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गणतंत्र दिवस विशेषः सियासी वर्चस्व और अस्तित्व की लड़ाई में संविधान के 70वीं सालगिरह की अहमियत

Satish Aliaसतीश एलिया Updated Sun, 26 Jan 2020 07:08 AM IST
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भारत के संविधान के लागू होने के सत्तर बरस पूरे होने जा रहे हैं।
भारत के संविधान के लागू होने के सत्तर बरस पूरे होने जा रहे हैं। - फोटो : फाइल फोटो
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भारत के संविधान के लागू होने के सत्तर बरस पूरे होने जा रहे हैं। यानी पूरे सात दशक। इस लंबे अर्से में इसमें 126 संशोधन हो चुके हैं। यानी हर दशक में 18 दफा संविधान में संशोधन किए जा चुके हैं। संविधान में संशोधन का प्रावधान संविधान में ही किया गया है, वो इसलिए की संविधान सभा में उस वक्त जो नेता शामिल थे, वे न केवल आला दर्जे के राष्ट्रभक्त बल्कि दूरदृष्टा और आने वाले समय की जरूरत का अंदाजा लगा पा रहे थे। यही वजह थी कि उन्होंने आरक्षण को वंचित वर्ग के उत्थान के लिए लागू तो किया, लेकिन इसे सदा के लिए नहीं बल्कि केवल एक दशक के लिए यानी 10 वर्षो के लिए ही लागू किया। अब तक हुए 126 संशोधनों में से सात तो आरक्षण को 10 और जारी रखने के संबंध में हो चुके हैं।
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वंचित वर्ग और भारत 
वंचित वर्गों के उत्थान के मामले में हमारी सरकार अपनी असफलता को सात बार स्वीकार कर चुकी हैं। इसमें वोट बैंक की राजनीति की मजबूरी भी शामिल है। आरक्षण समाप्त किए जाने की खुलकर वकालत कोई भी दल नहीं करता और न ही कर सकने की स्थिति में अगले एक दशक तक होने के ही आसार हैं।

दरअसल, जो विचारधारा संविधानभा में आरक्षण से असहमति जताने की काेशिश कर रही थी, वही अब भी इसकी समीक्षा की बात यदा-कदा करती रहती है। तब केएम मुंशी ने आवाज उठाई थी तो तत्कालीन काूनन मंत्री डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान सभा से खुद को अलग करने की दो टूक बात कही थी।

यह सही है कि इन 70 सालों में वंचित तबकों के लिए बहुत कुछ बदला है, लेकिन बहुत कुछ नहीं भी बदला है। केंद्र की वर्तमान मोदी सरकार ने इस आरक्षण के खिलाफ और बीच में मंडल कमीशन की सिफारिशें लागू करने के तत्कालीन वीपी सिंह सरकार के फैसले के खिलाफ धधकी आग के लगातार धुंधियाते रहने के चलते गरीब सवर्णों के लिए भी 10 फीसदी आरक्षण लागू किया है।

आरक्षणों के संबंध में एक दर्जन से ज्यादा संविधान संशोधनों के अलावा टैक्स प्रणाली और अन्य संशोधन समय-समय पर होते रहे हैं, लेकिन संविधान में हुए ताजा संशोधन नागरिकता संशोधन कानून को लेकर देश में लगातार जारी घमासान यानी विरोध और विरोध के मुकाबले के लिए समर्थन से देश में पहली दफा ऐसे हालात बना दिए हैं जब संसद में पारित होने के बाद किसी संविधान संशोधन या कानून संशोधन के खिलाफ इतना विरोध सामने आया है।
 
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