आर्थिक सुधार के मिल रहे हैं संकेत, पर क्षणिक हो सकता है संभलने का यह दौर

एजेंसी, नई दिल्ली। Updated Sun, 18 Oct 2020 02:03 AM IST
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भारतीय अर्थव्यवस्था (प्रतीकात्मक तस्वीर)
भारतीय अर्थव्यवस्था (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

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बेहद सख्त लॉकडाउन के कारण गंभीर दौर से गुजरने के छह महीने बाद आखिरकार अर्थव्यवस्था में सुधार के आसार बन रहे हैं। ब्रिकवर्क रेटिंग्स के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था के सुधार की तरफ बढ़ने के कुछ संकेत मिले हैं, लेकिन यह अर्थव्यवस्था के पटरी पर लौटने का यह दौर बेहद क्षणिक हो सकता है।
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ब्रिकवर्क रेटिंग्स का अनुमान है कि अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष के दूसरे तिमाही (जुलाई से सितंबर) के दौरान 13.5 फीसदी पाए जाने की संभावना है और वित्त वर्ष 2021 (अप्रैल 2020 से मार्च 2021) में इसमें करीब 9.5 फीसदी संकुचन होने का अनुमान है। हालांकि यह संभावना सरकार के अर्थव्यवस्था को तत्काल पटरी पर लाने के लिए पहल नहीं करने पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक, कठोर लॉकडाउन के कारण छह महीने के गंभीर तनाव से गुजरने के बाद आखिरकार अर्थव्यवस्था को लेकर कुछ अच्छी खबर है। कुछ उच्च तीव्रता के संकेतक आर्थिक सुधार की तरफ संकेत कर रहे हैं।
जीएसटी वसूली में बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, विनिर्माण पीएमआई में अगस्त में 52 अंक से सितंबर में 56.8 अंक तक की तेज उछाल देखी गई है, जो पिछले आठ साल में सबसे ज्यादा है। सितंबर में इस बार 95,480 करोड़ रुपये जीएसटी वसूला गया, जो पिछले साल इसी महीने में की गई वसूली से करीब 3.8 फीसदी और इस साल अगस्त में हुई वसूली से करीब 10 फीसदी ज्यादा है।

यात्री वाहनों की बिक्री में इजाफा
यात्री वाहनों की बिक्री में भी 31 फीसदी इजाफा दर्ज किया गया है, जबकि रेलवे मालवाहक यातायात भी 15 फीसदी बढ़ा है। करीब छह महीने के बाद इस बार व्यापार निर्यात में भी 5.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई है। इंजीनियरिंग उत्पादों, पेट्रोलियम उत्पादों, दवाओं और रेडीमेड कपड़ों को जमकर बाहर निर्याता किया गया है। इसके चलते बिजली की मांग और उत्पादन में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई।

ब्रिकवर्क रेटिंग्स के मुताबिक, हालांकि ऐसे भी संकेत मिल रहे हैं कि यह सुधार बेहद क्षणिक है। दूसरे तिमाही में पिछले साल के मुकाबले नए प्रोजेक्टों पर पूंजीगत व्यय में करीब 81 फीसदी कमी आई है। निवेश में लगातार कमी का संकेत दिखाई दे रहा है। इसके अलावा कोर सेक्टर ग्रोथ भी अगस्त में माइनस 8.5 फीसदी पर थी। ऋण-जमा अनुपात भी तीन पखवाड़ों में नीचे गिरा है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि पहले तिमाही में जीडीपी में करीब 23.9 फीसदी संकुचन हुआ था और कृषि व इससे जुड़े क्षेत्रों को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों को निगेटिव ग्रोथ रेट से गुजरना पड़ा था।

कंस्ट्रक्शन सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट
सबसे तेज और ज्यादा गिरावट कंस्ट्रक्शन सेक्टर में आई है। यहां माइनस 50.3 फीसदी का संकुचन दर्ज किया गया है। इसके बाद होटल, ट्रांसपोर्ट, भंडारण और संचार क्षेत्र माइनस 47 फीसदी तथा विनिर्माण क्षेत्र माइनस 39.3 फीसदी तक सिकुड़े हैं। 

संकट सुधार की जननी है
रेटिंग एजेंसी ने ‘संकट सुधार की जननी है’ के सिद्धांत को भी दोहराया है। बिक्रवर्क रेटिंग्स के मुताबिक, सरकार ने कृषि क्षेत्र में बाधाओं को दूर करने और श्रम बाजार में अधिक लचीलापन प्रदान लाने के लिए कुछ अहम सुधार किए हैं। चार कोड के 24 केंद्रीय श्रम कानूनों को आपस में मिलाना इंस्पेक्टर राज के खात्मे की दिशा में अहम कदम है। इन ढांचागत सुधारों से देश के आर्थिक वातावरण में सुधार होने के साथ ही कारोबारी सुगमता में भी बढ़ोतरी होगी।
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