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गांधी 150 : बहुत मुश्किल से बनी सिनेमा के विरोधी रहे राष्ट्रपिता पर पहली डॉक्यूमेंट्री और फिल्म

रजनीश जैन Updated Mon, 01 Oct 2018 12:56 PM IST
महात्मा गांधी
महात्मा गांधी
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अगर आज गांधीजी जीवित होते तो अपना 149 वां जन्मदिवस मना रहे होते। बीते 149 सालों में गांधी जी का मूल्यांकन बहुआयामी रह है। चाहे वह वैचारिक स्तर पर हो या रचनात्मकता के स्तर पर या फिर उनके मौलिक चिंतन पक्ष के रूप में। गांधी जी के जीवन और विचारों को समेटने की कोशिश में सैंकड़ों किताबें लिखी गई हैं।
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खास बात यह है कि उनकी मृत्यु के 20 बरस तक सिनेमा ने उन्हें लगभग नजर अंदाज ही किया। स्वयं गांधी जी सिनेमा के विरोधी थे और अपने जीवन में उन्होंने एकमात्र फिल्म राम राज्य (1943) ही देखी थी। लेकिन उनके अनुयायियों में हर विधा के लोग थे जो उन्हें इन माध्यमों से जोड़कर करोड़ों लोगों तक पहुंचाना चाहते थे।
 
गांधी जी पर पहली डॉक्यूमेंट्री

ऐसे ही एक थे श्री ए.के. चट्टीएर मूलतः चीन के निवासी। घुमंतू, पत्रकार और फिल्मकार। उन्होंने 1938 में भारत के चारों कोनों में एक लाख किलोमीटर की यात्राएं गांधी जी के फोटो और फिल्मों को एकत्र करने के लिए की थी। इस संग्रह के आधार पर उन्होंने गांधी जी पर 81 मिनिट की डॉक्यूमेंट्री '20वीं सदी का पैगंबर- महात्मा गांधी' (Mahatma Gandhi -20 th century prophet ) बनाई।
 
कैसे बनीं 20वीं सदी का पैगंबर- महात्मा गांधी

यह महात्मा पर बनी यह पहली आधिकारिक डॉक्यूमेंट्री थी जिसे बकायदा सेंसर बोर्ड का प्रमाण पत्र मिला था। यद्धपि गांधीजी की गोलमेज कॉन्फ्रेंस के लिए लंदन यात्रा को बीबीसी ने संजो लिया था परन्तु यह दृश्य कई बरस बाद भारत पहुंचे थे।
 
चट्टीएर की बनाई डॉक्यूमेंट्री 15 एमएम के कैमरे से शूट की गई थी और इसका पहला प्रसारण 15 अगस्त 1947 को दिल्ली में किया गया था। प्रधानमंत्री नेहरू की ओर से उनकी पुत्री इंदिरा और भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इसके प्रदर्शन के साक्षी बने थे।

1953 में चट्टीएर इस फिल्म को अंग्रेजी में डब कर अपने साथ अमेरिका ले गए जहां इसकी दूसरी स्क्रीनिंग तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डीडी आइसनहोवर और उनकी पत्नी के लिए हुई। इसके बाद यह फिल्म अगले छह साल तक लगभग गुम ही रही और 1959 में इसे फिर तलाशा गया।
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जब रिचर्ड एटेनबरो ने बनाई गांधी

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