कोरोना काल में मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज ने बना लिया नया रिकॉर्ड

Satish Aliaसतीश एलिया Updated Sun, 19 Apr 2020 02:39 PM IST
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भाजपा ने 13 साल मुख्यमंत्री रह चुके चौहान को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करके अंदरूनी खींचतान को तो थाम लिया लेकिन...
भाजपा ने 13 साल मुख्यमंत्री रह चुके चौहान को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करके अंदरूनी खींचतान को तो थाम लिया लेकिन... - फोटो : PTI

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देश जिस अभूतपूर्व वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के साये में तालाबंदी में कैद है, इस बीमारी से इलाज के उपायों और बचाव के दिन रात प्रयासों के बावजूद वायसस से संक्रमितों और मौतों का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। मध्यप्रदेश में इंदौर शहर में इस वायरस से होने वाली मौतों की तादाद रोजाना बढ़ रही है और इसमें चिकित्सकों से लेकर पुलिस कर्मी तक शामिल हैं। इस बीच कोरोना संकटकाल में कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के तख्तापलट से जन्मी भाजपा की शिवराज सरकार ने एक नया रिकार्ड बना लिया है। 
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चौथी दफा मुख्यमंत्री बने शिवराज सिंह चौहान मप्र के इतिहास में अब तक के सर्वाधिक अवधि वाले मुख्यमंत्री इस चौथी पारी की शुरूआत में ही बन चुके हैं। इसके अलावा वे सर्वाधिक दिन तक बिना मंत्रिमंडल के मुख्यमंत्री रहने के मामले में भी नया कीर्तिमान बना चुके हैं। उनसे पहले यह रिकार्ड कर्नाटक के वर्तमान मुख्यमंत्री वीएस येदियुरप्पा के नाम था, वे 24 दिन बिना मंत्रियों के रहे थे और शिवराज 27 दिन से अकेले ही मप्र सरकार चला रहे हैं। इसमें यह भी है कि येदियुरप्पा के सामने कोरोना महामारी से निपटने जैसा अभूतपूर्व संकट नहीं था।

क्यों नहीं बन पा रहा मंत्रिमंडल ?  

जिन हालात में कमलनाथ सरकार का पतन हुआ और शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई गई,वे सियासी लिहलाज से भी अभूतपूर्व थे। कांग्रेस के 22 विधायकों की पार्टी से बगावत और उससे पहले उनके नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के कांग्रेस छोड़ भाजपा प्रवेश के घटनाक्रम में इन बागी विधायकों के इस्तीफे मंजूर किए जाने और विधानसभा में बहुमत साबित करने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक के कई एपिसोड शामिल हैं। 
भाजपा ने 13 साल मुख्यमंत्री रह चुके चौहान को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला करके इस पद को लेकर भाजपा में ही चल रही अंदरूनी खींचतान को तो थाम लिया लेकिन मंत्री बनाने को लेकर भाजपा से ज्यादा कांग्रेस से भाजपा में आए सिंधिया समर्थक पूर्व मंत्रियों की महात्वाकांक्षा को रोक पाना मुश्किल था। कोरोना संकट के लिहाज में मंत्रिमंडल गठन टाल दिया गया। लेकिन कोरोना संकट से निपटने में अकेले जूझते मुख्यमंत्री शिवराज और इंदौर भोपाल में कोरोना के हालात बिगड़ने पर पूर्व सीएम कमलनाथ से लेकर समूची कांग्रेस ने मंत्रिमंडल गठन को लेकर सियासत शुरू कर दी, मकसद था पूर्व मंत्रियो की नई बगावत की सुगबुगाहट पैदा करना। 
भाजपा कांग्रेस की इस चाल में कोरोना संकटकाल में उलझना नहीं चाहती थी। इस वजह से करीब साढ़े तीन हफ्ते बीत गए लेकिन अब भाजपा की सरकार बनाने में महत्वपूर्ण किरदार निभाने वाले भाजपा के वरिष्ठ विधायकों और सिंधिया के साथ बगावती झंडा लेकर कांग्रेस से भाजपा में आए पूर्व मंत्रियों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ये अब विधायक भी नहीं हैं लेकिन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने इन नवागत भाजपाइयों में से कुछ को मंत्रिमंडल में शामिल करने और अपने पूर्व के विश्वस्त साथियों को भी समाहित करने की चुनौती का सामना है।                                        

20 अप्रैल का इंतजार इसलिए                                                                                              

चौदह अप्रैल को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को संबोधन में लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ाने और इसमें 20 अप्रैल को कुछ रियायतें देने की घोषणा के मद्देनजर एक बार फिर भाजपा में मंत्रिमंडल गठन की कवायद तेज हुई। इसी बीच ज्योतिरादित्य सिंधिया की केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात ने इस अवश्यंभावी मंत्रिमंडल गठन में सिंधिया गुट की बेसब्री को रेखांकित किया। इधर हर शुभ कार्य में पचांग देखने के इतिहास वाली भाजपा में पंचक समाप्त होने का इंतजार किया जा रहा है। लॉकडाउन में रियायत काल शुरू होते ही पंचक भी समाप्त होने वाले हैं। संभावना है कि सोमवार से शुरू हो रहे हफ्ते में मंत्रिमंडल गठन हो सकता है।   
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