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Digital Edition

जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर दोबारा की पीएम मोदी की गलत फोटो पोस्ट, विवाद बढ़ने पर हटा दी तस्वीर

विधायक जीतू पटवारी ने देश की अर्थव्यवस्था, किसानों की बिगड़ती आर्थिक स्थिति, बेरोजगारी, प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल मीडिया पर एक फोटो पोस्ट की। इस फोटो के पोस्ट करने से मध्य प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। जीतू पटवारी के इस पोस्ट में पीएम मोदी अपने हाथ में कटोरा लिए हुए दिखाई दे रहे हैं। जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फोटो के साथ शनिवार सुबह एक ट्वीट भी किया था जिसमें उन्होंने देश के हालात को लेकर प्रधानमंत्री पर तंज कसा था। 
 
बीजेपी का आरोप है कि प्रधानमंत्री की इस तस्वीर से छेड़छाड़ कर यह फोटो तैयार किया गया है. इस मामले को लेकर बीजेपी के नेता शैलेंद्र शर्मा ने विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा से इसकी शिकायत की है। जिस पर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने संज्ञान लेते हुए कांग्रेस के विधायक जीतू पटवारी से जवाब तलब करने की बात कही है. उन्होंने प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पत्र लिख कर प्रधानमंत्री की फोटो के साथ छेड़छाड़ करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है
 
अपने ट्विटर हैडल से जीतू पटवारी ने हटा दी तस्वीर
विवाद बढ़ने पर जीतू पटवारी ने देर शाम अपने ट्विटर हैंडल से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथ में कटोरा लेने वाली इस तस्वीर को हटा दिया है। बता दें कि पूर्व मंत्री जीतू पटवारी पहले भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाते रहे हैं। पिछले दिनों उन्होंने एक विमान के अंदर की लग्जरी तस्वीर शेयर की थी। साथ ही यह दावा किया था कि यह प्रधानमंत्री का विमान है और तस्वीर उस विमान के अंदर की है।

जीतू पटवारी द्वारा शेयर की गई यह तस्वीर वायरल हो गई थी और इसे कई बार रिट्वीट भी किया गया था। बाद में पीआईबी ने पूरे मामले की पड़ताल करने पर इस तस्वीर को गलत ठहराया था। बहरहाल पहले प्रधानमंत्री मोदी के विमान की गलत फोटो शेयर करने को लेकर विवादों में आए जीतू पटवारी की अब पीएम मोदी के हाथ में कटोरा लेकर फोटो पोस्ट करने को लेकर लोगों के हाथों ट्रोल हो रहे  हैं और उनका सामना कर रहे हैं।
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मध्यप्रदेश: निजी अस्पताल में कोरोना का इलाज करवा सकते हैं सरकारी कर्मचारी, सरकार करेगी भुगतान

मोहन भागवत (फाइल फोटो)
मध्यप्रदेश की सरकार ने अपने कर्मचारियों के लिए एक राहत भरी योजना की घोषणा की है। सरकार ने एलान किया है कि अगर प्रदेश का कोई सरकारी कर्मचारी कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो वो अपना इलाज किसी भी निजी अस्पताल में करा सकता है, इसका भुगतान सरकार करेगी।


सरकार की घोषणा के मुताबिक सरकारी कर्मचारी और उनके परिजन कोरोना का इलाज निजी अस्पतालों में करवा सकेंगे। उनके इलाज में लगने वाली दवा फेविपिरावियर और इंजेक्शन रेमडेसिविर जैसी महंगी दवाइयों समेत पूरे इलाज का खर्चा सरकार वहन करेगी।

इसके लिए कर्मचारी अपना सारा हिसाब-किताब अपने विभाग के माध्यम से जिले के सिविल सर्जन और अस्पताल अधीक्षक को भेजेगा और यहीं से मेडिकल बिलों का भुगतान किया जाएगा। हालांकि यह व्यवस्था मध्यप्रदेश के केवल सरकारी कर्मचारियों के लिए ही है। 

प्रदेश के स्वास्थ्य आयुक्त संजय गोयल ने इससे संबंधित आदेश जारी कर दिए हैं। इस आदेश में कहा गया है कि अगर सरकारी कर्मचारी सामान्य परिस्थितियों में बीमार होते हैं, तो उन्हें सरकार से अनुबंधित 101 निजी अस्पतालों में इलाज की सुुविधा मिलेगी। वहीं अगर कोरोना मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज कराएगी तो इसका भुगतान सरकार नहीं करेगी।

इसके अलावा कांग्रेस सरकार में 12 लाख सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और अध्यापकों के लिए बनी स्वास्थ्य बीमा योजना को अब संशोधित रूप में लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत अफसरों से एक हजार रुपये, कर्मचारियों से 500 रुपये, चौथी श्रेणी के कर्मचारियों से 400 रुपये हर महीने बीमा के प्रीमियम के तौर पर लिए जाते, जिससे सरकार को हर साल 400 करोड़ रुपये मिलते लेकिन कर्मचारी प्रीमियम की राशि देने का तैयार नहीं हुए।

अब मध्यप्रदेश सरकार इस योजना को संशोधित कर प्रीमियम की राशि कम करके नए रूप में योजना को लाने की तैयारी कर रही है।
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Prayagraj News: पिकनिक मनाने रीवा गए पांच युवक झरने में डूबे, शव निकालने को भी वसूले रुपये

खेल-खेल में परदा बना गले का फंदा, परदे में लिपटने से दस साल के बच्चे की मौत

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक दर्दनाक घटना हुई है, एक दस साल का बच्चा खेल-खेल में फांसी के फंदे का शिकार हो गया। ऋतिक शर्मा अपने घर में परदे से खेल रहा था, तभी वो परदा बच्चे के लिए फांसी का फंदा बन गया और कुछ दिन बाद बच्चे की मौत हो गई।


परदे से खेलते समय बच्चा अचानक परदे में लिपट गया, जिसके बाद बच्चे की तबीयत बिगड़ी तो उसके परिवार वाले उसे हमीदिया अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में दस दिन तक बच्चे का इलाज चला लेकिन डॉक्टर उसकी जान नहीं बचा पाए। जांच अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने बताया कि ऋतिक अपने परिवार के साथ अयोध्या नगर स्थित भवानीधाम फेज-1 में रहता था।

ऋतिक चौथी कक्षा में पढ़ता था और उसके पिता निजी नौकरी करते हैं। एसआई ने बताया कि 29 अगस्त को ऋतिक अपनी मां के साथ खेल रहा था, मिनी पियानो बजा रहा था और बहन दूसरे कमरे में थी। खेल के दौरान ऋतिक परदे से लिपटकर खेल रहा था, जिसके बाद परदे से उसका गला जकड़ गया और वो बेहोश हो गया।

जब उसकी मां ने परदे से लिपटा देखा तो वो चिल्लाई और तुरंत अपने बच्चे को अस्पताल ले गई। बच्चे का शुरुआती इलाज पिपलानी स्थित इंद्रपुरी के एक निजी अस्पताल में चल रहा था लेकिन बुधवार को बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसे हमीदिया अस्पताल ले जाया गया। यहां डॉक्टर ने बच्चे के चेक-अप के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने बताया कि परदे की जकड़न से बच्चे की गर्दन की हड्डी टूट गई थी।
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जामताड़ा जैसे मॉडल पर मध्य प्रदेश के जिलों में ऑनलाइन ठगी, चार आरोपी गिरफ्तार

झारखंड के जामताड़ा की तर्ज पर मध्य प्रदेश की साइबर सेल ने एक बड़े अंतरराज्यीय ठग के भांडाफोड़ का दावा किया है। इस ऑनलाइन धोखेधड़ी करने वाले लोगों को लॉजिस्टिक सहयोग दिया जाता था, उन्हें झूठी और गलत आईडी पर जारी किए गए सिम कार्ड दिए जाते थे।


मध्य प्रदेश के शिवपुरी में पुलिस ने ऐसे चार लोगों को गिरफ्तार किया है, इसमें टेलीकॉम सर्विस कंपनी के तीन रिटेलर और एक डिस्ट्रीब्यूटर शामिल है। ये लोग दिल्ली और दूसरे राज्यों के ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोह के लिए लॉजिस्टिक आपूर्तिकर्ता का काम करते थे।

पुलिस ने बताया कि अभी इस गिरोह के कुछ लोग फरार हैं। दरअसर भोपाल के एक व्यापारी ने जनवरी में एक क्रेडिट कार्ड फ्रॉड की शिकायत की थी, जिसकी पुलिस जांच कर रही थी। जांच में जिस आरोपी को पकड़ा उसके पास से दो हजार से ज्यादा सिम कार्ड बरामद किए गए जो अलग-अलग आईडी पर जारी किए गए थे।

पुलिस ने बताया कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में झारखंड के जामताड़ा जैसा मॉडल देखा जा रहा है, इसमें शिवपुरी, शियोपुर, गुना और भिंड शामिल हैं। भोपाल के साइबर सेल के एसपी गुरकरण सिंह का कहना है कि 15 जनवरी को भोपाल के निवासी योगेश सूद ने एक शिकायत दर्ज कराई थी।

शिकायत में कहा गया कि योगेश को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया था, कॉल पर महिला बात कर रही थी और खुद को क्रेडिट कार्ड कंपनी का बता रही थी। महिला ने योगेश ने क्रे़डिट कार्ड की सीमा बढ़ाने को कहा और एक लिंक दिया। महिला ने कहा कि इस लिंक पर जाकर सभी प्रक्रिया पूरी करनी है।

योगेश सूद की शिकायत में आगे कहा गया कि जैसे ही उन्होने लिंक पर क्लिक किया, उनके खाते से 1.22 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। योगेश सूद की शिकायत के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया और जांच शुरू कर दी। जांच में पता चला कि योगेश के खाते से पैसा 12 ऑनलाइन वॉलेट में ट्रांसफर किया गया था।

जांच में पुलिस को पता चला कि जिस नंबर से योगेश पर कॉल आती हैं और जिन ऑनलाइन वॉलेट में पैसा ट्रांसफर हुआ है वो मध्य प्रदेश के अलग-अलग पतों पर रजिस्टर हैं। पुलिस ने एक टीम को शिवपुरी भेजा, जहां से टेलीकॉम कंपनी के रिटेलर और डिस्ट्रीब्यूटर को हिरासत में लिया गया।

जांच अधिकारी अभिषेक सोनेकर ने बताया कि आरोपियों ने फर्जी आईडी और आधार कार्ड बनाने की बात कबूली है। आरोपियों ने गांव वालों की ओर से उपलब्ध कराए गए प्रमाण पत्रों के आधार पर ये फर्जी आईडी बनाई और जामताड़ा के मॉडल पर फिशिंग का कारोबार किया।

पुलिस ने बताया कि इस मामले में सतीश दुबे नाम का एक बिचौलिया भी था, जो फर्जी सिम कार्ड बेचने और बनाने में आरोपियों की मदद करता था। फिलहाल सतीश जेल में है।
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ग्वालियर-चंबल संभाग में कमलनाथ, दिग्विजय से ज्योतिरादित्य लड़ेंगे राजनीतिक वर्चस्व की जंग

230 सदस्यों की मध्यप्रदेश विधानसभा में करीब 27 सीटों पर उपचुनाव होना है। एक सीट को छोड़ दें तो 26 सीट पर 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव जीते थे। जिनमें से 22 पार्टी के बागी नेता ज्योतिरादित्य के साथ भाजपाई हो गए। अब इन सीटों का उपचुनाव पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, दिग्विजय सिंह और भाजपा के नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए नाक का सवाल बन गया है। पिछले चार विधानसभा चुनावों के बाद यह पहला अवसर है जब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पास राज्य की कमान है और चुनाव के महारथी ज्योतिरादित्य सिंधिया है। केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर सिंधिया के साथ चुनाव में सफलता की बड़ी जिम्मेदारी उठा रहे हैं और राज्य के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भी अभी पिक्चर से गायब हैं।
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