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Valentine Day 2019ः तो क्या भारतीय संस्कृति के लिए खतरा बन रहा है वैलेंटाइन डे?

Neelam MahendraNeelam Mahendra Updated Wed, 13 Feb 2019 04:40 PM IST
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वैलेंटाइन डे के बारे में कुछ सालों पहले तक हमारे देश में बहुत ही कम लोग जानते थे।
वैलेंटाइन डे के बारे में कुछ सालों पहले तक हमारे देश में बहुत ही कम लोग जानते थे। - फोटो : फाइल फोटो
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वैलेंटाइन डे, एक ऐसा दिन जिसके बारे में कुछ सालों पहले तक हमारे देश में बहुत ही कम लोग जानते थे, आज उस दिन का इंतजार करने वाला एक अच्छा खासा वर्ग उपलब्ध है। अगर आप सोच रहे हैं कि केवल इसे चाहने वाला युवा वर्ग ही इस दिन का इंतजार विशेष रूप से करता है तो आप गलत हैं क्योंकि इसका विरोध करने वाले बजरंग दल, हिन्दू महासभा जैसे हिन्दूवादी संगठन भी इस दिन का इंतजार उतनी ही बेसब्री से करते हैं। इसके अलावा आज के भौतिकवादी युग में जब हर मौके और हर भावना का बाज़ारीकरण हो गया हो, ऐसे दौर में  गिफ्ट्स टेडी बियर चॉकलेट और फूलों का बाजार भी इस दिन का इंतजार  उतनी ही व्याकुलता से करता है।

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प्रेम जो बन गया है प्रोडक्ट
आज प्रेम आपके दिल और उसकी भावनाओं तक सीमित रहने वाला  केवल आपका एक निजी मामला नहीं रह गया है। उपभोक्तावाद और बाज़ारवाद के इस दौर में प्रेम और उसकी अभिव्यक्ति दोनों ही बाज़ारवाद का शिकार हो गए हैं। आज प्रेम छुप कर करने वाली चीज नहीं है, फेसबुक इंस्टाग्राम पर शेयर करने वाली चीज है। आज प्यार वो नहीं है जो निस्वार्थ होता है और बदले में कुछ नहीं चाहता बल्कि आज  प्यार वो है जो त्याग नहीं अधिकार मांगता है। आज मल्टीनेशनल कंपनियां बड़ी चालाकी से हमें यह समझाने में सफल हो गई हैं कि  प्रेम को तो महंगे उपहार देकर जताया जाता है। वे हमें करोड़ों के विज्ञापनों से यह बात समझा कर अरबों कमाने में कामयाब हो गई हैं कि "इफ यू लव समवन शो इट", यानी, अगर आप किसी से प्रेम करते हैं तो "जताइए"  और वैलेंटाइन डे इसके लिए सबसे अच्छा दिन है।
 

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