वो जानलेवा वायरस, जिससे गांधीजी भी हो गए थे संक्रमित, करोड़ों भारतीयों की हुई थी मौत

फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 19 Mar 2020 08:44 PM IST
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महात्मा गांधी
महात्मा गांधी - फोटो : Social media

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महात्मा गांधी के एक सहयोगी ने एक बार बताया था कि 1918 में उन्हें फ्लू हो गया था। उस वक्त दक्षिण अफ्रीका से लौटे हुए उन्हें चार साल गुजर गए थे। गुजरात के उनके आश्रम में स्पेनिश फ्लू हो गया था। उस वक्त महात्मा गांधी की उम्र 48 साल थी। फ्लू के दौरान उन्हें पूरी तरह से आराम करने को कहा गया था। वो सिर्फ तरल पदार्थों का सेवन कर रहे थे। वो पहली बार इतने लंबे दिनों के लिए बीमार हुए थे। जब उनकी बीमारी की खबर फैली तो एक स्थानीय अखबार ने लिखा था, 'गांधीजी की जिंदगी सिर्फ उनकी नहीं है बल्कि देश की है।'
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यह फ्लू बॉम्बे (अब मुंबई) में एक लौटे हुए सैनिकों के जहाज से 1918 में पूरे देश में फैला था। हेल्थ इंस्पेक्टर जेएस टर्नर के मुताबिक इस फ्लू का वायरस दबे पांव किसी चोर की तरह दाखिल हुआ था और तेजी से फैल गया था। उसी साल सितंबर में यह महामारी दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में फैलनी शुरू हुई।  
इंफ्लुएंजा की वजह से करीब पौने दो करोड़ भारतीयों की मौत हुई है जो विश्व युद्ध में मारे गए लोगों की तुलना में ज्यादा है। उस वक्त भारत ने अपनी आबादी का छह फीसदी हिस्सा इस बीमारी में खो दिया। मरने वालों में ज्यादातर महिलाएं थीं। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि महिलाएं बड़े पैमाने पर कुपोषण का शिकार थीं। वो अपेक्षाकृत अधिक अस्वास्थ्यकर माहौल में रहने को मजबूर थीं। इसके अलावा नर्सिंग के काम में भी वो सक्रिय थीं। 
ऐसा माना जाता है कि इस महामारी से दुनिया की एक तिहाई आबादी प्रभावित हुई थी और करीब पांच से दस करोड़ लोगों की मौत हो गई थी। गांधी और उनके सहयोगी किस्मत के धनी थे कि वो सब बच गए। हिंदी के मशूहर लेखक और कवि सुर्यकांत त्रिपाठी निराला की बीवी और घर के कई दूसरे सदस्य इस बीमारी की भेंट चढ़ गए थे। वो लिखते हैं, 'मेरा परिवार पलक झपकते ही मेरे आंखों से ओझल हो गया था।' 

वो उस समय के हालात के बारे में वर्णन करते हुए कहते हैं कि गंगा नदी शवों से पट गई थी। चारों तरफ इतने सारे शव थे कि उन्हें जलाने के लिए लकड़ी कम पड़ रही थी। ये हालात और खराब हो गए जब खराब मानसून की वजह से सुखा पड़ गया और आकाल जैसी स्थिति बन गई। इसकी वजह से लोग और कमजोर होने लगे। उनकी प्रतिरोधक क्षमता कम हो गई। शहरों में भीड़ बढ़ने लगी। इससे बीमार पड़ने वालों की संख्या और बढ़ गई।  
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