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चंडीगढ़ः नगर निगम के पास फंड की कमी और डिप्टी मेयर-सीनियर डिप्टी मेयर को मिलेगी गाड़ी

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 22 Jan 2020 02:53 PM IST
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नगर निगम की बैठक
नगर निगम की बैठक - फोटो : अमर उजाला
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एक ओर नगर निगम फंड की समस्या से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर सदन की बैठक में पार्षदों ने सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए एक-एक गाड़ी व 250-250 लीटर पेट्रोल-डीजल का प्रस्ताव पास करवा लिया। इतना ही नहीं प्रत्येक पार्षद के लिए 100-100 लीटर पेट्रोल-डीजल के प्रस्ताव पर भी मुहर लगा दी। इस पूरे प्रकरण में न सत्ता पक्ष को आपत्ति थी और न विपक्ष को। बैठक के अंत में सर्वसहमति से प्रस्ताव को पास कर दिया गया।
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सदन की बैठक में कई एजेंडों पर भाजपा और कांग्रेस के बीच बहस हुई। कई बार भाजपा के पार्षद भी आपस में एक-दूसरे के विचारों से संतुष्ट नहीं दिखे। मंगलवार को हुई सदन की बैठक में आठ एजेंडों और पांच सप्लीमेंट्री एजेंडों पर मुहर लगी, लेकिन बैठक के अंत में एक टेबल एजेंडा लाया गया और आनन-फानन में सभी पार्षदों ने सहमति भी दे दी। उस एजेंडा पर विपक्ष ने भी ज्यादा चर्चा की जरूरत नहीं समझी।

एजेंडे में बताया गया कि शहर के विभिन्न क्षेत्रों में मेयर के अलावा सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और पार्षद भी भ्रमण के लिए जाते हैं। ऐसे में सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को गाड़ी व चालक निगम की ओर से दिया जाए। साथ ही उन्हें हर माह 250-250 लीटर पेट्रोल-डीजल भत्ता दिया जाए। वहीं सभी पार्षदों को 100-100 लीटर पेट्रोल-डीजल भत्ता भी निगम की ओर से दिया जाना चाहिए।

बैठक के अंत में सर्वसम्मति से इस एजेंडे को हरी झंडी दे दी गई। अब यह एजेंडा होम सेक्रेटरी के पास जाएगा। वहां से सहमति मिलने के बाद पार्षदों को सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि फंड की कमी से जूझ रहे निगम को बोझ बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी। जबकि अभी न केंद्र से और न प्रशासन से निगम को बजट बढ़ाने का आश्वासन दिया गया है।

जब कमिश्नर ने कहा, हमारे पास सड़क बनाने को फंड नहीं
कुछ माह पहले फंड की कमी से जूझ रहे निगम के पास अपनी सड़क बनाने तक के रुपए नहीं थे। सदन की बैठक में कमिश्नर केके यादव ने स्पष्ट कहा था कि अभी निगम सड़क बनाने में सक्षम नहीं हैं, क्योंकि फंड की समस्या है। कमिश्नर ने बताया था कि मात्र दो माह तक कर्मचारियों को वेतन देने का फंड है। उसके बाद सभी पार्षद प्रशासक वीपी सिंह बदनौर से फंड की मांग को लेकर पहुंचे थे। तब जाकर प्रशासक ने अतिरिक्त फंड दिया था। पहले पार्षदों को 10 हजार रुपये एक बैठक का मानदेय मिलता था, अब 15 हजार रुपये दिया जा रहा है।
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