मिसालः खुद को खतरे में डालकर कोरोना मरीजों के सैंपल लैब तक पहुंचाने की उठा रही जिम्मेदारी

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 16 Jul 2020 12:10 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

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चंडीगढ़ जीएमएसएच- 16 की मल्टी टास्किंग स्टाफ उषा पिछले 3 महीने से लगातार कोरोना के संदिग्ध मरीजों की जांच का नमूना पीजीआई और जीएमसीएच 32 की लैब में पहुंचाने की जिम्मेदारी निभा रही हैं। कोरोना के मरीजों को लेकर जब पूरी दुनिया में खौफ और डर का माहौल बना हुआ है ऐसी स्थिति में वह अपने परिवार और सीनियर के सहयोग से अपने फर्ज को बिना डर के शत प्रतिशत पूरा करने में सफलता हासिल कर रही हैं।
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उषा मल्टी टास्किंग स्टाफ है। 2007 से अस्पताल में कार्यरत हैं। जरूरत के हिसाब से उन्हें जब जहां जो जिम्मेदारी दी गई उसे उन्होंने बखूबी निभाया। इसी का नतीजा है कि अस्पताल प्रशासन ने कोरोना महामारी के इस दौर में उन्हें नमूनों को सुरक्षित पहुंचाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी हुई है। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में डर तो लगा था। लेकिन ड्यूटी के आगे वो डर भी दूर हो गया। उसके साथ परिवार में बच्चों के साथ ही पति का भरपूर सहयोग मिला।
अस्पताल में सीनियर ने हर पल साथ दिया। उनके सहयोग और प्यार के बल पर मुश्किलें आसान होती गई। उषा का मानना है कि ईश्वर की कृपा से ही संकट की घड़ी में संक्रमण से दूर रहकर वो अपनी ड्यूटी को पूरा करने में सफल हो रही हैं।
मां के कदम पर बेटी भी
उषा के परिवार में उनके पति राजेश के साथ ही दो बेटे मनमोहन और चेतन व एक बेटी रंजना है। बेटी बीएससी नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। उसने बताया कि वह बचपन से ही दूसरों की सेवा करना और उसे ही अपना करिअर बनाना चाहती थी। इसलिए बीएससी नर्सिंग कर रही है। वही रंजना का कहना है कि उनकी आदर्श मां है।

वह अपनी मां के मजबूत इरादों और हिम्मत को देखकर अपने निर्णय को और मजबूत करती हैं। वही मनमोहन और चेतन के लिए भी उनकी मां उनका आदर्श है। उषा ने बताया कि उनके पति राजेश भी अस्पताल में हेल्पर की पोस्ट पर तैनात हैं। उनका कहना था कि वह दोनों मिलकर इस समय देश के प्रति अपना फर्ज निभाएंगे।

खुद की सुरक्षा सबसे जरूरी
उषा का कहना है कि कोरोना से बचाव में सबसे पहले अपने सुरक्षा के प्रति सचेत रहना जरूरी है, क्योंकि जब हम सुरक्षित होंगे तो हमारा परिवार और हमारे आसपास के लोग भी सुरक्षित रहेंगे। इसके लिए जरूरी है कि मास्क, सैनिटाइजर और सोशल डिस्टेंसिंग के मानकों का पूरी तरह पालन किया जाए।

उषा ने बताया कि उनकी एचओडी आभा सरवाल उनकी और अपने अंडर में कार्य कर रहे सभी स्टाफ की सुरक्षा के प्रति बेहद सचेत रहती हैं। उनके सहयोग और जागरूकता के कारण ही अब तक लैब में काम करने वाला एक भी स्टाफ संक्रमित नहीं हुआ है।
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