भारत चीन विवाद: क्या बायकॉट चाइना का नारा धरातल पर संभव है?

Rituparn Daveऋतुपर्ण दवे Updated Sat, 27 Jun 2020 11:21 AM IST
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भारत जैसे भावनात्मक देश में किसी भी नारे को आगे लाना बहुत आसान होता है- फाइल फोटो
भारत जैसे भावनात्मक देश में किसी भी नारे को आगे लाना बहुत आसान होता है- फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला

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सार

  • बहुत से देश चीन से नफरत करते हुए भी उनके उत्पादों का पूर्ण बहिष्कार नहीं कर पा रहे हैं।
  • चीन ने हमें सिल्क में, गार्लिक में पीछे धकेल दिया है जबकि हमारा सिल्क सदियों से दुनिया की पसंद रहा है।
  • सरकार इन कंपनियों में रिस्क उठाए और नीतिगत समर्थन दे।

विस्तार

ऐसे समय में जब चीन की कई वस्तुएं हमारे लिए अपरिहार्य हैं, तब क्या चाइना बायकाट का नारा धरातल पर संभव हो सकेगा? यदि संभव भी होगा तो उस पर आत्मनिर्भर बनने में हमें सालों लग जाएंगे। क्या ऐसे में चीन के साथ वर्तमान तनाव समाप्त हो जाएगा? 

भारत जैसे भावनात्मक देश में किसी भी नारे को आगे लाना बहुत आसान होता है और ऐसा सभी उन देशों में आसान हो जाता है जो संवेदशील होते हैं। ऐसा ही एक नारा बाइकाट चाइना का नारा है। चीन की विस्तारवादी नीतियों और धोखेबाजी  के कारण दुनिया के कई देशों में यह ज्वार उठता रहता है। किंतु चीन की रणनीतिक घेराबंदी क्यों नहीं हो पा रही है, इन कारणों पर हमें विचार करना होगा। 

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मैंने विगत दिनों एक चीनी कंपनी द्वारा भारतीय मजदूरों को बालाघाट में नौकरी से निकालने जैसे मुद्दे को उठाया था तो पता चला कि उस कंपनी को टनल खोदने का ठेका मैग्नीज की खदानों में  दिया गया था। क्या यह काम हमारे मजदूर नहीं कर सकते थे?
जबकि हम अंग्रेजों के जमाने से मायनिंग कर रहे हैं। हम भी कर सकते हैं, लेकिन तकनीकी कार्यों में जितनी लाभोन्मादी भारतीय कंपनियां होती हैं उतनी चीनी नहीं। इसलिए वे प्रतिस्पर्धा में हमसे आगे निकल जाती हैं और किफायती होने के कारण समर्थन पा जाती हैं।
हम भावुक होते हुए भी केवल नारा लगाते रह जाते हैं। दिवाली के पटाकों, लड़ियों का बहिष्कार कर क्या हम चीन को घेरने के उद्देश्य में सफल हो सकते हैं? शायद नहीं। ऐसे कई चीनी उत्पाद हैं जो हमारे लिए अनावश्यक हैं, जैसे धार्मिक मूर्तियां, लाफिंग बुद्धा, डांसिंग गणेश, बच्चोंं के खिलौने, नेल कटर, टूथ ब्रश, फर्नीचर आदि।

लेकिन कुछ ऐसी भी चीनी वस्तुएं हैं जो हमारे लिए अपरिहार्य हैं, जैसे दवाईयों का कच्चा माल और इलेक्ट्रॅानिक कलपुर्जे, रासायनिक खाद आदि। आज चीन को घेरने की शासन के स्तर पर ना तो कोई रणनीति है ना ही ऐसा कोई उद्देश्य। केवल राजनीतिक उकसावे के लिए बस नारे उछाले जाते हैं।

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