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महिला अधिकारों की आवाज बनी ईरान की 'द ब्लू गर्ल' सहर खोडयारी

Veena Nagpalवीना नागपाल Updated Thu, 07 Nov 2019 06:35 AM IST
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क्या यह भी कोई गुनाह हो सकता है कि कोई युवती स्टेडियम न जा सके और फुटबॉल मैच खेलता न देख सके।
क्या यह भी कोई गुनाह हो सकता है कि कोई युवती स्टेडियम न जा सके और फुटबॉल मैच खेलता न देख सके। - फोटो : twitter
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हांलाकि उस नीली लड़की की बात बहुत दुख भरी है लेकिन वह अफगानिस्तान, ईरान और यहां तक कि सऊदी अरब की महिलाओं व युवतियों की आजादी और उनके अधिकारों का सिंबल बन गई है। उसको लेकर अब विश्व भर में महिला मुक्ति की आवाजें सुनाई देने लगी हैं क्योंकि अभी तक दुनिया में ऐसे छोटे-बड़े कई कोने मौजूद हैं जहां महिला अधिकारों की बात भी करना एक गुनाह है।
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दरअसल, महिलाएं न जाने कितनी बंदिशें और पाबंदियों में कैद है। उनका अपना कोई वजूद है ही नहीं। वह जिंदगी का उतना भर टुकड़ा जी पाती हैं जितना कि एक मर्द उसे बख्श देता है। यह अमानवीयता अभी तक चली आ रही है।

क्या इस तरह की पाबंदी के बारे में कोई सोच सकता है? 
क्या यह भी कोई गुनाह हो सकता है कि कोई युवती स्टेडियम न जा सके और अपनी मनपसंद टीम को फुटबॉल मैच खेलता न देख सके। अपनी मनपसंद टीम की हौसला अफजाई न कर सके।

हम तो इस तरह की पाबंदी के बातें सोच भी नहीं सकते हैं। हम इस मामले में न केवल आगे हैं बल्कि यहां क्रिकेट मैच के दौरान जिस तरह से महिला पुरुषों की बराबर संख्या से भरा होता है और युवतियां जैसे अपनी मनपंसद टीम को चीयर्स करती हैं वह दृश्य ही यह बताने के लिए काफी है कि यहां महिलाएं कितनी स्वतंत्र और मुक्त हैं। यहां युवतियां न केवल चीयर्स करती हैं बल्कि स्वयं भी खेलती हैं। लेकिन अभी तक भी कुछ देशों में स्टेडियम तक भी महिलाओं को जाने की मनाही है।

ईरान उनमें से एक है। वहीं उस युवती के साथ दुख भरी घटना घटी। वह युवती सहर खोदीयारी स्टेडियम में प्रवेश करना चाहती थी क्योंकि उसकी मनपसंद टीम अस्तेगहलाल एफसी का आज मैच था। उसकी यह प्रिय टीम नीली जर्सी पहनकर खेलती है तो सहर ने भी नीली वेशभूषा ही पहनी थी। लेकिन सहर को स्टेडियम में नहीं जाने दिया गया। उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

सहर इससे इतना आहत हुई कि अपना विरोध जताने के लिए उसने स्वयं को आग लगा ली। सहर की इस तरह से मौत ने सबको दहला दिया। अब तो चारों तरफ से महिला स्वतंत्रता और अधिकारों की आवाजें उठने लगीं।

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