आरबीआई ने घटाई रेपो रेट, पर EMI कम होने में लग सकता है तीन महीने का समय

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 22 May 2020 11:41 AM IST
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सार

  • आरबीआई ने रेपो रेट को 4.40 फीसदी से घटाकर चार फीसदी कर दिया है। 
  • रिवर्स रेपो रेट 3.75 फीसदी से कम होकर 3.35 पर आ गई है। 
  • पुराने ग्राहकों को इसका लाभ कम से कम तीन महीने बाद से मिलेगा। 

विस्तार

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम लोगों के लिए बड़ी घोषणा की है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की समीक्षा बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार रेपो रेट को 4.40 फीसदी से घटाकर चार फीसदी कर दिया गया है। यानी इसमें 40 आधार अंकों की कटौती की गई है। बैठक में अधिकांश सदस्य रेपो रेट घटाने के पक्ष में थे। लेकिन रेपो रेट में की गई कटौती का फायदा आपको मिलेगा भी या नहीं, इधर जानते हैं। 
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आपको ऐसे होगा फायदा
अगर रेपो रेट में कटौती का फायदा बैंक आप तक पहुंचाते हैं तो आम लोगों को काफी फायदा होगा। ऐसा इसलिए क्योंकि अब बैंकों पर ब्याज दरों में कटौती करने का दबाव रहेगा। इससे लोगों को लोन सस्ते में मिल जाएगा। इसके अलावा जो होम, ऑटो या अन्य प्रकार के लोन फ्लोटिंग रेट पर लिए गए हैं, उनकी ईएमआई में भी कमी हो जाएगी। 
यह भी पढ़ें: ईएमआई भुगतान पर तीन महीने की अतिरिक्त मोहलत, रेपो रेट में भी हुई कटौती

रिवर्स रेपो रेट में भी हुई कटौती
रेपो रेट के अतिरिक्त रिवर्स रेपो रेट में भी कटौती की गई है। नई मौद्रिक नीति के तहत रिवर्स रेपो रेट 3.75 फीसदी से कम होकर 3.35 पर आ गई है। छह सदस्यीय एमपीसी की बैठक की अध्यक्षता आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने की। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने बताया कि एमपीसी की बैठक तीन से पांच जून को होनी थी। लेकिन इसे पहले ही कर लिया गया है। यह 20 से 22 मई के दौरान की गई। 

इतनी कम होगी ईएमआई
बैंकों ने अगर इसका पूरा लाभ लोगों तक पहुंचाया, तो 20 साल की अवधि वाले 30 लाख रुपये के होम लोन की ईएमआई 724 रुपये तक कम हो जाएगी। पहले अगर आपके लोन की औसत दर 7.35 फीसदी है और ईएमआई 23,893 रुपये, तो अब नई औसत दर 6.95 फीसदी हो जाएगी और ईएमआई कम होकर 23,169 रुपये। इस तरह ईएमआई में 724 रुपये की बचत होगी।

ईएमआई कम होने में लग सकता है तीन महीने का समय
मालूम हो कि आरबीआई द्वारा ब्याज दरों की नई व्यवस्था को शुरू करने के बाद नए ग्राहकों को तो लोन पर इसका असर दिखना शुरू हो जाएगा। लेकिन पुराने ग्राहकों को इसका लाभ कम से कम तीन महीने बाद से मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि पुराने चल रहे लोन का रीसेट पीरियड खत्म होने के बाद ही इसको रेपो रेट में बदलवाया जा सकता है।

तीन तरह के बेंचमार्क रेट
बैंकों में फिलहाल तीन तरह के एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट चल रहे हैं, जिनके हिसाब से ब्याज दरों को तय किया जाता है। बेंचमार्क आधारित ब्याज दर को तय करने का तरीका ज्यादा पारदर्शी नहीं होता है। बैंक लोन की ब्याज दर को बेंचमार्क रेट के हिसाब से तय करते थे। लेकिन बैंकों की बेंचमार्क रेट अलग-अलग होने से कर्ज की ब्याज दर में काफी अंतर हो जाता था। हर बैंक की अपनी बेंचमार्क रेट होती थी। 
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