बांग्लादेश से रिश्तों में जमी बर्फ़ पिघलती क्यों नहीं?

Rajesh Badalराजेश बादल Updated Sat, 05 Oct 2019 05:49 PM IST
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प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा में हुए समझौतों के साथ ही दोनों मुल्कों के बीच समझौतों की शतकीय साझेदारी हो चुकी है।
प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा में हुए समझौतों के साथ ही दोनों मुल्कों के बीच समझौतों की शतकीय साझेदारी हो चुकी है। - फोटो : Twitter

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बांग्लादेश और भारत के रिश्ते ऐतिहासिक तो हैं लेकिन इनकी निरंतरता भंग क्यों हो जाती है- यह एक पहेली है। जिस देश के स्वाधीनता संग्राम में हिंदुस्तान ने निर्णायक भूमिका निभाई हो,उस देश के व्यवहार में वह उपकार का भाव क्यों नहीं दिखाई देता?
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यकीनन, उसका यह उपकृत रवैया पहले था, लेकिन शायद यह उसकी कमज़ोरी मान लिया गया, इसलिए पिछले दो दशक से दोनों देशों के संबंधों में गर्माहट नहीं दिखाई दे रही है। आज आम बांग्लादेशी भारत को लेकर बहुत सहज महसूस नहीं करता। भारत को इसकी पड़ताल करने की जरूरत है ।
कैसा रिश्ता समझा जाए बांग्लादेश-भारत का?  
प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत यात्रा में हुए समझौतों के साथ ही दोनों मुल्कों के बीच समझौतों की शतकीय साझेदारी हो चुकी है। इसके बाद भी शेख़ हसीना प्याज का निर्यात रोकने पर औपचारिक चुटकी लेने से नहीं चूकी तो इसका अर्थ समझने की आवश्यकता हिंदुस्तान को है। इशारा यह भी है कि आप पाकिस्तान और बांग्लादेश को एक ही पलड़े में रखकर नहीं तौल सकते।

बांग्लादेश,नेपाल,म्यांमार ,श्रीलंका और भूटान एक तरह से स्वतंत्र देश होते हुए भी भारतीयों को पराए से कभी नहीं लगते रहे हैं, लेकिन हालिया वर्षों में नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका और बांग्लादेश के साथ एक ख़ास क़िस्म का ठंडापन आया है और इसे कोई नकार नहीं सकता।
 
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