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अनिल थापरः कूड़ा बीनने वाले बच्चों को पाठशाला खोल कर रहे शिक्षित, मिल चुका राज्य पुरस्कार

समाज सेवी अनिल थापर स्लम एरिया निवासी और कूड़ा बीनने वाले बच्चों के हाथ में किताब थमाने का काम करना अपने जीवन का अहम हिस्सा मानते हैं।

16 मार्च 2020

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चंडीगढ़

शनिवार, 28 मार्च 2020

कोरोना वायरसः चंडीगढ़ में कर्फ्यू के बीच डीएसपी सेंट्रल ने वकील को कराई शॉपिंग, वीडियो वायरल

कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए चंडीगढ़ पुलिस दिन-रात मुस्तैदी से जुटी हुई है। वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर चंडीगढ़ पुलिस के एक आलाधिकारी का शर्मसार कर देने वाला वीडियो वायरल हुआ है। वीडियो में सेंट्रल डीएसपी कृष्ण कुमार एक वकील को सेक्टर 10 स्थित माउंटव्यू के सामने शॉपिंग कराकर घर छोड़ते हुए दिख रहे हैं।

शुक्रवार को वायरल हुए 10 मिनट 48 सेकंड के इस वीडियो में डीएसपी सेंट्रल कृष्ण कुमार की सरकारी गाड़ी दिख रही है। गाड़ी में वकील समेत डीएसपी सवार थे। सेक्टर 10 में शॉपिंग के बाद डीएसपी की गाड़ी सेक्टर 2 पहुंची और डिग्गी में रखे सामान को वकील के घर छुड़वाया। बताया जा रहा है कि इस वीडियो को पीएसओ के द्वारा बनाया गया है।

बता दें कि जनता कर्फ्यू के बाद से ही चंडीगढ़ पुलिस शहर के अलग-अलग हिस्सों में मुस्तैद है। इतना ही नहीं पुलिस कर्मियों की ड्यूटी भी बढ़ाई गई है, ऐसे में डीएसपी द्वारा वकील को वीआईपी ट्रीटमेंट से शॉपिंग करवाने के वीडियो पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। एसएसपी नीलंबरी विजय जगदले का कहना है कि सेंट्रल डीएसपी से पूछताछ की जाएगी।

वीडियो बनाते समय डीएसपी पर तसा कंज
यह गाड़ी में बैठ गए वकील और डीएसपी सेंट्रल कृष्ण साहिब गाड़ी नंबर (सीएच-01- जीए-6100) सेक्टर 10 माउंट व्यू होटल के सामने से निकलकर सेक्टर 2 में वकील साहब को छोड़ने जा रहे हैं। डिग्गी फुल भर रखी है और गरीब आदमियों को सामान नहीं मिल रहा है। प्रशासन के अधिकारी ही कोताही बरत रहे हैं। बड़े लोगों को ऐसे सामान दिलाते हैं, गरीब को मिलता नहीं है। अब यह सामान कोठी में उतारा जाएगा।
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कोरोना वायरसः लॉकडाउन में फरमान- गेहूं सरसों खरीद में इस्तेमाल होंगे राधा स्वामी डेरा के शैड

हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अधिकारियों को 15 अप्रैल से सरसों व 20 अप्रैल से गेहूं की खरीद के उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं। उपज बेचने के दौरान मंडियों में किसी प्रकार की कठिनाई किसानों को नहीं होनी चाहिए। मुख्यमंत्री शुक्रवार को खरीद प्रबंधों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जय प्रकाश दलाल व अपने प्रधान सचिव राजेश खुल्लर से डिजिटिलाइज वीडियो कॉलिंग कर खरीद प्रबंधों पर चर्चा कर सुझाव भी लिए।

सरसो व गेहूं की खरीद आरंभ होने का अंतराल मात्र पांच दिन का है, इसलिए दोनों फसलों की आवक एक साथ अधिक आने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। सरकार ने राधा स्वामी डेरा सत्संग भवनों के शेडों का इस्तेमाल खरीद के लिए करने का निर्णय लिया है। सरसों की खरीद हैफेड व हरियाणा वेयर हाउसिंग गेहूं की खरीद भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से की जाती है।

इस वर्ष सरसों का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4425 रुपये प्रति क्विंटल और गेहूं का 1925 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इस बार मंडियों में फसलों की वास्तविक बोली का आकलन मुख्यालय चंडीगढ़ से हो, इसके लिए भिवानी जिले की सिवानी मंडी को पॉयलट प्रोजेक्ट के आधार पर ऑनलाइन ऑक्शन के लिए चुना गया है।

इन फसलों की खरीद किसानों द्वारा ‘‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल’’पर पंजीकृत जानकारी के अनुरूप कूपन जारी करके की जाएगी। चार-पांच गांवों के किसानों को उनकी सुविधा के लिए क्रम अनुसार मंडियों में फसल लाने के लिए कहा जाएगा। बैठक में इस बात की भी जानकारी दी गई कि हैफेड अपने सरसों के निर्धारित कोटे के अलावा नैफेड के लिए भी सरसों की खरीद करेगा।

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के चलते केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से मंडियों में खरीद प्रबंधन के लिए सुझाव मांगे थे। इस बात की जानकारी दी गई कि हरियाणा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान इत्यादि राज्यों ने भी केंद्र सरकार को पत्र लिख कर सुझाव दिए हैं।
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कोरोना और लॉकडाउनः ऑनलाइन लेक्चर्स में हो रही खानापूर्ति, नेटवर्किंग में आ रही बड़ी समस्या

कोरोना वायरस के चलते देशभर में किए गए 21 दिन के लॉकडाउन से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो, इसके लिए पंजाब यूनिवर्सिटी ने कॉलेजों के प्रिंसिपलों को विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए यूजीसी ने बीते बुधवार को पीयू को चिट्ठी लिखी थी। शुक्रवार को जब कॉलेज के विद्यार्थियों से बातचीत की तो उनका कहना था कि ऑनलाइन पढ़ाई में अभी तक खानापूर्ति ही हो रही है। बहुत कम प्रोफेसर्स ने अभी ऑनलाइन लेक्चर लेने शुरू किए हैं।

वहीं ऑनलाइन लेक्चर जूम एप्प के माध्यम से वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए लिए जा रहे हैं, जिसमें नेटवर्किंग की भी बहुत समस्या आ रही है। पीयू ने सबद्ध कॉलेजों को वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग, मेल, गूगल क्लास इत्यादि का सहारा लेकर विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाने के निर्देश दिए हैं। इसमें कुछ कॉलेजों के कई शिक्षकों ने ऑनलाइन वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए लेक्चर लेने शुरू कर दिए हैं। लेक्चर लेने से पहले व्हाट्सएप ग्रुप पर शिक्षक सभी विद्यार्थियों के साथ समय डिसकस कर लेते हैं।

जिस समय पर सभी विद्यार्थी हामी भरते हैं दिन में उसी समय लगभग 45 मिनट का वीडियो के जरिये लेक्चर दिया जाता है। डीएवी कॉलेज के एमए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के छात्र लक्षित ने बताया कि उनके ज्यादातर शिक्षकों ने ऑनलाइन लेक्चर लेने शुरू कर दिए हैं। क्लास से व्हाट्सएप्प ग्रुप में लेक्चर के समय पर सुबह ही चर्चा कर ली जाती है। उनके कोर्स का लगभग पाठ्यक्रम पहले ही पूरा हो चुका है। तीन दिन से उनकी ऑनलाइन क्लास लग रही है। आने वाले 10 दिन में उनके लगभग सभी विषयों का पाठ्यक्रम पूरा हो जाएगा।

लक्षित ने बताया वीडियो लेक्चर के दौरान नेटवर्किंग की समस्या आ रही है। कभी बीच में आवाज कट हो जाती है तो कभी पीछे की अनावश्यक आवाजें आती रहती है। वहीं कॉलेज के बीए के कुछ कोर्स के अभी ऑनलाइन लेक्चर शुरू नहीं हुए हैं। डीएवी के एमए अंग्रेजी के छात्र अरुण ने बताया उनके सोमवार से ऑनलाइन लेक्चर लगने शुरू होंगे। अभी तक शिक्षक ईमेल और व्हाट्सएप्प पर पीडीएफ के माध्यम से विद्यार्थियों को रीडिंग मैटीरियल भेज रहे हैं। वहीं एसडी कॉलेज के बीए के विद्यार्थी यतिन ने बताया कि उन्हें अभी तक ऑनलाइन पढ़ाई की कोई सूचना नहीं मिली है।

120 में सिर्फ आठ विद्यार्थियों ने लगाया लेक्चर
पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज-46 के बीकॉम के छात्र नितेश ने बताया कि उनकी आज पहली ऑनलाइन क्लास लगी थी। इसमें 120 में से सिर्फ आठ विद्यार्थियों ने ही लेक्चर लगाया। वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए लेक्चर में नेटवर्किंग की समस्या आ रही थी। उन्होंने बताया अभी उनका 40 प्रतिशत पाठ्यक्रम बाकी है, जिसको पूरा करने के लिए कम से कम एक-डेढ़ महीने का समय लगेगा। अन्य शिक्षक यूट्यूब वीडियो भेज कर खुद पढ़ने की सलाह दे रहे हैं।  वहीं अन्य कोर्स के छात्रों से बातचीत करने पर उन्होंने बताया अभी उनके लेक्चर लगने शुरू नहीं हुए हैं और ना ही उन्हें कोई सूचना दी गई है।
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कर्फ्यू: कंधे पर सामान-मासूम बच्चे, जेब में सिर्फ 200 रुपये, चंडीगढ़ में घरों के लिए निकले मजदूर

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते चंडीगढ़ में कर्फ्यू लगा है, जिसके कारण सबसे ज्यादा दिक्कत दिहाड़ीदार मजदूरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। दिल्ली, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों से बड़ी संख्या में मजदूर पलायन कर रहे हैं। इसी तरह चंडीगढ़ से भी लोग पलायन करने लगे हैं। पिछले बुधवार से ही भारत में 21 दिनों का लॉकडाउन चल रहा है, जिस वजह से एक तिहाई आबादी घरों में रहने के लिए मजबूर है।

लेकिन सबसे ज्यादा दिक्कत दिहाड़ीदार मजदूरों को हो रही है, इसलिए वे पैदल ही अपना सामान और बच्चों को लेकर घरों और गांवों की ओर निकल पड़े हैं। शनिवार सुबह सड़क पर दिखे मजदूरों से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हम मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ के लिए जा रहे हैं। हमारी जेब में सिर्फ दो सौ रुपये हैं। अगर हम अपने घर नहीं जाएंगे तो हम यहां क्या खाएंगे? जो पैसे जेब में हैं, उन्हें भी रास्ते में बच्चों के खाने पर खर्च करुंगा।
 
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घरों के लिए निकले मजदूर घरों के लिए निकले मजदूर

पानीपतः पत्नी और दो बच्चों को लाइसेंसी पिस्तौल से गोली मारकर राशन डिपो होल्डर ने की खुदकुशी

पानीपत मॉडल टाउन के राज नगर में राशन डिपो चालक ने शुक्रवार रात अपनी पत्नी व दो बच्चों की गोली मारकर हत्या कर दी। उसके बाद खुद अपनी कनपटी पर गोली मारकर खुदखुशी कर ली। सूचना मिलते ही मॉडल टाउन पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को सामान्य अस्पताल में रखवाया।

मिली जानकारी के अनुसार, अनिल उर्फ काला उम्र 36 साल डिपो होल्डर पुत्र नफे सिंह निवासी राजनगर, थाना मॉडल टाउन पानीपत ने अज्ञात कारणों से अपनी पत्नी पूनम व दो बच्चों लड़की प्राची (8) व लड़का अंशु (5) को गोली मार दी। खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली।

शनिवार को स्थानीय लोगों ने पुलिस कंट्रोल रूम में घटना की सूचना दी। मॉडल टाउन पुलिस व एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने लाइसेंसी पिस्तौल को अपने कब्जे में लेकर शवों को सामान्य अस्पताल पहुंचाया और पोस्टमार्टम के लिए शव गृह में रखवाया। पुलिस द्वारा आगामी कार्रवाई की जा रही है।
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कोरोना और कर्फ्यूः बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री बोले- चंडीगढ़ में 200 मजदूर फंसे, कृप्या उन्हें बचाएं

बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम तेजस्वी यादव ने शुक्रवार को सांसद किरण खेर को ट्वीट कर शहर में फंसे बिहार के 200 मजदूरों को बचाने की अपील की। तेजस्वी यादव के इस ट्वीट के बाद प्रशासन में खलबली मच गई और तुरंत इन मजदूरों तक खाने-पीने का सामान पहुंचाया गया। इसके बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने इसकी जानकारी भी ट्वीट कर तेजस्वी यादव को दी।

तेजस्वी ने अपने ट्वीट में कहा कि चंडीगढ़ के मलोया के एक मकान में बिहार के करीब 200 मजदूर फंसे हुए हैं। वह काम के लिए शहर पहुंचे थे, लेकिन यहां कर्फ्यू लगने की वजह से फंस कर रह गए हैं। इन्हें बचाया जाए। उन्होंने मजदूरों की तरफ से लिखे गए एक पत्र को भी ट्वीट किया। इसमें सभी मजदूरों के नाम और मोबाइल नंबर लिखे गए थे।

मजदूरों ने लिखा था कि वह सभी फंसे हुए हैं और उनकी हालत काफी बुरी है। वह सभी बिहार जाना चाहते हैं, लेकिन कर्फ्यू की वजह से उन्हें कोई साधन नहीं मिल रहा है। उनके बच्चे घर पर अकेले हैं। किसी तरह उन्हें घर पहुंचाया जाए। इसके बाद एडवाइजर मनोज परिदा ने डीसी मनदीप सिंह बराड़ को आदेश दिए कि वह इस मामले को देखें। कुछ ही देर बाद सभी तक खाना पहुंचा दिया।

इन मजदूरों में से एक बिहार के बगहा जिला के अजय कुमार ने बताया कि वह सभी घर जाना चाहते हैं, लेकिन प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि 21 दिन का लॉकडाउन खत्म होने के बाद ही वह जा पाएंगे। हालांकि, सभी को खाना मिल गया है।
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कोरोना और लॉकडाउनः हाईकोर्ट ने मां के अंतिम संस्कार के लिए बेटे को दी 15 दिनों की अंतरिम जमानत

Tejashwi Yadav
कोरोना के चलते देशभर में लॉकडाउन है, जिसके चलते हाईकोर्ट के जज अब अपने घर पर बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये बेहद महत्वपूर्ण केसों की सुनवाई कर रहे हैं। शुक्रवार को जस्टिस ललित बत्रा ने हत्या की कोशिश के दोषी को मृत मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने की इजाजत दी है।

जस्टिस ललित बत्रा ने दोषी याचिकाकर्ता की ओर से उसके एडवोकेट द्वारा दाखिल की गई याचिका पर अपने घर बैठकर वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सुनते हुए उसे यह राहत दी है। करण कठपालिया के खिलाफ 19 दिसंबर 2018 को आईपीसी की धारा-186,279,307,332,353 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी।

मामले में गुरुग्राम ट्रायल कोर्ट ने याचिकाकर्ता को दोषी करार दे पांच वर्ष की सजा सुनाई थी और वह अभी जेल में है। सजा के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में अपील की हुई है। 24 मार्च को याचिकाकर्ता की माता की मृत्यु हो गई और शुक्रवार को याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दिए जाने की मांग की है तांकि वह अपनी मृत मां के अंतिम संस्कार में शामिल हो सके।

जस्टिस ललित बत्रा ने अपने घर से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता की मांग को स्वीकार कर उसे 15 दिनों की अंतरिम जमानत दे दी है और उसे 15 दिनों बाद 11 अप्रैल को सुबह 10 बजे भोंडसी गुरुग्राम जेल में समर्पण कर बाकी की सजा पूरी किए जाने के निर्देश दे दिए हैं।
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कोरोना और चंडीगढ़ः प्रधानमंत्री मोदी की अपील बेअसर, कंपनियां कर्मचारियों को कर रही हैं परेशान

कोरोना वायरस धीरे-धीरे पूरे देश में अपने पैर पसार रहा है। इस संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए प्रशासन हर संभव प्रयास कर रहा है। तमाम शिक्षण संस्थान, सिनेमा हॉल, जिम, शॉपिंग मॉल्स आदि बंद हैं, ताकि लोग घर पर रहें और कोरोना से बच सकें। प्रधानमंत्री ने भी कंपनियों के मालिकों से यह अनुरोध किया था वह अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति दें, लेकिन चंडीगढ़ की कुछ नामी कंपनियां पीएम की इस अपील को दरकिनार कर रही हैं।

शहर की कुछ नामी कंपनियां अपने कर्मचारियों को घर से काम करने की अनुमति नहीं दे रही हैं। कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है कि 21 दिन के लॉकडाउन पीरियड को वह छुट्टी के तौर पर बिताएं। इससे कंपनियों को उन्हें तनख्वाह नहीं देना पड़ेगा। शहर के की एक नामी कंपनी में कार्यरत कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि करीब 100 कर्मचारी कर्फ्यू की वजह से दफ्तर नहीं जा पा रहे हैं।

इस वजह से कंपनी उन्हें वर्क फ्रॉम होम देने की बजाय छुट्टी अप्लाई करने का दबाव बना रही है। वह समझ नहीं पा रहे हैं कि क्या करें। कर्मचारी का कहना है कि चंडीगढ़ जैसे शहर में एक महीने बिना तनख्वाह के गुजारना काफी मुश्किल है। हालांकि, ऐसी कुछ अन्य कंपनियां भी हैं, जो कर्मचारियों के साथ ऐसा व्यवहार कर रही हैं। एक तरफ देश के बड़े उद्योगपति कोरोना जैसी वैश्विक महामारी से बचने के लिए कर्मचारियों को बढ़ाकर तनख्वाह देने की बात कर रहे हैं तो दूसरी ओर कुछ ऐसी कंपनियां भी हैं, जो कर्मचारियों को मानसिक तौर पर परेशान कर रही हैं।

गौरतलब है कि कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में अधिकतर कंपनियों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कई कंपनियों ने कर्मचारियों के वेतन में कटौती शुरू कर दी है तो कई कंपनियों में छंटनी की तैयारी चल रही है। हालांकि, इस बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने व्यापार जगत से अपील की थी कि यदि उनके कर्मचारी आने वाले कुछ समय में काम पर न आ पाएं तो उनके वेतन में कटौती न की जाए। उन्होंने सभी से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की थी, लेकिन चंडीगढ़ की कुछ कंपनियों पर इस अपील का असर होता नहीं दिखाई दे रहा है।
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चंडीगढ़: रोज सुबह 10 से शाम 6 बजे तक कर सकेंगे खरीददारी, एक घर से एक व्यक्ति को जाने की अनुमित

चंडीगढ़ अब रोजाना सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक पास के बाजार में जाकर अपने जरूरत का सामान खरीद सकेंगे। यूटी प्रशासन ने तीन दिन बाद कर्फ्यू में ढील देने का फैसला किया है। खरीदारी के लिए एक परिवार में से एक व्यक्ति को ही इजाजत दी गई है और वह भी पैदल ही पास के बाजार में जा सकेगा। 

आदेशों के अनुसार अगर वह बाइक या कार लेकर गया तो पुलिस की तरफ से उसे जब्त कर लिया जाएगा। प्रशासन की तरफ से जारी आदेशों के अनुसार आवश्यक वस्तुओं अनाज, किराने का सामान, फल, सब्जियां, दूध, मांस और मछली आदि की खरीद के लिए शहरवासी रोजाना दुकानों तक जा सकेंगे। यह सभी दुकान प्रशासन के अगले आदेश तक खुले रहेंगे। 

बताया गया है कि संबंधित क्षेत्र के निवासी अपने सेक्टरों की मार्केट में आवश्यक सामान खरीद सकेंगे। बाजारों में भीड़भाड़ से बचने के लिए वाहनों को अनुमति नहीं दी जाएगी। इन बाजारों में शहरवासी पैदल ही जाएंगे। फल और सब्जियों का कारोबार करने वाले विक्रेताओं को भी इन बाजारों में जगह मिलेगी। 

इन दुकानों पर आने वाले व्यक्तियों के बीच सामाजिक दूरी सुनिश्चित करने के लिए, यह निर्णय लिया गया कि पहले से गठित सेक्टर रिस्पांस टीम, चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस विभाग के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहेंगे। यह निर्णय शुक्रवार को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। इस बैठक में एडवाइजर मनोज परिदा, डीजीपी संजय बेनीवाल समेत सभी आलाधिकारी मौजूद रहे। 
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कोरोना वायरसः जालंधर सेहत विभाग की नाकामी से हजारों लोग आ सकते हैं कोरोना की चपेट में

कागजातों में सेहत विभाग कोरोना को लेकर काफी सीरियस है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि सेहत विभाग की नाकामी के कारण कोरोना की चपेट में हजारों लोग आ सकते हैं। आलम यह कि 21 मार्च को सुमन छाबड़ा को सिविल अस्पताल में कोरोना की जांच के लिए उनका बेटा रवि छाबड़ा लेकर गया था, लेकिन सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों ने वापस भेज दिया और कहा कि सब ठीक है। उसका इलाज तक नहीं किया गया, ब्लड सैंपल भी नहीं लिया गया और छह दिन में सुमन छाबड़ा काफी लोगों के संपर्क में आ चुकी थी।

इससे पहले बलदेव सिंह पठवाला के मामले में भी जालंधर के सरकारी अस्पताल की नालायकी सामने आई थी और अब सुमन छाबड़ा के मामले में सिविल अस्पताल के चिकित्सकों ने उसके बारे में न तो आला अधिकारियों को बताया और न ही कोरोना के नोडल अधिकारी को। सुमन छाबड़ा जालंधर के निजात्म नगर इलाके में रहती है और सीएमसी में कोरोना वायरस से ग्रस्त पाई गई है। वह जिंदगी मौत के बीच जंग लड़ रही है और वेंटिलेटर पर है। उसके बेटे रवि छाबड़ा के मुताबिक, उनकी माता बिलकुल ठीक थी। कुछ सांस लेने की तकलीफ हुई तो निजी अस्पताल ले गया।

जहां चिकित्सकों ने एक्स-रे किया और तत्काल सरकारी सिविल अस्पताल जाने के लिए कहा। रवि छाबड़ा 21 मार्च को अपनी माता को सरकारी सिविल अस्पताल आया और एक्स-रे आदि दिखाए। वहां पर बैठे चिकित्सक इस कदर लापरवाह थे कि उन्होंने मरीज को सीरियस ही नहीं लिया और कहा कि सब ठीक है आप घर चले गए। नियमानुसार उसका आइसोलेशन कर ब्लड सैंपल लेकर अमृतसर मेडिकल कॉलेज भेजना चाहिए था लेकिन नहीं भेजा। न ही चिकित्सकों ने संदिग्ध मरीज के बारे में सिविल सर्जन या नोडल अधिकारी को अवगत करवाया।

रवि छाबड़ा मां को लेकर घर वापस आ गया और जब अगले दिन तकलीफ बढ़ी तो लेकर सीएमसी चला गया। जहां उसको अस्पताल में भर्ती किया गया और खून का सैंपल लेकर पीजीआई चंडीगढ भेजा जहां से 26 मार्च को उसमें कोरोना पॉजिटव पाया गया। अगर सेहत विभाग 21 मार्च को ही सैंपल लेकर महिला को आईसोलेट कर देता तो उसकी चपेट में आने से काफी लोग बच सकते थे। इस दौरान सुमन छाबड़ा काफी लोगों से मिलती जुलती रही और इलाके में भी कई घरों में गई।
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पंजाब में 40 हजार 904 एनआरआई विदेश से लौटे, 1330 अब भी लापता, सीएम ने दिए ढूंढने के आदेश

दुनिया भर में कोरोना की दहशत फैलते ही गुरुवार तक 40904 एनआरआई पंजाब लौट आए हैं। इनमें से 20421 को होम क्वारंटीन किया गया है। लेकिन चिंता की बात यह है कि 1330 एनआरआई की पुलिस और प्रशासन को अब भी तलाश है। गायब हुए ये लोग दिल्ली हवाई अड्डे पर उतरने के बाद पंजाब के लिए रवाना हुए लेकिन अब तक इनके बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। गायब लोगों में सबसे ज्यादा होशियारपुर जिले के 363 और जालंधर ग्रामीण के 204 एनआरआई हैं। लुधियाना ग्रामीण के 172, मोहाली के 128 , गुरदासपुर के 106 और नवांशहर के 105 एनआरआई की तलाश जारी है।

राज्य सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार गुरुवार तक पंजाब पहुंचे 40904 अप्रवासी भारतीयों में से 29117 की जांच की गई है, जबकि 10457 लोगों की अभी जांच होनी है। लापता 1330 एनआरआई में अमृतसर ग्रामीण और बटाला के 84-84, पठानकोट के 10, फिरोजपुर के 61 और मुक्तसर साहिब का एक एनआरआई शामिल है। जिन 10457 एनआरआई की वेरिफिकेशन बाकी है, उनमें सबसे ज्यादा कपूरथला जिले के 2797, अमृतसर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के 1861, जालंधर ग्रामीण हल्के में 1778, जालंधर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र के रहने वाले 1674 एनआरआई हैं।

विदेश से आए लोगों से हुई कोरोना वायरस फैलने की शुरुआत
उल्लेखनीय है कि सूबे में कोरोना से पीड़ितों के जितने भी मामले अब तक सामने आए हैं, उनकी शुरुआत विदेश से आए लोगों से ही हुई है। जो स्थानीय लोग पॉजिटिव पाए गए हैं, वे या तो विदेश से आए पीड़ितों के परिवार के सदस्य हैं या करीबी रिश्तेदार। मार्च माह के आरंभ में एनआरआई के लापता होने की मीडिया में आई खबरों को पहले तो राज्य सरकार ने अनदेखा कर दिया लेकिन 15 मार्च आते-आते मान लिया कि अगर विदेश से आ रहे लोगों का कड़ी जांच न हुई तो राज्य में महामारी फैलने से रोकना मुश्किल होगा। अब पुलिस घर-घर जाकर लापता एनआरआईज को ढूंढ रही है। 

दोआबा में लौटे सबसे ज्यादा एनआरआई 
कोरोना के कारण पंजाब लौटे एनआरआई में सबसे ज्यादा संख्या दोआबा क्षेत्र की है। यहां जालंधर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में 6863, जालंधर ग्रामीण में 5194, होशियारपुर में 2322, कपूरथला में 4107 और नवांशहर में 1360 एनआरआई अपने घरों को लौटे हैं। जालंधर पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में 5189 और जालंधर ग्रामीण में 3088 लोगों को घरों में एकांतवास में रखा गया है। होशियारपुर जिले में 1959 एनआरआई क्वारंटीन किए गए हैं। राज्य के बाकी जिलों में पटियाला रोपड़ फतेहगढ़ साहिब और मोगा ऐसे जिले हैं जहां किसी भी एनआरआई को क्वारंटीन नहीं किया गया है।

सीएम ने दिए तलाश के आदेश
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने राज्य में लापता हुए एनआरआई की तलाश तेज करने के आदेश जारी किए हैं। उन्होंने डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि इन लोगों को ढूंढ कर जल्द से जल्द घरों में बंद किया जाए।
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कोरोना के खिलाफ जंग के असली 'हीरो' हैं ये, रोजाना गाड़ी में चाय-बिस्कुट बांटने निकलते रॉबिन

कोरोना की जंग में अब मदद के लिए हाथ भी उठने लगे हैं। इसकी मिसाल है श्री गुरु रविदास फोर्स के प्रधान रॉबिन सांपला। रॉबिन अपनी टीम के आधा दर्जन सदस्यों के साथ रोजाना तीन गाड़ियों के काफिले में शहर के उन तमाम नाकों पर जाते हैं, जहां पर दिन रात पुलिस मुलाजिम ड्यूटी पर तैनात हैं। वह चाय पिलाते हैं, उनको बिस्किट व दूध देते हैं।

रॉबिन सांपला की संस्था में काफी नौजवान हैं और उनके सामने आ रहा था कि दुकानें व ढाबे बंद होने के कारण पुलिस को पानी व चाय की परेशानी है। कर्फ्यू के अगले ही दिन अपने साथियों के साथ फोन पर वार्तालाप किया और उसी समय तय किया सड़कों पर जो भी लोग नजर आएं, चाहे वह दिहाड़ीदार हो या रिक्शा चालक या पुलिस मुलाजिम, तमाम लोगों को चाय, दूध पिलाई जाएगी।

बाकयदा रोजाना सुबह अपनी फॉर्चूयनर गाड़ी में गर्म चाय, पानी की बोतलें, बिस्कुट के पैकेट, गर्म दूध रख लेते हैं और डिस्पोजल गिलासों में जालंधर में बांटते रहते हैं। रोजाना वह चार घंटे तक शहर की सड़कों पर सेवा कर वापस चले जाते हैं। इसके लिए वह किसी से फंड भी नहीं ले रहे हैं, रॉबिन का कहना है कि हम दोस्त ही मिलकर इस अभियान को चला रहे हैं।
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