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5 साल बाद भी काम कर रहा है मंगलयान, इस वजह से बना नासा के लिए भी खास

shashank dwivediशशांक द्विवेदी Updated Fri, 04 Oct 2019 08:12 AM IST
मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है
मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है - फोटो : Amar Ujala
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5 नवम्बर 2013 को प्रक्षेपण और 24 सितंबर 2014  को मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के बाद लगभग 5 साल बाद भी भारत का ऐतिहासिक मार्स ऑर्बिटर मिशन (एमओएम) यानी मंगलयान अच्छी तरह से काम कर रहा है और मिशन से जुड़ी हुईं जरूरी तस्वीरें इसरो और नासा के साथ साझा कर रहा है। फिलहाल मंगलयान की कक्षा में कुछ सुधार किया जाएगा ताकि यह कई वर्षों तक काम करता रहे।

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इसरों से जुड़े सूत्रों के अनुसार मंगलयान की कक्षा में सुधार के जरिए उसकी बैटरी की जिंदगी बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। यह इसलिए भी जरूरी है कि लंबे ग्रहण के दौरान भी मंगलयान को ऊर्जा मिलती रहे। कक्षा में सुधार नहीं किया गया तो यह निस्तेज हो सकता है क्योंकि लंबे ग्रहण के दौरान बैटरी इसका साथ छोड़ सकती है।

कक्षा में सुधार होने से बैटरी पर ग्रहण का असर आधा रह जाएगा, जिससे सेटेलाइट कई वर्षों तक काम करता रह सकता है। इसकी वजह से हमें मंगल ग्रह से जुड़ी गतिविधियों का अध्ययन करने में और समय मिल जाएगा।

भारत का प्रथम मंगल अभियान
मंगलयान (मार्स ऑर्बिटर मिशन), भारत का प्रथम मंगल अभियान है और यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की एक महत्वाकांक्षी अन्तरिक्ष परियोजना है। इस परियोजना के अन्तर्गत 5 नवम्बर 2013 को 2 बजकर 38 मिनट पर मंगल ग्रह की परिक्रमा करने हेतु छोड़ा गया एक उपग्रह आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसऍलवी) सी-25 के द्वारा सफलतापूर्वक छोड़ा गया। इसके साथ ही भारत भी अब उन देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने मंगल पर अपने यान भेजे हैं।

वैसे अब तक मंगल को जानने के लिए शुरू किए गए दो तिहाई अभियान असफल भी रहे हैं परन्तु 24 सितंबर 2014 को मंगल पर पहुंचने के साथ ही भारत विश्व में अपने प्रथम प्रयास में ही सफल होने वाला पहला देश तथा सोवियत रूस, नासा और यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के बाद दुनिया का चौथा देश बन गया है। इसके अतिरिक्त ये मंगल पर भेजा गया सबसे सस्ता मिशन भी है।

भारत एशिया का भी ऐसा करने वाला प्रथम पहला देश बन गया, क्योंकि इससे पहले चीन और जापान अपने मंगल अभियान में असफल रहे थे। प्रतिष्ठित 'टाइम' पत्रिका ने मंगलयान को 2014 के सर्वश्रेष्ठ आविष्कारों में शामिल किया था।

19 अप्रैल 1975 में स्वदेश निर्मित उपग्रह ‘आर्यभट्ट’ के प्रक्षेपण के साथ अपने अंतरिक्ष सफर की शुरुआत  करने वाले इसरो की यह सफलता भारत की अंतरिक्ष में बढ़ते वर्चस्व की तरफ इशारा करती है। ये सफलता इसलिए खास है क्योंकि भारतीय प्रक्षेपण राकेटों की विकास लागत ऐसे ही विदेशी प्रक्षेपण राकेटों की विकास लागत का एक-तिहाई है।

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