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फेस्टिव सीजन में और महंगा हो सकता है अखरोट, कीमत 900 रुपये किलो के पार

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: paliwal पालीवाल Updated Sat, 07 Sep 2019 12:08 PM IST
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walnut prices increases in jammu, will become more costly in festive season

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आगामी फेस्टिव सीजन में अखरोट की कीमतों में और इजाफा हो सकता है। अभी अखरोट की कीमत 900 रुपये किलो के पार चली गई है। पिछले एक महीने में कीमत 35 फीसदी से अधिक बढ़ गई है। 
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कीमत बढ़ने का कारण

इकोनॉमिक टाइम्स के अनुसार, कश्मीर घाटी में अनुच्छेद 370 के हटाने के बाद लगी पाबंदियों के चलते वहां से अखरोट समेत अन्य सूखे मेवों व सेब और केशर की आपूर्ति एक माह से प्रभावित हो गई है। कश्मीर घाटी से यह सारी वस्तुएं जम्मू की थोक मंडी में आती हैं, जहां से पूरे देश में इनकी आपूर्ति की जाती है। 

कश्मीर में इतना होता है उत्पादन 

भारत का 91 फीसदी अखरोट का उत्पादन कश्मीर में होता है। देश के 70 फीसदी सेब का उत्पादन भी कश्मीर में ही होता है। इसके अतिरिक्त 90 फीसदी बादाम के साथ देश की 90 फीसदी चेरी और केसर भी कश्मीर से ही आती है। इनका एक साल का मूल्य करीब सात हजार करोड़ रुपये है। प्रति वर्ष कश्मीर की खेती में 23.535 मीट्रिक टन पैदावार होती है। 23.535 मीट्रिक टन में से 20.35 लाख मीट्रिक टन योगदान फलों का है। इसके अलावा सूखे फलों की हिस्सेदारी 2.80 लाख मीट्रिक टन है। साल 2016-17 में बागवानी क्षेत्र ने सेब के बगीचे और अन्य के तहत 7.71 करोड़ रुपये का रोजगार दिया था। घाटी में बागबानी उद्योग करीब 7,000 करोड़ रुपये का है। इसमें सबसे अधिक पैदावार सेब की है। 

अगस्त होती है कटाई

अखरोट का फल अगस्त में पक्का हो जाता है, जिसके बाद इसकी कटाई शुरू हो जाती है। अभी इसमें 15 दिन की देरी हो गई है। इसके अलावा नियंत्रण रेखा से भी व्यापार बंद होने से किसानों और व्यापारियों दिक्कतें बढ़ गई हैं।

अमेरिका, चिली से महंगा आयात 

व्यापारियों को मांग की पूर्ति करने के लिए अमेरिका और चिली से आयात करना पड़ रहा है। इस पर व्यापारियों को 132 फीसदी तक आयात शुल्क देना पड़ेगा। कश्मीर घाटी से आयात 90 फीसदी घटा है, जिससे जहां पहले कीमत 750 रुपये किलो थी वो अब बढ़कर 900 रुपये के पार चली गई हैं। 

नवरात्र में बढ़ती है डिमांड

नवरात्र, दिवाली जैसे बड़े त्योहार अगले महीने हैं। इन त्योहार पर देश के ज्यादातर हिस्सों में ड्राइफ्रूट की डिमांड में इजाफा हो जाता है। ऐसे में कुपवाड़ा और उड़ी से भी सड़क के रास्ते से इसकी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। डिमांड को पूरा करने के लिए व्यापारियों ने बाहर से इसको मंगाना शुरू कर दिया है। लेकिन फिर भी जितनी मांग है उस हिसाब से आपूर्ति करना असंभव है। 

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