डिजिटल उत्पाद बेचने वाली विदेशी कंपनियों पर इंडोनेशिया ने लगाया 10 फीसदी VAT

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Jul 2020 01:52 PM IST
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कर - फोटो : pexels.com

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कोरोना वायरस संकट के कारण इंडोनेशिया में आर्थिक परेशानी में आ गई है, जिसकी वजह से इंडोनेशिया ने कुछ कंपनियों पर वैल्यू एडेड टैक्स (VAT) लगाने का फैसला किया है। इस संदर्भ में इंडोनेशिया के टैक्स कार्यालय ने बताया कि इसने अमेजन वेब सर्विसेज, नेटफ्लिक्स, स्पॉटिफाई और अल्फाबेट के गूगल को टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (टिन) जारी कर दिया है। इन कंपनियों पर 10 फीसदी वैट लगाया जाएगा।
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मालूम हो कि आबादी के लिहाज से इंडोनेशिया दुनिया का चौथे सबसे बड़े देश है। इंडोनेशिया की आबादी करीब 27 करोड़ है। हाल के वर्षों में देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था काफी तेजी से बढ़ी है। गूगल के एक अध्ययन के अनुसार, 2025 तक इंडोनेशिया की डिजिटल अर्थव्यवस्था का आकार बढ़कर 27,000 करोड़ डॉलर यानी करीब 9.7 लाख करोड़ रुपये हो जाने की उम्मीद है। 
लेकिन वर्तमान साल की बात करें, तो कोरोना वायरस महामारी की वजह से इंडोनेशिया के रेवेन्यू में 13 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है। हालांकि अमेजन और गूगल जैसी कंपनियों पर 10 फीसदी वैट लगाए जाने के कारण कुछ रिकवरी की उम्मीद होगी।
ये है नया नियम
नए नियमों के अनुसार इंडोनेशिया से बाहर की कंपनियां अगर देश में करीब 42 हजार डॉलर या इससे अधिक के डिजिटल उत्पाद और सर्विसेज बेचती हैं, तो उन्हें 10 फीसदी की दर से वैट चुकाना होगा। 

भारत में डिजिटल टैक्स के लेकर आनाकानी कर रहीं कंपनियां
इंडानेशिया ही नहीं अन्य देश भी अब विदेशी कंपनियों पर डिजिटल टैक्स लगा रहे हैं। भारत में मौजूद तकनीकी क्षेत्र की अमेरिकी कंपनियां डिजिटल टैक्स देने के लिए आनाकानी कर रही हैं। कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली लॉबी ने कहा, सदस्य कंपनियां डिजिटल टैक्स का भुगतान करने के लिए अभी तैयार नहीं हैं। कंपनियां कोरोना वायरस महामारी के कारण आर्थिक रूप से जूझ रहीं हैं। हम नई दिल्ली से इस कदम को टालने का आग्रह करते हैं।

बता दें कि मार्च में केंद्र सरकार ने डिजिटल सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियों को कहा था कि भारत में किए गए डिजिटल लेनदेन पर दो फीसदी कर देना होगा, जो 1 अप्रैल 2020 से प्रभावी हो गया है। कंपनियों को पहली किस्त का भुगतान मंगलवार तक करना था। डिजिटल टैक्स अमेजन जैसी वेबसाइटों पर ई-कॉमर्स लेनदेन पर लागू होना है।
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