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चंडीगढ़ः जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के मामले में पीजीआई डॉक्टरों को क्लीन चिट

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 21 Jan 2020 04:12 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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चंडीगढ़ पीजीआई में जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए भेजने के मामले में जांच कमेटी ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट पीजीआई डायरेक्टर को सौंप दी। छह सदस्यीय कमेटी ने मामले की जांच कर डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी है। कमेटी ने रिपोर्ट में हाईकोर्ट के आदेश के बाद मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (एमटीपी) करने की बात कही है।
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रिपोर्ट में एमटीपी के बाद बच्चे में कुछ पल के लिए मूवमेंट आने का हवाला देते हुए इसे सतत प्रक्रिया कहकर इसके लिए डॉक्टरों को दोष नहीं देने की बात कही गई है लेकिन इस जांच रिपोर्ट से पीजीआई इंप्लाइज यूनियन में रोष है। उनका कहना है कि हर बार की तरह एक बार फिर सारे साक्ष्य सामने होने के बावजूद पीजीआई के डाक्टरों को क्लीन चिट दे दी गई।

पीजीआई डायरेक्टर प्रो. जगतराम का कहना है कि जांच कमेटी ने सभी बिंदुओं की गहन जांच के बाद अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें बताया गया है कि नवजात में कुछ देर के लिए मूवमेंट हुई थी। ऐसी स्थिति में डॉक्टरों को दोष देना ठीक नहीं। वहीं, इस रिपोर्ट के आने के बाद पीजीआई इंप्लाइज यूनियन नॉन फैकेल्टी के सदस्यों में रोष है।

यूनियन प्रेसिडेंट अश्विनी कुमार मुंजाल का कहना है कि एक बार फिर पीजीआई प्रशासन ने मनमानी रिपोर्ट बनाकर मामला रफादफा कर दिया है। उनका कहना है कि अगर डॉक्टरों की जगह कर्मचारियों पर आरोप लगा होता तो उन्हें बिना जांच के ही सस्पेंड कर दिया जाता लेकिन सारे सबूत होने के बावजूद जिंदा नवजात को पोस्टमार्टम के लिए भेजे जाने के मामले पर डॉक्टरों को क्लीन चिट दे दी गई।

उन्होंने कहा कि जहां तक चंद मिनट के लिए मूवमेंट होने की बात है तो पोस्टमार्टम हाउस के सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि जो बच्चा सुबह 11 बजे वहां लाया गया उसे दोबारा रात के 11 बजे के बाद दोबारा वहां भेजा गया है। ऐसी स्थिति में लगभग 12 घंटे के समय को चंद मिनट कहकर टाल देना बिल्कुल गलत है।

ये है पूरा मामला
पीजीआई में बीते 26 दिसंबर को हाइकोर्ट के आदेश पर 24 हफ्ते की गर्भवती महिला का गर्भपात किया गया। महिला की सर्जरी कर जब बच्चे को निकाला गया तब वह जिंदा था। जिंदा नवजात को को डॉक्टरों ने पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

पोस्टमार्टम हाउस के कर्मचारियों ने जिंदा बच्चा देखकर उसे वापस वार्ड में भेजे जाने की बात कही लेकिन उनकी बात को दरकिनार कर बच्चे के मरने तक इंतजार करने को कहा गया। बाद में कर्मचारियों के विरोध के बाद नवजात को वापस वार्ड में शिफ्ट किया गया। जहां 12 घंटे बाद उसकी मौत हो गई, जिसके बाद उसे दोबारा पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया।
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