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ऐतिहासिक घाटे के बाद बैंकों के लिए सबसे बड़ा एनपीए बन सकती है वोडाफोन-आइडिया

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Fri, 15 Nov 2019 04:02 PM IST
vodafone idea may become biggest npa for banks after historical loss
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कॉर्पोरेट इतिहास का सबसे बड़ा तिमाही घाटा होने के बाद वोडाफोन-आइडिया बैंकों के लिए सबसे बड़ा घाटा बन सकती है। अगर कंपनी अपने समायोजित एकल राजस्व (एजीआर) का भुगतान सरकार को नहीं करती है और डिफॉल्टर होती है, तो सरकार इस कंपनी को मिली बैंक गारंटी को वापस ले सकती है। ऐसे में कंपनी का दिवालिया होना बैंकों के लिए मुसीबत बन सकता है। 

बैंकों ने दिया है एक लाख करोड़ रुपये का लोन

वोडाफोन-आइडिया को बैंकों ने एक लाख करोड़ रुपये का लोन दे रखा है। यह राशि बैंकों ने कंपनी के फंड और अन्य मदों में निवेश कर रखी है। इस राशि में ज्यादातर हिस्सा बैंक गारंटी के तौर पर दिया गया है। कंपनी का कैपिटल खर्चा न के बराबर है। कंपनी की कमाई का ज्यादातर हिस्सा सरकार को टैक्स व अन्य मदों में भुगतान करने में खर्च होता है। 

कंपनी पर है इतने करोड़ रुपये की देनदारी

वोडाफोन-आइडिया ने बयान जारी करते हुए कहा है उसके पास करीब 27610 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस के तौर पर 30 सितंबर 2019 तक देनदारी थी। इसके अलावा 16540 करोड़ रुपये स्पेक्ट्रम प्रयोग के तौर पर और 33010 करोड़ रुपये ब्याज, जुर्माना और ब्याज पर लगे जुर्माने के तौर पर देना है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इस राशि को 90 दिन के अंदर भुगतान करना है। 

तो फिर एनपीए में बदल जाएगी देनदारी

कंपनी के सूत्रों ने बताया कि अगर एजीआर का भुगतान कंपनी 90 दिनों में नहीं करती है, तो फिर सरकार बैंकों द्वारा दी गई गारंटी को लोन में बदलने के लिए कहेगी। वोडाफोन और आइडिया पहले ही कह चुकी हैं, कि वो इस संयुक्त उद्यम में किसी तरह की नई पूंजी का निवेश नहीं करेंगी। दोनों कंपनियों ने कहा है कि लोन चुकाने से अच्छा खुद को दिवालिया घोषित करना होगा। 
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ऐसे में जब कंपनी किसी भी लोन का भुगतान करने की स्थिति में नहीं होगी तो बैंकों को इसे लोन को एनपीए में तब्दील करना पड़ेगा। एनपीए में जाने के बाद इस रकम की रिकवरी बड़ी मुश्किल से होगी, जिसका असर बैंकों की बैलेंस शीट पर भी पड़ेगा। 

एसबीआई ने दिया है सबसे ज्यादा लोन

टेलीकॉम सेक्टर में मौजूद कंपनियों को सबसे ज्यादा लोन एसबीआई से मिला हुआ है। 11 बैंकों ने टेलीकॉम कंपनियों को कुल 1.5 लाख करोड़ रुपये का लोन दिया है। स्टेट बैंक ने 37,330 करोड़ रुपये दे रखे हैं। वहीं एचडीएफसी बैंक ने 24,515 करोड़ रुपये, एक्सिस बैंक ने 17,135 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ने 15,346 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा ने 11,471 करोड़ रुपये, पंजाब नेशनल बैंक ने 7,318 करोड़ रुपये, आईडीबीआई बैंक ने 6,172 करोड़ रुपये, केनरा बैंक ने 6,080 करोड़ रुपये, यस बैंक ने 5,908 करोड़ रुपये, कोटक महिंद्रा बैंक ने 4,676 करोड़ रुपये और इंडसइंड बैंक ने 2,484 करोड़ रुपये का लोन देश भर में मौजूद सभी चल रहीं टेलीकॉम कंपनियों दे रखा है।
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