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बजट में हो रोजगार पर जोर

Jayantilal Bhandariजयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 28 Jan 2020 02:39 AM IST
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निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो)
निर्मला सीतारमण (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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देशवासियों की निगाहें आगामी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट की ओर लगी हुई हैं। जब देश की आर्थिक विकास दर पांच फीसदी से भी कम और रोजगार वृद्धि की दर तीन प्रतिशत से भी कम है, तब बजट में वित्त मंत्री रोजगार की दशा और दिशा सुधारने के काम को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए दिखाई दे सकती हैं। मानव संसाधन परामर्श संगठन कॉर्न फेरी की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि वर्ष 2030 तक दुनिया भर में जहां कुशल कामगारों का संकट होगा, वहीं भारत के पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कुशल कामगार होंगे। रिपोर्ट में यह कहा गया है कि वर्ष 2030 तक दुनिया के 19 विकसित और विकासशील देशों में 8.52 करोड़ कुशल श्रमशक्ति की कमी होगी। जबकि भारत विश्व का इकलौता ऐसा देश होगा, जिसके पास वर्ष 2030 तक जरूरत से ज्यादा कुशल कामगार होंगे।
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आगामी बजट में वित्त मंत्री रोजगार वृद्धि के लिए बुनियादी ढांचा क्षेत्र पर फोकस करते हुए दिखाई दे सकती हैं। सरकार ने बुनियादी ढांचा क्षेत्र की परियोजनाओं पर आगामी पांच साल के लिए 102 लाख करोड़ रुपये खर्च करना सुनिश्चित किया है। इससे ऊर्जा, सड़क, रेल, परिवहन, सिंचाई, हवाई अड्डों तथा डिजिटल क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बढ़़ने की संभावना होगी। स्वरोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए बजट में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है। चूंकि स्टार्ट अप के क्षेत्र में भारत तीसरे नंबर पर है, ऐसे में, बजट में स्टार्ट अप पर जोर हो सकता है तथा मुद्रा योजना को और विस्तार दिया जा सकता है। सरकारी विभागों में 6 लाख 84 हजार खाली पद भरने के लिए भी कदम उठाए जा सकते हंै। नई शिक्षा नीति के तहत 2030 तक शिक्षा में कुल सरकारी खर्च 10 फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी करने का जो लक्ष्य निर्धारित किया गया है, उसे पाने के लिए भी सरकार बजट में कदम उठा सकती है। बजट में मनरेगा के लिए अतिरिक्त धन आवंटित करने के अलावा सरकार ऐसे नए कृषिगत उद्यमों को प्रोत्साहन दे सकती है, जिनसे ग्रामीण क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के साथ कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों के विकास के माध्यम से बेरोजगारी और गरीबी दूर करने वाले कामों को प्रोत्साहन दिया जा सके।
मांग में सुस्ती और कर्ज न मिल पाने से नकदी के संकट से गुजर रहे एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योग) क्षेत्र को बजट से नई जान मिलने की उम्मीद है। उद्यमियों ने वित्त मंत्री के साथ बजट पूर्व बैठक में इस क्षेत्र में रोजगार बढ़ाने के लिए कई मांग रखी भी है। एमएसएमई क्षेत्र की एक मांग यह है कि उनके द्वारा दी जाने वाली पेशेवर सेवाओं पर वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की दर 18 फीसदी से घटाकर पांच फीसदी की जाए। उसकी मांग यह भी है कि बैंकों ने उसके 70,000 करोड़ रुपये को जो एनपीए घोषित किया है, उसे वर्ष 2022 तक नियमित कर्ज माना जाए। बैंकों द्वारा एमएसएमई से वसूले जाने वाले सभी तरह के सर्विस चार्ज को माफ करने की भी उसने मांग की है। उसने यह मांग भी की है कि एक एमएसएमई द्वारा दूसरे एमएसएमई से कारोबार करने पर सर्विस चार्ज 12 फीसदी के बजाय पांच प्रतिशत हो। उम्मीद करनी चाहिए कि वित्त मंत्री आगामी बजट को रोजगार केंद्रित बनाएंगी, जिसके तहत रोजगार, कौशल विकास तथा शिक्षण और प्रशिक्षण के रणनीतिक कदम दिखाई देंगे।
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