विश्व नशा मुक्ति दिवस 2020: नशा है एक धीमा जहर? कैसे बचेगी दुनिया?

Narednra Bharatiनरेंद्र भारती Updated Fri, 26 Jun 2020 10:12 AM IST
विज्ञापन
दुनिया के देशों में नशा करने वालों की मृत्यु दर भी बढ़ते जा रही है- सांकेतिक तस्वीर
दुनिया के देशों में नशा करने वालों की मृत्यु दर भी बढ़ते जा रही है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें

सार

  • आज बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नशे के गुलाम बन चुके हैं।
  • नशा आज स्टेटस सिबंल बन चुका है।
  • आज मां-बाप दुखी हैं कि उनके चिराग नशें की गिरफत में आते जा रहे हैं।
  • हर राज्यों की सहभगिता हो तो नशे पर लगाम लग सकती है।

विस्तार

बेशक प्रतिवर्ष 26 जून 2020 को पूरी दुनिया में अंतराष्टरीय नशा निषेध दिवस मनाया जा रहा है, मगर हर साल औपचारिकता ही निभाई जाती है। संकल्प लिया जाता है, दावे किए जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नीतियां बनाई जाती हैं। मगर धरातल पर कुछ नहीं होता। नशे के सेवन को रोकने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। नशा एक धीमा जहर है।
विज्ञापन

दुनिया के देशों में नशा करने वालों की मृत्यु दर भी बढ़ते जा रही है। तमाम दावों के बावजूद नशा नहीं रुक रहा है। प्रतिवर्ष लाखों लोग दुनिया में नशें के कारण अकाल मौत मर रहे हैं। पूरी दुनिया के देशों में जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं। सेमिनार लगाए जाते हैं। नशे के दुष्परिणामों के बारे में विशेषज्ञों द्वारा लोगों को सलाह दी जाती है।
एक दिन ऐसे दिवस मनाने से कुछ नहीं होगा। देशों की एकजुटता से ही नशे को रोका जा सकता है। दुनिया में नशीले पदार्थो की तस्करी की खबरे समाचार पत्रों में प्रकाशित होती हैं। नशीली दवाएं पकड़ी जाती हैं। आज कोकीन,अफीम, गांजा ,हैरोईन व हशीश व ब्राउन शुगर तथा चरस व भांग जैसे नशे किए जा रहे हैं।

आज बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक नशें के गुलाम बन चुके हैं। नशा आज स्टेटस सिबंल बन चुका है। कैसी विडंबना है कि मानव को नशें से होने वाली बीमारियों का पता है फिर भी खुद ही मौत को दावत दी जाती है। पुरुष तो नशा करते ही हैं मगर आज महिलाए भी नशें की गिरफत में आ चुकी हैं। दर्जनों प्रकार के नशों को करती हैं।

दुनिया में नशा करने वाले लोगों की संख्या में वृ़द्धि बहुत ही चिंताजनक है। नशा छुड़ाने के लिए नशा मुक्ति केन्द्र खोले जा रहे हैं। बीते 31 मई 2020 को विश्व धूम्रपान निषेध दिवस मनाया गया, मगर ऐसे दिवस औपचारिकता भर ही रह गए हैं। युवा पीढी़ नशें की गुलाम हो चुकी है।

दुनिया भर के युवा नशे की अंधी गलियों में भटक चुके हैं। युवाओं को बाहर निकालना हरेक का नैतिक कर्तव्य है। दुनिया में हर साल लाखों युवा नशे के कारण असमय ही मौत के आगोश में समाते जा रहे हैं। नशा निषेध दिवस पर एक संकल्प लेना होगा।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

अक्सर देखा गया है कि उच्च घरानों के युवा मंहगें नशें कर रहे हैं...

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us