आर्थिक सर्वे 2020: चीन के फॉर्मूले पर पांच साल में चार करोड़ नौकरियां

बजट डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 01 Feb 2020 08:38 AM IST
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सार

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में पेश किया आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20
  • विकास दर अनुमान वित्त वर्ष 2021 में 6-6.65 फीसदी, 2020 में 5 फीसदी

विस्तार

दुनियाभर में आर्थिक मोर्चे पर अनिश्चितता के माहौल और सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को फिर से रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार ने आर्थिक सर्वेक्षण 2019-20 के जरिये ‘अच्छे दिन’ लाने का भरोसा दिलाया है और सुनहरे भविष्य की उम्मीद जताई है। बजट से एक दिन पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शुक्रवार को संसद में पेश किए गए इस सर्वे में सरकार को पांच साल में चार करोड़ नौकरियां देने का चीन का फॉर्मूला सुझाया गया है। हालांकि, सर्वे में विकास दर अनुमान वित्त वर्ष 2020-21 में 6-6.5 फीसदी जताया गया है, जबकि मौजूदा वित्त वर्ष 2019-20 में इसके पांच फीसदी ही रहने का अनुमान है। यह 11 साल में सबसे कम होगी। हालांकि, विकास दर में गिरावट का दौर अब खत्म होने की उम्मीद जताई गई है। 
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सर्वे में यह सुझाव दिया गया है कि 2025 तक 50 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था का लक्ष्य हासिल करने के लिए मेक इन इंडिया अभियान में ‘दुनिया के लिए’ को शामिल करने और रोजगार व निर्यात पर ध्यान देने से 2025 तक अच्छी सैलरी वाली 4 करोड़ और 2030 तक 8 करोड़ नौकरियां दी जा सकती हैं। इसमें भी श्रम गहन तकनीक पर जोर देने की जरूरत है। मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यन द्वारा छह माह में तैयार किए गए ‘बाजार सक्षम बने, कारोबारी नीतियों को बढ़ावा मिले, अर्थव्यवस्था में भरोसा हो’ थीम पर आधारित सर्वे में सरकार को आर्थिक सुधारों पर तेजी से काम करने का सुझाव दिया गया है। 100 रुपये के नोट के रंग जैसा लैवेंडर (हल्के बैंगनी रंग) में छपे आर्थिक सर्वे में सुब्रमण्यन ने कहा, वैश्विक वृद्धि में कमजोरी से भारत भी प्रभावित हो रहा है। वित्तीय क्षेत्र की दिक्कतों के चलते निवेश में कमी की वजह से भी चालू वित्त वर्ष में विकास दर घटी। लेकिन, जितनी गिरावट आनी थी आ चुकी है। अगले वित्त वर्ष से ग्रोथ बढ़ने की उम्मीद है।

चीन का फॉर्मूला क्या

आर्थिक समीक्षा में चीन का उदाहरण देते हुए बताया गया है कि वर्ष 2001 से 2006, महज पांच वर्षों में वहां प्राथमिक शिक्षा प्राप्त मजदूरों के लिए सात करोड़ रोजगार के अवसरों का सृजन किया गया जो कि सिर्फ निर्यात के दम पर हुआ। भारत में भी वर्ष 1999 से 2011 के बीच निर्यात बढ़ाने से आठ लाख मजदूरों की नौकरी पक्की हुई। यह देश के कुल श्रमिकों की संख्या का 0.8 फीसदी है।

छह साल में 2.62 करोड़ रोजगार के मौके: हर साल 60 लाख रोजगार देने की जरूरत

सर्वे में कहा गया है कि 2011-12 से 2017-18 के दौरान ग्रामीण और शहरी इलाकों में रोजगार के 2.62 करोड़ मौके बढ़े। इस दौरान महिलाओं के रोजगार में 8 फीसदी इजाफा हुआ। अगले एक दशक में हर साल 55 लाख से 60 लाख रोजगार देने की जरूरत है। श्रम सुधारों, कार्यबल में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना भी जरूरी है। राजस्थान जैसे राज्य जिन्होंने श्रम सुधार लागू किए वहां ज्यादा रोजगार मिले।
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