क्या केवल कानून बनाकर कालाधन की समस्या का समाधान संभव है?

Avinash chandraअविनाश चंद्र Updated Thu, 19 Mar 2020 01:25 PM IST
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धन अर्जित करने की जिस प्रक्रिया में सरकार को (कर ना चुकाकर) शामिल नहीं किया जाता है वह कालाधन बन जाता है।
धन अर्जित करने की जिस प्रक्रिया में सरकार को (कर ना चुकाकर) शामिल नहीं किया जाता है वह कालाधन बन जाता है।

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धन, धन होता है। यह काला और सफेद नहीं होता। धन को काले और सफेद (कानूनी और गैर कानूनी) में विभाजित करना ही असल समस्या है। जैसे ही सरकार या कोई सरकारी संस्था धन को काले या सफेद में वर्गीकृत करती है, वह धन अपना नैसर्गिक गुण यानी 'और धन पैदा करने की क्षमता' समाप्त कर देता है। दरअसल, किसी देश की अर्थव्यवस्था को सबसे ज्यादा नुकसान, मौजूदा धन की सहायता से और ज्यादा धन पैदा कर पाने की अक्षमता पहुंचाती है। 
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आगे बढ़ने से पहले हमें गैरकानूनी अर्थात काले धन की उत्पत्ति को समझना होगा। मोटे तौर पर काले धन का मुख्य कारण सरकार द्वारा लोगों को अधिक आय अर्जित करने पर पाबंदी लगाना और आवश्यकता से अधिक कर वसूलना है। दरअसल, आय और व्यय एक चक्रीय प्रक्रिया है, जिसमें उत्पादक और उपभोक्ता के साथ सरकार भी शामिल होती है। जिस प्रक्रिया में सरकार को (कर ना चुकाकर) शामिल नहीं किया जाता है वह कालाधन बन जाता है।  
हमें समझना होगा कि अपने आय को और अधिक करना मानवीय स्वभाव है। हर कोई चाहता है कि अपनी वर्तमान आय में वह और इजाफा करे। इसके लिए एक सरकारी अध्यापक स्कूल के बाद खाली समय में ट्यूशन पढ़ा सकता है। या एक सरकारी डॉक्टर थोड़ा समय निकालकर घर पर और मरीजों को देख सकता है। ध्यान रहे कि यह उस प्रकार का काम नहीं है, जिससे किसी का अहित हो, लेकिन ऐसी संभावनाएं होती हैं कि सरकारी कर्मचारी अपने प्राथमिक पेशे के प्रति ईमानदार नहीं रह जाएगा। 
इसके मद्देनजर, कर्मचारियों के द्वारा प्राथमिक पेशे (नौकरी) के प्रति लापरवाही बरतने से रोकने के नाम पर सरकारी कर्मियों का ऐसा करना प्रतिबंधित है और पकड़े जाने पर सजा का प्रावधान है। लेकिन बड़ी तादात में सरकारी कर्मचारी न केवल ऐसा करते हैं बल्कि नौकरी के इतर अर्जित धन का चाहते हुए भी खुलासा नहीं कर पाते हैं। और इस प्रकार कर ना चुकाने के कारण वह धन काले धन में परिवर्तित हो जाता है।

हालांकि संपूर्ण कालेधन में इस प्रकार से अर्जित काले धन का हिस्सा अत्यंत कम होता है। काले धन में सबसे ज्यादा हिस्सेदारी राजनेताओं द्वारा लिए गए राजनीतिक चंदे, सरकारी अधिकारियों, पुलिस आदि द्वारा ली गई रिश्वत, रियल स्टेट के क्षेत्र में होने वाला लेनदेन और उद्योगपतियों द्वारा कर चोरी की होती है। इस प्रकार, चूंकि अवैध धनार्जन की प्रक्रिया में व्यवस्था से जुड़े सभी वर्ग का प्रतिनिधित्व होता है, अतः क्रोनिज्म के कारण किसी भी सरकारी एसआईटी या कानून बनाकर इस समस्या का समाधान तलाशने की उम्मीद बेमानी है। 

अब बारी आती है समस्या के समाधान की। चूंकि समस्या का सबसे बड़ा कारण आयकर की दर का अधिक होना और सरकारी कर्मियों को अपनी आय को बढ़ाने की छूट न होना है, इसलिए इसका समाधान आयकर की दर को अत्यंत कम करना या बिल्कुल समाप्त कर देना और लोगों को सरकारी नौकरी के इतर कार्य करने की अनुमति देना है। 
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