क्या महज 10 गज जमीन को लेकर भारत और नेपाल में छिड़ा है विवाद?

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 29 Jun 2020 03:35 PM IST
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मोतिहारी में भारत और नेपाल की सीमा
मोतिहारी में भारत और नेपाल की सीमा - फोटो : Social media

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'हमारी पीढ़ियां गुजर गईं। हम बच्चे से बुजुर्ग हो गए, लेकिन आज तलक कभी अहसास नहीं हुआ कि यह दो देशों की सीमा है। दोनों तरफ के लोगों का दूसरे के यहां रोज का आना-जाना, लेन-देन, खाना-पीना रहा है। रिश्ते-नाते हैं, लेकिन पता नहीं! अब किसकी नजर लग गई? और देखिए ना! झगड़ा भी हुआ तो उस जगह के लिए जहां दोनों तरफ का साझा बाजार लगता था। इन दिनों सब खत्म हो गया है। आना-जाना तो बंद है ही, अब बातचीत भी बंद हो गई है। लोग एक दूसरे को दुश्मन समझने लगे हैं। आंख से आंख तक नहीं मिलाते।' 
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बिहार के मोतिहारी शहर से करीब 47 किमी दूर भारत और नेपाल की सीमा पर बसे ढाका प्रखंड के गुआबाड़ी गांव के बुजुर्ग लक्ष्मी ठाकुर जमीन के उस झगड़े के बारे में बता रहे थे, जिसकी वजह से दोनों देशों के बीच तनाव का माहौल पैदा हो गया है। 
नेपाल ने बिहार के पूर्वी चंपारण से सटी सीमा के पास लालबकेया नदी के किनारे भारत की तरफ से बनाए जा रहे तटबंध निर्माण पर आपत्ति जताई और यह दावा किया कि तटबंध का निर्माण नेपाल की जमीन पर हो रहा है। इस वजह से तटबंध निर्माण का काम रुक गया है। 
पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी शीर्षत कपिल अशोक कहते हैं, 'तटबंध निर्माण का लगभग 99 फीसदी काम पूरा हो चुका था, लेकिन अब नेपाली प्रशासन की आपत्ति के बाद हमें आखिरी के हिस्से का काम रोकना पड़ा है। हमारी समझ से पिलरों के इधर-उधर हो जाने से विवाद हुआ है।'

डीएम ने आगे कहा, 'शुरुआत में स्थानीय स्तर पर बातचीत कर मामला सुलझाने की तमाम कोशिशें हुईं, लेकिन फिर भी बात नहीं बन पाई। अब एक नया सर्वे कराना होगा। यह अंतरराष्ट्रीय सीमा का मसला है, इसलिए हमने वस्तु स्थिति के बारे में राज्य और केंद्र सरकार को अवगत करा दिया है। अब आगे का फैसला उन्हें ही करना है।' 

यह ताजा विवाद तब पैदा हुआ है जब इसके पहले 13 जून को नेपाल की संसद ने देश के एक नए नक्शे को स्वीकृति दे दी और उस नक्शे में तीन इलाके लिपुलेख, लिम्पियाधुरा और कालापानी को अपना हिस्सा बताया। इसके अलावा नेपाल की संसद ने एक नया नागरिकता कानून भी पास किया है जिससे दोनों देशों के बीच रोटी-बेटी के रिश्तों में भी कड़वाहट आई है। नए कानून के मुताबिक, किसी भारतीय लड़की की नेपाल में शादी हो जाने के बाद भी उसे नेपाली नागरिकता सात साल बाद ही मिलेगी। 
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