कांग्रेस अपनी हार की नहीं बल्कि बीजेपी की जीत की समीक्षा करे, तुरंत प्रभाव में उठाए ये बड़े कदम

Neelam MahendraNeelam Mahendra Updated Thu, 30 May 2019 04:39 PM IST
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कांग्रेस पर छाए संकट के बादल कब छंटेंगे?
कांग्रेस पर छाए संकट के बादल कब छंटेंगे? - फोटो : फाइल फोटो
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2019 के लोकसभा नतीजे कांग्रेस के लिए बहुत बुरी खबर लेकर आए और जैसा कि अपेक्षित था देश की सबसे पुरानी पार्टी में भूचाल आ गया। एक बार फिर हार की समीक्षा के लिए कमेटी का गठन हो चुका है। पार्टी में इस्तीफा का दावा करने वालों की बाढ़ आ गई है। खबर है कि खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस्तीफा देने पर अड़े हैं। लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक राहुल गांधी और उनके नेतृत्व में अपना विश्वास जता रहे हैं। यह अच्छी बात है कि ऐसे कठिन दौर में भी किसी संगठन का अपने नेतृत्व पर भरोसा कायम रहे। लेकिन ऐसा कम ही देखने को मिलता है कि लगातार मिलने वाली असफलताओं के बावजूद उस संगठन के बड़े नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक अपने नेता के साथ मजबूती से खड़े हों। 
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दरअसल, सभी लोग राहुल को यह समझाने में लगे हैं कि उन्होंने चुनावों में बहुत मेहनत की और चुनावों में पार्टी की हार क्यों हुई उसकी समीक्षा की जाएगी वे मन छोटा ना करें पार्टी हर हाल में उनके साथ है। इससे पहले भी 2014 के लोकसभा चुनाव हों या फिर उसके बाद होने वाले विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनाव भाजपा लगातार अपने कांग्रेस मुक्त भारत के सपने को चरितार्थ करने में लगी थी और राज्य दर राज्य सत्ता कांग्रेस के हाथों से धीरे-धीरे फिसलती जा रही थी।
महाराष्ट्र, हरियाणा, आंध्रप्रदेश, हिमाचल प्रदेश असम जैसे राज्य जहां कहीं वो सत्ता में थी तो नकार दी गई, वहीं गोवा, उत्तरप्रदेश, बिहार, गुजरात जैसे राज्य जहां सत्ता में नहीं थी तो भी नकार दी गई। और जिन तीन राज्यों मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान में अभी मात्र चार महीने पहले सत्ता में आई थी वहां भी लोकसभा चुनावों में जनता का भरोसा नहीं जीत पाई। इन परिस्थितियों में राहुल का इस्तीफा देने की पेशकश करने और कांग्रेस का उनमें एक बार फिर विश्वास जताना ना सिर्फ अत्यंत निराशाजनक है बल्कि कांग्रेस पार्टी के भविष्य के लिए भी घातक है। 
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