कोरोना डायरी-3: जो जहांं है, वहीं रहे, यही इलाज है..!

Jaideep Karnikजयदीप कर्णिक Updated Sat, 21 Mar 2020 05:18 PM IST
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महाराष्ट्र में स्थिति बिगड़ने की घोषणा होते ही रेल्वे स्टेशनों पर कोहराम मच गया। स्टेशन बंद करने पड़े।
महाराष्ट्र में स्थिति बिगड़ने की घोषणा होते ही रेल्वे स्टेशनों पर कोहराम मच गया। स्टेशन बंद करने पड़े। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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कोरोना के बढ़ते संक्रमण के बीच एक अजीब सी होड़ मच गई है- 'घर' पहुंंचने की। घर मतलब मूल स्थान। अपना शहर। अपना गांंव। दिल्ली, मुंबई, नागपुर, पटना, अलीगढ़, बंगलुरू, हैदराबाद, भोपाल, रायपुर, जयपुर हर जगह यही हाल है।  महाराष्ट्र में स्थिति बिगड़ने की घोषणा होते ही रेल्वे स्टेशनों पर कोहराम मच गया। स्टेशन बंद करने पड़े। पुलिस के लिए हालात संभालना मुश्किल हो गया। 
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- अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के एकांत में रखे गए तीन छात्र भाग कर - जम्मू अपने घर पहुंंच गए। 
- संक्रमित पाए गए 8 मरीज दिल्ली से अगस्त क्रान्ति एक्सप्रेस से तेलंगाना पहुंंच गए! 
- गायिका कनिका कपूर लंदन से आने के बाद 'घर' गईं, पार्टी मनाई, होटलों में गई। 
- हवाई अड्डे पर पासपोर्ट जब्त कर एकांतवास के लिए जाने का आग्रह करने पर लोग अधिकारियों से ही झगड़ने लगे और अपने 'घर' जाने का आग्रह करने लगे। 

आखिर क्या होगा घर जाकर?  
क्या हमको पता भी है कि हम क्या कर रहे हैं? ये क्या पागलपन है? जो पॉज़िटिव पाए गए मरीज भाग रहे हैं या जो अपनी विदेश यात्रा छिपा रहे हैं वो तो अपराधी हैं हीं- जो संक्रमित नहीं हैं और घर की ओर भाग रहे हैं वो भी कम बड़ा गुनाह नहीं कर रहे हैं। आप जिस ट्रेन, बस या हवाई जहाज से जाएंंगे उसमें कौन संक्रमित है और कौन नहीं इसका आपको कुछ पता नहीं। इसका कोई तरीका भी नहीं। ऐसे में आप अपने साथ घर वालों के लिए भी इस संक्रमण के संभावित वाहक हो सकते हैं।

दरअसल, आप अपने साथ अपने प्रियजनों की और उस पूरे शहर, गांंव या कस्बे की जान खतरे में डाल रहे हैं- जहांं आप जा रहे हैं। अगर आपको इस बीमारी को रोकना है तो सही ये है कि आप जहांं हैं वहीं रहें। लॉकडाउन आपके घर जाने के लिए नहीं हुआ है। इस बीमारी को रोकने और इससे लड़ने के लिए हुआ है। 
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