मनोहर सरकार पार्ट 2 : आसान नहीं होगा इन चुनौतियों से निपटना

Gautam Chaudharyगौतम चौधरी Updated Wed, 20 Nov 2019 10:18 AM IST
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मनोहर लाल, दुष्यंत चौटाला सामने नई चुनौतियां हैं।
मनोहर लाल, दुष्यंत चौटाला सामने नई चुनौतियां हैं। - फोटो : अमर उजाला
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में हरियाणा के मुख्यमंत्री पद के लिए जब मनोहर लाल खट्टर पर विश्वास जताया था, तब इस फैसले से कई लोग आश्चर्यचकित थे। खट्टर हरियाणा में प्रभुत्व वाले जाट समुदाय से नहीं आते हैं। वे पंजाबी खत्री हैं। खत्रियों और हरियाणा में जाटों के बीच मनमुटाव रहा है। खास बात यह है कि उस समय हरियाणा की राजनीति में मनोहर लाल की स्थिति बेहद कमजोर थी।
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बहरहाल, दूसरी बार सीएम के पद पर बैठे 63 साल के खट्टर ने 21 अक्टूबर को हुए विधानसभा चुनाव से पहले प्रचार के दौरान कहा था, ऐसे लोग थे, जो कहते थे कि मैं नया हूं और अनुभवहीन हूं। कुछ लोगों ने मुझे अनाड़ी बताया लेकिन अब वही लोग कहते हैं कि मैं अनाड़ी नहीं हूं, राजनीति का खिलाड़ी हूं।
यही वजह है कि भाजपा को हरियाणा में पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर प्रभुत्व का फायदा मिला। भाजपा ने 2014 में 90 में से 47 सीटें हासिल करके पहली दफा हरियाणा में अपने बूते  सरकार बनाई थी और इस बार 75 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन उसे 40 सीटें ही नसीब हुईं, जो बहुमत से छह कम हैं।
सत्तारूढ़ पार्टी के स्वच्छ, पारदर्शी, भ्रष्टाचार मुक्त सरकार के दावे के बावजूद, राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना था कि राज्य की राजनीति में जाटों के प्रभुत्व का मुकाबला करने के लिए गैर-जाट वोटों का ध्रुवीकरण कर भाजपा एक बार फिर से सत्ता में लौटेगी, लेकिन भाजपा के रणनीतिकारों ने जो सोचा था ऐसा नहीं हुआ और भाजपा को हरियाणा में नुकसान का सामना करना पड़ा है।

खट्टर सरकार के आठ मंत्री 2019 की विधानसभा चुनाव हार गए हैं। इसमें से जाट समुदाय से आने वाले अभिमन्यु और ओमप्रकाश धनखड़ भी शामिल हैं। अब उनकी पार्टी सात निर्दलियों और 10 महीने पुरानी जन नायक जनता पार्टी (जेजेपी) से समर्थन ले रही है और जेजेपी नेता दुष्यंत चौटाला को उपमुख्यमंत्री बनाया गया है।
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