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विक्रम संवत् 2077: सबकी सुख समृद्धि के लिए होता है, नवसंवत्सर

Neelam Mahendra डॉ. नीलम महेंद्र
Updated Wed, 25 Mar 2020 01:29 PM IST
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हिंदू नववर्ष को पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है.
हिंदू नववर्ष को पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है. - फोटो : अमर उजाला

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जो सभ्यता अपने इतिहास पर गर्व करती है, अपनी संस्कृति को सहेज कर रखती है और अपनी परंपराओं का श्रद्धा से पालन करके पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाती है वो गुज़रते वक्त के साथ बिखरती नहीं बल्कि और ज्यादा निखरती जाती है।
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जब चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा के सूर्योदय के साथ सम्पूर्ण भारत के घर घर में लोग अपने इष्टदेवी देवता का अपनी अपनी परंपरा अनुसार पूजन करके नवसंवत्सर का स्वागत कर रहे होते हैं, तो विश्व इस सनातन संस्कृति की ओर कौतूहल से देख रहा होता है। क्योंकि कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से पूर्वोत्तर तक लोग इस दिन को उगादि, नवरेह, नवरात्र, गुढ़ी पड़वा, जैसे त्योहारों के रूप में मना रहे होते हैं, पावन नदियों की पूजा कर रहे होते हैं, मंदिरों में मंत्रोच्चार के साथ शंखनाद और घंटनाद चल रहा होता है, तो यह पूजन अपने लिए नहीं होता। क्योंकि अपने लिए जब मनुष्य पूजा करता है तो अकेले कर लेता है कभी भी कर लेता है कहीं भी कर लेता है, कैसे भी कर लेता है।

 
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सालों से चलने वाली यह परंपरा हर भारतीय घर की संस्कृति का हिस्सा है

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