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मुझको देश याद आता है

Sheela SinghSheela Singh Updated Fri, 08 Nov 2019 06:40 PM IST
India
India - फोटो : File
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जब भी कोई त्योहार आता है
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मुझको देश याद आता है
सूरज की पहली रोशनी में
घर का आंगन याद आता है
दिन जब अंगड़ाई लेता है
माँ का खाना याद आता है
आँखे जब झपकी लेती है
बिस्तर पुराना याद आता है
शाम जब ढलती है यहां पर
दरवाजे पर इंतज़ार याद आता है

क्या बतलाये कितने बरस ऐसे ही बीत गए
बाबुल की मेहंदी वाले हाथ जाने कब रीत गए
मोहे आंगन अपना छोड़े हुए एक जमाना बीत गया
वो शहर के रस्ते कुछ याद रहे कुछ भूल गए

क्या बतलाये वो बचपन वाले व्रत अब सब छूट गए
सखिओं संग मंदिर जाने के बस वो किस्से याद रहे
छोटी छोटी गलियों से होकर कॉलेज जाना याद आया
थोड़े पैसे में थोड़ा सा बचाना अब भूल गए

जब भी कोई देश से आता
मुझको अपना घर याद आता है
जब मिल बैठे दोस्त पुराने
गुजरा जमाना याद आता है
किस्सों की पोटली जब खुलती है
एक एक नजारा याद आता है
गांव में जाकर मस्ती करना
यहां की छुट्टी में याद आता है
जब भी कोई त्योहार आता है
मुझको भारत याद आता है

#Maya
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