विज्ञापन

अयोध्या पर फैसलाः हर भारतीय को अब एक प्रगतिशील और विकासशील भारत की ओर बढ़ना होगा

Sanjiv Pandeyसंजीव पांडेय Updated Sat, 16 Nov 2019 09:56 AM IST
विज्ञापन
अयोध्या पर फैसला आने के बाद अब भारत को आगे देखना होगा।
अयोध्या पर फैसला आने के बाद अब भारत को आगे देखना होगा। - फोटो : अमर उजाला
ख़बर सुनें

आखिरकार राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का हल सुप्रीम कोर्ट ने निकाल दिया। विवाद का हल इससे बेहतर विवाद नहीं हो सकता है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले को अब दोनों समुदायों सहर्ष स्वीकार कर भारत के भविष्य निर्माण में लग जाए। हम यह नहीं कह सकते है कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला सिर्फ आस्था के आधार पर दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तमाम साक्ष्यों, इतिहास और आस्था के आधार पर राम जन्मभूमि पर अपना फैसला सुनाया है। इसमें किसी भी पक्ष को अपनी हार औऱ जीत नहीं समझना चाहिए।

मुस्लिम स्कॉलर केके महमूद ने विवादित स्थल को हिंदू मंदिर माना

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट को भी अपने फैसले में आधार बनाया है। दिलचस्प बात यह है कि विवादित स्थल की खुदाई करने वाली भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम में मुस्लिम पुरात्तत्वविद विद्वान भी शामिल रहे हैं।

बता दें कि 1976-77 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की टीम ने विवादित स्थल का जाकर अध्ययन किया था। उस समय टीम में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पढ़े और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में निदेशक रहे केके महमूद शामिल थे। 2003 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने दुबारा विवादित स्थल की खुदाई की। उस टीम में भी केके महमूद समेत तीन मुस्लिम सदस्य थे।

दरअसल, केके महमूद ने मस्जिद के नीचे मंदिर होने की रिपोर्ट दी थी। उन्होंने कहा था कि मस्जिद से पहले यहां मंदिर था और विवादित स्थल पर दसवीं शताब्दी में एक मंदिर मौजूद था। महमूद ने पुरात्तात्विक सबूत के साथ सत्रहवीं और अठाहरवीं शताब्दी में भारत आए विलियम फिंच और जोजफ टेफिनथलर का भी हवाला भी दिया जिन्होंने विवादित स्थल पर पूजा की बात की थी। महमूद के अनुसार अबू फजल का आइन-ए-अकबरी ने भी विवादित स्थल पर भगवान राम की पूजा का उल्लेख किया है।

जैसे मुस्लिमों का मक्का-मदीना, सिखों के लिए ननकाना साहिब वैसे हिंदुओं के लिए अयोध्या

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक बड़ा विवाद खत्म हो गया है। हिंदू और मुस्लिम समुदाय आपस में आए वैमनस्य को खत्म करें। एक दूसरे को शक की निगाह से देखना बंद करें। इस मुल्क पर सैकड़ों वर्ष मुसलमानों ने राज किया। लेकिन सामाजिक सौहार्द बना रहा। भारतीय सूफी परंपरा इसका उदाहरण है।

सूफियों को संरक्षण मुस्लिम शासकों से मिला, इनके भक्त बहुसंख्यक हिंदू रहे। मुस्लिम सूफियों ने राम और कृष्ण की भक्ति की। मलिक मोहम्मद जायसी से लेकर रसखान इसके उदाहरण हैं। भारतीय उपमहादीप निजामुद्दीन औलिया, शेख सलीम चिश्ती, ख्वाजा मोउनुद्दीन चिश्ती, बुल्लेशाह, फरीद की परंपरा के लिए जाना जाता रहा है। यह भारतीय सूफी परंपरा है, जिसने हिंदुओं और मुसलमानों को जोड़ा।

हालांकि पिछले चालीस सालों में इस मुल्क के अंदर हिंदुंओ और मुसलमानों के आपसी संबधों मे खासी गिरावट आई है। जबकि दोनों समुदाय की मूल समस्या गरीबी, बेरोजगारी और भूखमरी है। खुशी की बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को देश के अल्पसंख्यक समुदाय ने दिल से स्वीकार किया है। आशंका थी कि फैसले के बाद एक बार फिर तनाव बढ़ेगा, और कई लोगों की राजनीति चमकेगी। लेकिन दोनों तरफ के समुदायो ने फैसले के बाद बहुत ही अच्छा व्यववहार दिखाया है।

विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन

Recommended

मैसकट रिलोडेड- देश की विविधता में एकता का जश्न
Invertis university

मैसकट रिलोडेड- देश की विविधता में एकता का जश्न

विवाह संबंधी दोषों को दूर करने के लिए शिवरात्रि पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक : 21-फरवरी-2020
Astrology Services

विवाह संबंधी दोषों को दूर करने के लिए शिवरात्रि पर मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग में कराएं रुद्राभिषेक : 21-फरवरी-2020

विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

निर्भया केस: 3 मार्च को दोषियों को होगी फांसी, उससे पहले गुनहगारों के पास अब बचे 2 विकल्प

Nirbhaya Case Hearing निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों की फांसी की नई तारीख आ चुकी है। अब 3 मार्च को चारों दोषियो अक्षय, विनय,पवन और मुकेश को 3 मार्च सुबह 6 बजे फांसी होगी। अदालत में सोमवार को क्या हुआ जानिए इस रिपोर्ट में।

17 फरवरी 2020

Most Read

Blog

मध्य प्रदेशः इन वजहों से आमने-सामने हैं सिंधिया और सीएम कमलनाथ?

मप्र कांग्रेस की अंदरुनी लड़ाई अब सड़कों पर है। मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भी खुलकर ज्योतिरादित्य सिंधिया की चुनौती को स्वीकार कर उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए कह दिया है।

17 फरवरी 2020

विज्ञापन
आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election
  • Downloads

Follow Us