार्टी के एक शीर्ष नेता की मानें तो शिवराज सिंह चौहान उपचुनाव तक किसी मंत्रिमंडल विस्तार के पक्ष में नहीं हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने शिवराज के इस कार्यकाल को इंटरवल बताया है। खुद के सत्ता में लौटने की उम्मीद को अ्भी पूरी तरह से जिंदा रखा है। मुख्यमंत्री शिवराज भी ऐसे समय में बहुत जोखिम लेने के पक्ष में नहीं हैं।

दूसरे तीन बार राज्य का मुख्यमंत्री बनने के बाद भी वह मध्य प्रदेश सरकार का गठन और उसका भविष्य पहले की तरह अपने हिसाब से नहीं तय कर पा रहे हैं। इसमें केंद्रीय नेतृत्व का काफी दखल बढ़ा है।

लिहाजा टीम शिवराज के कुछ नेताओं का मानना है कि अगस्त-सितंबर में उपचुनाव का नतीजा आने के बाद मंत्रिमंडल का विस्तार होने में बुराई नहीं है। लेकिन बताते हैं कि केंद्रीय नेतृत्व इसमें देरी के पक्ष में नहीं है।

उपचुनाव ही बिगाड़ रहा है खेल

भाजपा के एक नेता ने कहा कि 24 सीटों पर होने वाला उपचुनाव ही सारा खेल बिगाड़ रहा है। इसके दबाव में असमंजस बढ़ रहा है, लेकिन जल्द सब ठीक हो जाएगा। भाजपा उपचुनाव से पहले किसी तरह का कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती।

शिवराज पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव को विधानसभा अध्यक्ष की जिम्मेदारी देना चाहते हैं। भूपेन्द्र सिंह को मंत्रिमंडल में लेना चाहते हैं, लेकिन इसे लेकर भारी खींचतान है।

विष्णु खत्री, रामेश्वर शर्मा, अरविंद भदौरिया, अशोक रोहाणी, अजय विश्नोई, उषा ठाकुर, रमेश मेंदोला, मालिनी गौड़ ने भी मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीदें पाल रखी है।

नेताओं की फेहरिस्त लंबी है और भाजपा के पास रिक्त सीटों की कमी है। बताते हैं कुछ नेताओं की महत्वकांक्षा और अहम भी टकराने शुरू हो गए हैं।

ऐसे में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा, ज्योतिरादित्य सिंधिया समेत अन्य की मेहनत काफी बढ़ गई है।
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शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया शिवराज सिंह चौहान-ज्योतिरादित्य सिंधिया

मध्यप्रदेश में भाजपा को चैन से नहीं बैठने देंगे कमलनाथ, कांग्रेस हाई कमान ने भी दी छूट

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ कांग्रेस छोड़कर भाजपाई हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया से राजनीतिक बदला लेना चाहते हैं। कमलनाथ की इस मंशा को पूरा करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर्दे के पीछे से सक्रिय हैं और कांग्रेस हाई कमान इस मामले में चुप है। जीतू पटवारी की भी सक्रियता बढ़ गई है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक बागी विधायकों ने भी इसे महाराज की इज्जत का सवाल मानकर तैयारी तेज कर दी है। पूर्व मंत्री इमरती देवी के बयान के बाद सूबे की राजनीति काफी गरमाई है।

दिलचस्प है कि कोविड-19 संक्रमण के कारण अभी उपचुनाव कब होगा, कहा नहीं जा सकता, लेकिन पिछले 18 साल में यह पहला समय है, जब शिवराज सिंह चौहान पीछे छूट गए हैं।

भाजपा के एक वरिष्ठ नेता शिवराज के पीछे छूटने और राजनीति के कमलनाथ बनाम सिंधिया का रूप लेने पर मुस्कराकर कहते हैं कि होने दीजिए। जब चुनाव की तारीखें घोषित होगीं तो सब बदल जाएगा। सूत्र का कहना है कि ग्वालियर के महाराज अब भाजपा के नेता हैं।

उनके  मान, सम्मान की हिफाजत हमारा काम है। सिंधिया ने कमलनाथ को कुर्सी से पलट दिया है तो पूर्व मुख्यमंत्री आखिर इसे कैसे भूल सकते हैं?

भाजपा के एक राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का भी कहना है कि उपचुनाव से पहले का माहौल भले सिंधिया बनाम कमलनाथ का रूप लेता दिखाई दे, लेकिन अंतत: यह भाजपा बनाम कांग्रेस ही होगा। शिवराज सिंह चौहान भाजपा का मध्यप्रदेश में चेहरा हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हैं।

कमलनाथ को वह जवाब देने में सक्षम हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। इसलिए भाजपा के लिए चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। अभी तो पार्टी का उससे ज्यादा ध्यान मध्यप्रदेश में सही समय पर मंत्रिमंडल के विस्तार पर है।

क्या है कमलनाथ का प्लान?

मध्यप्रदेश में 24 सीटों पर उपचुनाव होना है। 22 सीटें ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बागी हुए विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई हैं और दो सीट एक भाजपा और एक कांग्रेस के विधायक की मृत्यु से रिक्त है।

इनमें से कमलनाथ की निगाह 18-20 सीटों पर टिकी है। टीम कमलनाथ इसे सिंधिया का कांग्रेस पार्टी को धोखा देने के रूप में लगातार प्रचारित कर रही है।

कांग्रेस के नेताओं का यह भी कहना है कि भाजपा ने कोविड-19 संक्रमण के बाबत कांग्रेस की सरकार गिराने के चक्कर में पूरे प्रदेश के निवासियों की जान खतरे में डाल दी। अब राज्य उसका खामियाजा भुगत रहा है।

इसके साथ-साथ ग्वालियर चंबर संभाग में 15 सीटों पर कांग्रेस के नेताओं ने कोशिशें तेज कर दी है। पार्टी की निगाह उन नेताओं पर है जो भाजपा का यहां खेल बिगाड़ सकते हैं।

इस क्षेत्र के तमाम भाजपा नेता जीवन भर ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों का विरोध करते रहे हैं। अब उनके सामने अपना राजनीतिक वजूद बनाए रखने की चुनौती है। इस बीच ज्योतिरादित्य ने भाजपा विधायकों और नेताओं के संपर्क में होने का बयान देकर भी भाजपा के खेमे में हलचल बढ़ा दी है।

भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा भी गोटी बिछाने में माहिर हैं

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अभी तेल और तेल की धार दोनों देख रहे हैं। उनका ध्यान अभी प्रशासनिक कामकाज की तरफ ज्यादा है। लेकिन भाजपा अध्यक्ष वीडी शर्मा चुप नहीं बैठे हैं।

वह ग्वालियर चंबल संभाग के नेताओं से लगातार फीडबैक ले रहे हैं। भाजपा के जिलाध्यक्षों, क्षेत्रीय नेताओं के संपर्क में हैं। वीडी शर्मा की टीम को लग रहा है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों के साथ वह भाजपा की नैया पार लगा ले जाएंगे।

सूत्र बताते हैं कि सिंधिया समर्थक नेताओं ने भी कसरत बढ़ाई है। हालांकि अभी वह भाजपा नेताओं के बीच में घुलमिल नहीं पा रहे हैं। सिंधिया समर्थक नेताओं के बयान, व्यवहार को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के पास शिकायत आने का सिलसिला जारी हैै।

भाजपा ने संक्षिप्त विस्तार में दिया संदेश, लेकिन परेशानी भी कम नहीं

भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान के संक्षिप्त मंत्रिमंडल विस्तार में अपना संदेश तो दिया, लेकिन अंदरखाने में बात नहीं बनी है। बताते हैं इसके चलते अभी तक शिवराज चौहान मंत्रिमंडल के 29 मंत्रियों का शपथ ग्रहण रुका है।

संक्षिप्त मंत्रिमंडल में तीन मंत्री भाजपा के, दो सिंधिया के साथ गए विधायक बने। नरोत्तम मिश्रा न केवल मंत्री बने हैं, उनके पास महत्वपूर्ण विभाग भी है। नरोत्तम के जरिए भाजपा ने यह संदेश देने की कोशिश की कि वह सबको साथ लेकर चलेगी।

हालांकि अब सबसे बड़ी चुनौती साथ लेकर चलना ही बन रही है। भाजपा के कई दिग्गज, उत्साही नेता मंत्रिमंडल में जगह चाहते हैं। वह इसके लिए पूरी कोशिश कर रहे हैं।

सिंधिया का खेमा भी अपने राजनीतिक तरीकों से अपना दबाव बनाए है। उपचुनाव भी होना है। इस पर कांग्रेस की भी नजर है। इतना भाजपा की परेशानी बढ़ाने के लिए काफी है।
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प्रयागराज से 137 छात्र-छात्रा भेजे गए मध्य प्रदेश

कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया
यहां आकर पढ़ाई करने वाले दूसरे राज्य के छात्र-छात्राओं को भी उनके गृह जनपद भेजे जाने की कवायद शुरू हो गई है। शुक्रवार को मध्य प्रदेश के 137 विद्यार्थियों को उनके घर भेजा गया। रवानगी शाम को एंग्लो बंगाली इंटर कालेज परिसर से हुई।

प्रदेश सरकार ने प्रयागराज में बाहर से आकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को उनके घर भेजने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में पहले उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों के करीब 16 हजार विद्यार्थियों को गृह जनपद भेजा गया। इसके बाद शुक्रवार को मध्य प्रदेश के विद्यार्थियों को भेजा गया। घर जाने के इच्छुक विद्यार्थियों को कंट्रोल रूम में फोन करके नाम, पता आदि डिटेल नोट कराने के लिए कहा गया था। फिर सभी को एंग्लो बंगाली में एकत्रित किया गया। वहां से उन्हें मध्य प्रदेश भेजा गया।
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मध्यप्रदेश में संक्षिप्त मंत्रिमंडल तो बना, राज्य भाजपा के हर खेमे के लिए राजनीति करने की गुंजाइश बाकी

अरेंजमेंट के तहत कोविड-19 से जूझ रहे मध्यप्रदेश में तमाम कयासबाजियों को विराम देते हुए मंगलवार को संक्षिप्त मंत्रिमंडल ने शपथ ले ली। पद और गोपनीयता की शपथ लेने वाले पांच मंत्रियों में दो नाम (तुलसी सिलावट और गोविंद सिंह राजपूत) ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए नेताओं के हैं।
 

एक नाम कैलाश विजयवर्गीय और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दोनों से अच्छे संबंध रखने वाले कमल पटेल का है। आदिवासी, उमरिया मानपुर से पांच बार विधायक रही मीना सिंह को भी मंत्रिमंडल में जगह मिली है।

जगह पाने वालों में मध्यप्रदेश का ब्राह्मण चेहरा नरोत्तम मिश्रा भी हैं। इस तह से भाजपा ने शिवराज सिंह चौहान को मुख्य चेहरा और मिले जुले पांच चेहरों को मंत्री पद देकर सभी को साधने की कोशिश की है। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की सोमवार देर शाम मंजूरी के बाद सोमवार को ही तय हो गया था कि मंगलवार को छोटा मंत्रिमंडल आकार ले लेगा।

लॉकडाउन के बाद 29 चेहरे होंगे शामिल

भाजपा के एक बड़े नेता ने कहा कि यह संकटकालीन व्यवस्था है। हमारे लिए इस समय मंत्रिमंडल महत्वपूर्ण नहीं है। सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लोगों की कोविड-19 के संक्रमण से जान बचाना है।

यह संक्षिप्त मंत्रिमडल कोविड-19 के खतरे को देखते हुए मुख्यमंत्री की सहायता के लिए बना है। लॉकडाउन के बाद मंत्रिमंडल का पूर्ण गठन होगा। तब 29 चेहरे और शामिल किए जाएंगे। सूत्र का कहना है कि 21 अप्रैल को संक्षिप्त मंत्रिमंडल बना है ताकि कामकाज सुचारू रूप से चल सके।

पांचों मंत्री करोड़पति, सभी अनुभवी

शिवराज मंत्रिमंडल में नरोत्तम मिश्रा प्रभावशाली चेहरा हैं। नरोत्तम की घोषित संपत्ति 6.88 करोड़ रुपये है। शिवराज की पिछली सरकार में वह जल संसाधन एवं सूचना मंत्री थे। विधानसभा चुनाव के दौरान खर्च का ब्यौरा न दे पाने, पेड न्यूज के आरोप में नरोत्तम को उच्चतम न्यायालय ने तीन साल के लिए अयोग्य भी घोषित कर दिया था।

बाद में वह स्टे ले आए थे। नरोत्तम  का कार्यक्षेत्र भी ज्योतिरादित्य सिंधिया के दबदबे वाला ग्वालियर, चंबल संभाग ही है। वह दतिया क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। कमल पटेल हरदा से पांचवी बार विधायक बने हैं। शिवराज की पिछली सरकार में चिकित्सा मंत्री रहे हैं। पटेल की कुल घोषित संपत्ति 6.43 करोड़ रुपये है।

तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार सिंह चौहान ने पटेल पर कभी पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए नोटिस भी जारी किया था। भाजपा के पुराने नेताओं में तीसरा चेहरा पांच बार की विधायक, पिछली सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री, आदिवासी नेता मीना सिंह का है। मीना सिंह की घोषित संपत्ति 1.76 करोड़ रुपये है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया से करीब और विश्वास का रिश्ता रखने वाले तथा कमलनाथ सरकार में स्वास्थ्यमंत्री रहे अनुसूचित जाति के नेता तुलसी सिलावट को भी जगह मिली है। तुलसी सिलावट ही सबसे अमीर मंत्री हैं।

उनकी कुल घोषित संपत्ति 8.26 करोड़ रुपये हैं। सिंधिया के ही करीबी सामान्य वर्ग के गोविंद सिंह राजपूत को भी मंत्री बनाया गया। उनकी कुल संपत्ति 3.87 करोड़ रुपए हैं।

ज्योतिरादित्य की बुआ समेत ये चेहरे हैं कतार में

ज्योतिरादित्य सिंधिया की बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को मंत्रि परिषद में जगह मिलती रही है। अभी वह कतार में हैं। गोपाल भार्गव, भूपेन्द्र सिंह जैसे शिवराज के करीबी विश्वसनीय नेताओं के नाम पर भी कोई फैसला होना है।

रामपाल सिंह, राजेन्द्र शुक्ला, गौरी शंकर बिसेन, विजय शाह जैसे नेताओं को लेकर भी चर्चा जारी है। चर्चा के केन्द्र में सिंधिया के कोटे के प्रद्युम्न सिंह, बिसाहू लाल, महेन्द्र सिंह सिसोधिया, इमरती देवी, प्रभुराम चौधरी भी हैं। समझा जा रहा है कि इन सबको मंत्रिमंडल के विस्तार में जगह मिल सकती हैं।

अभी तो चित, पट दोनों केंद्र के हाथ में

मध्य प्रदेश भाजपा में जो नेता ज्योतिरादित्य के भाजपा में जाने से नाराज बताए जा रहे थे, उनमें एक नाम नरोत्तम मिश्रा का भी लिया जा रहा था। कहा जा रहा है कि नरोत्तम, कमल और मीना को जगह देकर केंद्र सरकार ने चित और पट, दोनों को अपने पास रखा है।

सिंधिया के खेमे का सम्मान करके राज्य की राजनीति को एक संदेश दे दिया है। मध्य प्रदेश की राजनीति को समझने वाले बताते हैं कि यह संदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए भी है।

वह राज्य के मुख्यमंत्री रहेंगे, लेकिन उनके लिए सरकार चलाने के दिन भी पहले जैसे नहीं रहने वाले हैं। माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल विस्तार में यह तस्वीर पूरी तरह से साफ हो जाएगी। फिलहाल अभी राज्य भाजपा के हर खेमे के लिए राजनीति करने की पूरी गुंजाइश बची हुई है।
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