विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
होली के दिन, किए-कराए बुरी नजर आदि से मुक्ति के लिए कराएं कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा : 9- मार्च-2020
Astrology Services

होली के दिन, किए-कराए बुरी नजर आदि से मुक्ति के लिए कराएं कोलकाता के दक्षिणेश्वर काली मंदिर में पूजा : 9- मार्च-2020

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

बिहार

शुक्रवार, 28 फरवरी 2020

तेजस्वी की बेरोजगारी हटाओ यात्रा पर पोस्टर वॉर, पटना में लगे पोस्टर में लिखा गया आर्थिक उगाही यात्रा

बिहार: रोहतास में भीषण सड़क हादसा, पांच की मौत, 12 घायल

वारिस पठान के बयान को भाकपा नेता कन्हैया ने बताया गलत, कहा- धार्मिक और कट्टर होने में अंतर

एआईएमआईएम के नेता वारिस पठान के विवादित बयान पर भाकपा नेता कन्हैया कुमार ने कहा कि उनका बयान गलत है। कन्हैया ने कहा कि धार्मिक और कट्टर होने के बीच में अंतर है।

जेएनयू के पूर्व छात्र नेता ने सीएए-एनपीआर-एनआरसी के खिलाफ राज्यव्यापी ‘जन गण मन यात्रा’ के दौरान पठान के बयान और बंगलूरू में एआईएमआईएम की एक रैली में एक युवती द्वारा ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जाने के संबंध में पूछे गए प्रश्नों का उत्तर देते हुए यह बात कही।

कन्हैया पर भी 2016 राजद्रोह का आरोप लगा था, जिसके बाद वह सुर्खियों में आए थे। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि किसी बलि के बकरे की आवश्यकता हमेशा होती है। चार साल पहले बलि का बकरा मैं था, जब सोशल मीडिया समेत हर जगह मुझे अपशब्द कहे जा रहे थे। अब मैं पुराना हो चुका हूं इसलिए नफरत करने के लिए नई चीजें खोज ली गई हैं।

हालांकि उन्होंने कहा कि वह धर्म के नाम पर लोगों को भड़काने की हर कोशिश का विरोध करते हैं। कुमार ने यहां संवाददाताओं से कहा कि यह समझने की आवश्यकता है कि धार्मिक होने और कट्टर होने एवं नफरत को सही ठहराने के लिए किसी की आस्था का इस्तेमाल करने के बीच अंतर है।

क्या कहा था वारिस पठान ने

एआईएमआईएम नेता और महाराष्ट्र के पूर्व विधायक वारिस पठान ने कर्नाटक के गुलबर्ग में हुई एक रैली के दौरान हिन्दू-मुसलमान का मुद्दा उठाते हुए भड़काऊ बयान दिया था।  पठान ने कहा था कि वे कहते हैं कि हमने अपनी महिलाओं को सामने रखा है, अभी तो केवल शेरनियां बाहर आई हैं और आप पसीना-पसीना होने लगे हैं। तब क्या होगा जब हम सभी साथ आ जाएंगे। 15 करोड़ हैं लेकिन सौ पर भी भारी हैं, ये याद रखना। पठान ने यह बयान एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की मौजूदगी में ही दिया था। 
... और पढ़ें

महारैली में लोगों से राष्ट्रगान गाने को कहा और खुद ही लाइनें भूले कन्हैया कुमार

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में बिहार के पटना में स्थित ऐतिहासिक गांधी मैदान में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के पूर्व अध्यक्ष और सीपीआई नेता कन्हैया कुमार की रैली का आयोजन किया गया। इस दौरान कन्हैया ने लोगों से राष्ट्रगान गाने का आह्वान किया, लेकिन वह खुद ही इसे गाने में गलती कर गए। जिसको लेकर विपक्ष उन्हें निशाने पर ले सकता है। 

रैली में लोगों को संबोधित करते हुए सीपीआई नेता ने सीएए को काला कानून बताया और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने संविधान बचाओ नागरिकता बचाओ महारैली में गृहमंत्री अमित शाह को जमकर घेरा और दिल्ली हिंसा के लिए राजनीतिक पार्टियों को जिम्मेदार ठहराया। 

इसके बाद कन्हैया ने मंच से ही लोगों से कहा कि वह राष्ट्रगान गाएं और खुद भी राष्ट्रगान गाने लगे। लेकिन वह राष्ट्रगान को गलत गाने लगे। कन्हैया राष्ट्रगान की पंक्तियों को सही तरह नहीं गा पाए। वहीं, अब राजनीतिक दल उनकी इस गलती का फायदा उठाना चाहेंगे। 

कन्हैया की इस महारैली में तुषार गांधी, मेधा पाटकर, आइशी घोष ( जेएनयू छात्र संघ), अलका लांबा, कन्नन गोपीनाथन समेत नजीब की मां फातिमा नफीस व रोहित वेमुला की मां राधिका वेमुला भी मौजूद थीं। 

सीपीआई नेता ने अपने संबोधन में कहा कि दिल्ली में हुई हिंसा के लिए राजनीतिक पार्टियां जिम्मेदार हैं, जिन्होंने अपने एजेंडे के लिए आग लगाई है। उन्होंने कहा कि देश को यह तय करना हैं कि वह गांधी जी के रास्ते पर चलना चाहता हैं या गोडसे के रास्ते पर। 
... और पढ़ें
Kanhaiya Kumar Kanhaiya Kumar

रिम्स में ही होगा लालू का इलाज, नहीं भेजे जाएंगे एम्स

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को रांची के रिम्स अस्पताल से किसी दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा। रिम्स मेडिकल बोर्ड ने गुरुवार को एक बैठक के बाद कहा कि उन्हें रिम्स में बेहतर इलाज मिल रहा है इसलिए उन्हें यहां से किसी दूसरे अस्पताल में भर्ती नहीं किया जाएगा। 

रिम्स की मेडिकल बोर्ड ने 12 गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लालू प्रसाद की मेडिकल रिपोर्ट देखने के बाद यह फैसला लिया है। लालू को किडनी की गंभीर बीमारी होने के चलते एक विशेषज्ञ नेफ्रालॉजिस्ट से मदद ली जाएगी। रिम्स के चिकित्सा अधीक्षक विवेक कश्यप ने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने लालू की रिपोर्ट का गहन जांच की गई। उनके इलाज, प्रोटोकॉल देखने के बाद बोर्ड इस नतीजे पर पहुंचा कि उन्हें सही इलाज दिया जा रहा है। 

कश्यप ने बताया कि किडनी थ्री की बीमारी के लिए विशेषज्ञ नेफ्रालॉजिस्ट से सलाह ली जाएगी। अगर नेफ्रालॉजिस्ट यह कहता है कि उन्हें बेहतर इलाज के लिए स्थानांतरित किया जाएं तो हम उस पर विचार करेंगे। विशेषज्ञ नेफ्रालॉजिस्ट बुलाने के बाबत डॉ विवेक कश्यप ने कहा कि हम एम्स के पैटर्न पर चलते हैं, एम्स के डॉक्टर से ही परामर्श लेंगे।

गौरतलब है कि लालू को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के एम्स अस्पताल में स्थानांतरित करने के कयास लगाए जा रहे थे। वर्तमान समय में लालू प्रसाद सजायाफ्ता कैदी हैं, इसलिए उनको इलाज के लिए दिल्ली भेजे जाने से पहले मेडिकल बोर्ड उनकी जांच करने वाला था। इसके बाद बोर्ड की रिपोर्ट जेल और न्यायालय को भेजी जानी थी, जिसके बाद उनके आदेश लेकर ही उन्हें दिल्ली भेजा जा सकता था। लेकिन अब यह साफ हो चुका है कि उन्हें इलाज के लिए रिम्स में ही रखा जाएगा। 

बता दें कि लालू के मुख्यमंत्री रहने के दौरान पशुपालन विभाग में 900 करोड़ रुपये से ज्यादा का चारा घोटाला किया गया था। अभी तक इस घोटाले से जुड़े चार मामलों में कोषागार से फर्जी धन निकासी के दोष में लालू को सजा घोषित हो चुकी है। इनमें दो मामले चाईबासा कोषागार के हैं, जबकि एक-एक मामला दुमका व देवघर कोषागार का है।

हालांकि चाईबासा और देवघर के एक-एक मामले में लालू को जमानत मिल चुकी है। उन पर दोरांदा कोषागार से जुड़े पांचवां मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत में सुनवाई जारी है। दिसंबर, 2017 से जेल में बंद लालू फिलहाल रांची में राजेंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस में इलाज करा रहे हैं।

 
... और पढ़ें

तेजस्वी की नीतीश से मांग, एनआरसी-एनपीआर के बाद अब सीएए पर प्रस्ताव पास करे राज्य सरकार

राजद नेता तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ संकल्प प्रस्ताव पास करने की मांग की है। तेजस्वी यादव ने ट्वीट करते हुए कहा कि "एनआरसी और एनपीआर पर विधानसभा में सर्वसम्मति से हमारा प्रस्ताव पारित होने के बाद हम राज्य सरकार से पूरजोर मांग करते हैं कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने एवं मानवता विरोधी नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ भी इसी सत्र में संकल्प प्रस्ताव पास किया जाए अन्यथा हमारी लड़ाई जारी रहेगी।"




बिहार में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को 2010 के प्रारूप के साथ ही लागू करने को लेकर मंगलवार को विधानसभा में प्रस्ताव पास हो गया। इसके साथ ही एनडीए शासित राज्यों में ऐसा करने वाला बिहार पहला राज्य बन गया है। इसे लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चा हो रही है। 

एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास होने से पहले नीतीश कुमार ने राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ विधानसभा में बने मुख्यमंत्री कक्ष में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों के बीच क्या बातें हुईं, इसको लेकर किसी ने खुलासा नहीं किया। 

इस मुलाकात के थोड़ी देर बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सदन में एनपीआर और एनआरसी पर प्रस्ताव पास होने की घोषणा कर दी। प्रस्ताव के मुताबिक बिहार में एनआरसी की आवश्यकता नहीं बताई गई है। साथ ही एनपीआर 2010 के प्रारूप के आधार पर लागू करने का सुझाव केंद्र सरकार को भेजने की बात कही गई है। 

प्रस्ताव पास होने के बाद तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा कि बिहार में एनआरसी और एनपीआर लागू नहीं करने की हमारी मांग पर आज विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कराया गया। एनआरसी और एनपीआर पर एक इंच भी नहीं हिलने वाली भाजपा को आज हमने एक हजार किलोमीटर हिला दिया। भाजपा वाले माथा पकड़े टुकुर-टुकुर देखते रह गए। संविधान मानने वाले हम लोग सीएए भी लागू नहीं होने देंगे।
... और पढ़ें

नीतीश-तेजस्वी की बंद कमरे में मुलाकात, बिहार में नए सियासी समीकरण के संकेत

बिहार में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) के खिलाफ और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को 2010 के प्रारूप के साथ ही लागू करने को लेकर मंगलवार को विधानसभा में प्रस्ताव पास हो गया। इसके साथ ही एनडीए शासित राज्यों में ऐसा करने वाला बिहार पहला राज्य बन गया है। इसे लेकर सियासी गलियारों में कई तरह की चर्चा हो रही है। 



एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पास होने से पहले नीतीश कुमार ने राजद नेता तेजस्वी यादव के साथ विधानसभा में बने मुख्यमंत्री कक्ष में मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। दोनों के बीच क्या बातें हुईं, इसको लेकर किसी ने खुलासा नहीं किया। इस मुलाकात के थोड़ी देर बाद विधानसभा अध्यक्ष विजय कुमार चौधरी ने सदन में एनपीआर और एनआरसी पर प्रस्ताव पास होने की घोषणा कर दी।

प्रस्ताव के मुताबिक बिहार में एनआरसी की आवश्यकता नहीं बताई गई है। साथ ही एनपीआर 2010 के प्रारूप के आधार पर लागू करने का सुझाव केंद्र सरकार को भेजने की बात कही गई है। प्रस्ताव पास होने के बाद तेजस्वी यादव ने ट्वीट कर कहा कि बिहार में एनआरसी और एनपीआर लागू नहीं करने की हमारी मांग पर आज विधानसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कराया गया। एनआरसी और एनपीआर पर एक इंच भी नहीं हिलने वाली भाजपा को आज हमने एक हजार किलोमीटर हिला दिया। भाजपा वाले माथा पकड़े टुकुर-टुकुर देखते रह गए। संविधान मानने वाले हम लोग सीएए भी लागू नहीं होने देंगे।

भाजपा बोली यह एक सुझाव, गेंद केंद्र के पाले में

वहीं, भाजपा विधायक मिथिलेश तिवारी ने कहा कि यह एक सुझाव था, मुख्यमंत्री ने पहले ही एक पत्र में केंद्र सरकार को बता दिया था। विधानसभा ने आज सर्वसम्मति से इस पर मुहर लगा दी। यह केंद्र पर निर्भर है कि उसे सुझाव स्वीकार करना है या नहीं। उन्होंने कहा कि यह केंद्र सरकार के खिलाफ प्रस्ताव नहीं था क्योंकि राज्य सरकार ऐसा नहीं कर सकती। यह सिर्फ एक सुझाव था। 

 



चर्चा के दौरान प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव द्वारा नीतीश कुमार को लेकर की गई टिप्पणी पर नीतीश ने तेजस्वी से कहा कि उन्हें ये बातें बोलने का अधिकार नहीं है, यह अधिकार उनके पिता लालू प्रसाद को है। तेजस्वी ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री का इतिहास रहा है 'कब किधर पलटी मार जाएं' इसलिए जल्दी भरोसा नहीं होता। हम लोगों ने भरोसा कर 2015 में साथ सरकार बनाया था लेकिन अब हम लोगों को एक-एक चीज देखना पड़ेगा।

तेजस्वी की इस टिप्पणी पर नीतीश ने कहा सब बात तो हो गई। कहां कोई असहमति है। नीतीश ने तेजस्वी से आगे कहा कि आपको कुछ बात हम पर नहीं बोलना चाहिए  ये सब बोलने का आपके पिता जी को अधिकार है। ज्यादा मत बोला करो।

बाद में तेजस्वी मुख्यमंत्री द्वारा की गई टिप्पणी पर कहा कि पिछली सरकार (नीतीश मंत्रिमंडल) में मैं उपमुख्यमंत्री था न कि मेरे पिता जी।

 
... और पढ़ें

बिहार विधानसभा में 2.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश, शिक्षा पर होगा सबसे ज्यादा खर्च

Tejashwi Yadav and Nitish Kumar
बिहार विधानसभा में मंगलवार को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए बजट पेश किया गया। उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री सुशील कुमार मोदी ने वित्त वर्ष 2020-21 के लिए राज्य सरकार का 2.11 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया।

बजट में 19,172 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष (रेवन्यू सरप्लस) है और इसमें शिक्षा के लिए सबसे अधिक करीब 35,000 करोड रुपये का प्रावधान किया गया है। बिहार विधानसभा में बजट पेश करने के बाद पत्रकारों को संबोधित करते हुए सुशील मोदी ने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 2,11,761.49 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया है, जो 2019-20 के 2,00,501 करोड़ रुपये से 11,260.48 करोड़ रुपये अधिक है।

उन्होंने बताया कि यह 19,172 करोड़ रुपये के राजस्व अधिशेष वाला बजट है और इसमें सबसे अधिक 35,191 करोड़ रुपये का प्रावधान शिक्षा क्षेत्र के लिए किया गया है। सुशील मोदी ने कहा कि इस बजट में 20,374 करोड़ रुपये के राजकोषीय घाटे का अनुमान है।

उन्होंने कहा कि हम राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को तीन प्रतिशत की सीमा के भीतर 2.81 प्रतिशत पर रखने में सफल रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस बजट में सड़क के लिए 17345 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य के लिए 10,937.68 करोड़ रुपये तथा एससी, एसटी, अल्पसंख्यक, ओबीसी और एमबीसी के कल्याण के लिए 11,911.38 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

राजद ने बजट को बताया दिशाहीन

उन्होंने कहा कि मार्च 2020 के अंत तक बिहार के सभी घरों में पाइपलाइन से पेयजल पहुंचने लगेगा, हर घर पक्की सड़क से जुड़ा होगा और जल निकासी की व्यवस्था होगी। बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने बजट को पूरी तरह दिशाहीन बताते हुए आरोप लगाया कि बजट में दूरदर्शिता का अभाव है, बिहार के सात करोड़ युवाओं को रोजगार देने की कोई योजना नहीं है।

उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा की गुणवता सुधारने तथा नियोजित शिक्षकों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।
... और पढ़ें

BPSC: भर्ती परीक्षा की तिथि घोषित, यहां से लें जानकारी

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC - Bihar public service commision) ने सहायक अभियंता भर्तियों की लिखित परीक्षा की तिथियों की घोषणा अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर कर दी है। यह परीक्षाएं 21 मार्च 2020 से 29 मार्च 2020 तक आयोजित की जाएंगी। जिन उम्मीदवार BPSC सहायक अभियंता पदों पर आवेदन किया है, वे बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर परीक्षा तिथियों की जांच कर सकते हैं। उम्मीदवार तिथियों की जानकारी इस खबर में आगे के दिए लिंक के माध्यम से भी देख सकते हैं।

ये भी पढ़ें- 
NIT Recruitment 2020: बिना कोई शुल्क दिए करें आवेदन, अधिकतम आयु 60 वर्ष
मुख्य जानकारी- 
  • आयोग की आधिकारिक अधिसूचना के मुताबिक, विज्ञापन संख्या 01/2019 की सहायक अभियंता (सिविल) परीक्षा 21 मार्च 2020 (शनिवार) और 22 मार्च 2020 (रविवार) को आयोजित होगी।
  • विज्ञापन संख्या 02/2019 सहायक अभियंता (इलैक्ट्रिकल),  03/2019 सहायक अभियंता (सिविल), 04/2019 सहायक अभियंता (मैकेनिकल) की परीक्षाएं 28 मार्च 2020 (शनिवार) और 29 मार्च 2020 (रविवार) को आयोजित होंगी।
आपको बता दें कि बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने विज्ञापन संख्या -01 / 2019, 02/2019, 03/2019,04/2019 के अंतर्गत  सहायक अभियंता (सिविल), इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल इंजीनियरिंग के पदों पर भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। इस भर्ती के लिए इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों ने आवेदन किया गया था। अलग-अलग पदों के लिए इंजीनियरिंग की मैकेनिकल, सिविल, इलैक्ट्रिकल ट्रेडों के ही छात्रों ने आवेदन किए थे।    

ऐसे देखें आधिकारिक वेबसाइट पर मुख्य तिथियां- 

  • सबसे पहले उम्मीदवार परीक्षा संबंधी अधिक जानकारी के लिए आयोग की आधिकारिक वेबसाइट http://www.bpsc.bih.nic.in/ पर जाएं।
  • उसके बाद आपको मुख्य पेज पर परीक्षा तिथियों की अधिसूचना मिल जाएगी।
  • अब आपको उस अधिसूचना पर क्लिक करना होगा।
  • क्लिक करते ही एक नई विंडो आपके सामने खुल जाएगी, जहां आपको सहायक अभियंता (सिविल / मैकेनिकल / इलेक्ट्रिकल) प्रतियोगी परीक्षाओं की तिथि से संबंधित पीडीएफ मिल जाएगी।
... और पढ़ें

बिहार विधानसभा में सीएए-एनआरसी को लेकर हंगामा, एनपीआर को लेकर नीतीश ने कही ये बात

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर कई राज्यों में गतिरोध जारी है। ताजा मामला बिहार का है। जहां मंगलवार को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा सीएए को काला कानून बताने पर सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा हुआ। हंगामे की वजह से सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी।

बिहार विधानसभा की मंगलवार को कार्यवाही शुरू होने पर प्रतिपक्ष के नेता तेजस्वी ने एनपीआर को लेकर विपक्षी दलों राजद, कांग्रेस और भाकपा माले द्वारा लाए गए कार्यस्थगन प्रस्ताव पर सबसे पहले चर्चा कराए जाने तथा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से इसको लेकर स्थिति स्पष्ट किए जाने की मांग की।

राजद ने सीएए को बताया 'काला कानून'

तेजस्वी ने सीएए को काला कानून, संविधान विरोधी और देश को तोड़ने वाला करार दिया। इस पर भाजपा के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि तेजस्वी संविधान का अपमान कर रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी से अपने बयान को वापस लिए जाने की मांग की, जिस पर विपक्षी सदस्यों ने आपत्ति जताई।

इसके बाद विपक्षी और सत्तापक्ष के सदस्यों के बीच नोकझोंक शुरू हो गई। भाजपा के मंत्री नंदकिशोर यादव और विजय कुमार सिन्हा ने यह कहते हुए विपक्ष पर कटाक्ष किया कि क्या संसद एक काला कानून पारित करती है?

वहीं, विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है कि एनपीआर के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 2010 में अंकित श्रेणियों से संबंधित सूचनाएं ही प्राप्त की जाएं जिससे लोगों को कठिनाई नहीं हो।
... और पढ़ें

बिहार में नहीं लागू होगा एनआरसी, एनपीआर भी पुराने प्रारूप में, विधानसभा में प्रस्ताव पारित

बिहार में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू नहीं होगा। इसके अलावा राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को भी 2010 के पुराने प्रारूप के अनुरूप ही लागू किया जाएगा। बिहार विधानसभा में मंगलवार को यह प्रस्ताव पारित किया गया। नीतीश पहले ही इस संबंध में सरकार का पक्ष स्पष्ट कर चुके थे।

बिहार विधानसभा में राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि प्रदेश सरकार ने केंद्र को एनपीआर के फॉर्म में विवादित खंड को हटाने का निवेदन किया है। बिहार में भाजपा के समर्थन वाली जदयू सरकार है। 
 

 

इससे पहले नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लेकर विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्षी सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा भी हुआ। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे काला कानून बताया। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही कुछ देर के लिए स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बताया कि राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखा है कि एनपीआर के तहत राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर 2010 में अंकित श्रेणियों से संबंधित सूचनाएं ही प्राप्त की जाएं, जिससे लोगों को कठिनाई नहीं हो।

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने एक दिन पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि राज्य में एनआरसी लागू नहीं होगा। उन्होंने दरभंगा में रविवार को एक सभा को संबोधित करते हुए फिर दोहराया था कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा। उन्होंने एनपीआर पर अपना रुख साफ करते हुए कहा था कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का 2010 में किए गए तरीके से ही अद्यतन किया जाएगा। उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चुप्पी साधे रखी। 

पश्चिम बंगाल ने पिछले साल ही एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया था। इसके अलावा केरल, पंजाब और राजस्थान भी सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रस्ताव पारित कर चुके हैं।  ... और पढ़ें

बिहार के लोगों को अब झारखंड में आरक्षण नहीं, झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

झारखंड होईकोर्ट ने आरक्षण को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के फैसले के अनुसार, राज्य में अब बिहारियों को किसी भी प्रकार का आरक्षण नहीं दिया जाएगा। हाईकोर्ट की उच्च पीठ के दो जजों ने इस संबंध में सोमवार को अपना फैसला सुनाया। फैसले के अनुसार, यह व्यवस्था बिहार के सभी मूल निवासियों पर लागू होगी। हालांकि, फैसला सुनाने वाले हाईकोर्ट के इस उच्च पीठ के एक जज का आदेश बाकि दोनों जजों के आदेश से अलग था। 

पीठ के दो न्यायाधीशों ने एक मत से यह फैसला सुनाया, वहीं पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एचसी मिश्र ने इससे असहमति जताई और कहा कि राज्य बनने से पहले से बिहार से यहां आकर रह रहे लोगों को भी राज्य की सेवा में आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

इस पीठ में न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह और न्यायमूर्ति बीबी मंगलमूर्ति भी थे। सबसे पहले, पीठ का नेतृत्व कर रहे न्यायमूर्ति एचसी मिश्र ने अपना आदेश पढ़कर सुनाया। उन्होंने अपने आदेश में कहा कि प्रार्थी एकीकृत बिहार के समय से ही झारखंड क्षेत्र में रह रहा है, इसलिए उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए।

उन्होंने यह कहते हुए राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया और प्रार्थियों को नौकरी में बहाल करने का आदेश दिया।

इसके बाद न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह ने अपना आदेश पढ़ते हुए सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बीर सिंह के मामले में दिए गए आदेश का हवाला दिया और कहा कि एक राज्य का निवासी दूसरे राज्य में आरक्षण का हकदार नहीं होगा। यही आदेश बीबी मंगलमूर्ति का भी था। इसके बाद दोनों जजों ने प्रार्थियों की अपील को खारिज करते हुए सरकार के पक्ष को सही माना।

इससे पूर्व सुनवाई के दौरान पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार ने पीठ को बताया था कि एकीकृत बिहार के समय से अथवा 15 नवंबर 2000 से राज्य में रहने के बाद भी वैसे लोग आरक्षण के हकदार नहीं होंगे जिनका ओरिजिन (मूल) झारखंड नहीं होगा। आरक्षण का लाभ सिर्फ उन्हें ही मिलेगा जो झारखंड के मूल निवासी होंगे।
... और पढ़ें

नीतीश ने फिर कहा- बिहार में लागू नहीं होगा एनआरसी, सीएए पर साधी चुप्पी

बिहार में भाजपा-जेडीयू गठबंधन की सरकार है, लेकिन यहां भी मोदी सरकार से उलट मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एनआरसी और एनपीआर को लेकर बड़ा बयान दिया है। नीतीश कुमार ने बिहार के दरभंगा में रविवार को एक सभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर दोहराया कि बिहार में एनआरसी लागू नहीं होगा। नीतीश दरभंगा जिले के हायाघाट ब्लॉक के चंदनपट्टी में मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय में एक समारोह को संबोधित कर रहे थे। हालांकि जेडीयू ने केंद्र के नागरिकता संशोधन कानून का समर्थन किया था।

इसके साथ-साथ उन्होंने एनपीआर पर अपना रुख साफ करते हुए कहा कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का 2010 में किए गए तरीके से ही अद्यतन किया जाएगा।उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चुप्पी साधे रखी। दरभंगा के मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी कैंपस में लोगों ने जब मुख्यमंत्री से सीएए, एनआरसी और एनपीआर पर उनकी राय पूछी गई तब उन्होंने ये बातें कहीं।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने मौलाना अबुल कलाम आजाद की तुलना महात्मा गांधी से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बापू को लोग याद रखते हैं उन्हें मौलाना आजाद को भी याद रखना होगा क्योंकि ये भी देश के बंटवारे के खिलाफ थे। दरभंगा में उन्होंने अल्पसंख्यक कल्याण विभाग से संबंधित 80 करोड़ रुपये की लागत वाली कई योजनाओं का शिलान्यास किया।

... और पढ़ें
अपने शहर की सभी खबर पढ़ने के लिए amarujala.com पर जाएं

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election
  • Downloads

Follow Us

विज्ञापन