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रोजगार पैदा करने का कौशल

जयंतीलाल भंडारी Updated Tue, 11 Jun 2019 06:54 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी - फोटो : a
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केंद्रीय सांख्यिकीय कार्यालय के श्रमबल के नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही है। कई आर्थिक विश्लेषकों का कहना है कि देश में बेरोजगारी की दर 45 साल में सर्वाधिक है। ऐसे में पांच जून को रोजगार में कमी की चुनौती से निपटने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोजगार एवं कौशल विकास पर 10 सदस्यीय मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया है। यह समिति देश में बढ़ती रोजगार चिंताओं के परिप्रेक्ष्य में रोजगार अवसर तथा कौशल विकास बढ़ाने के लिए अहम सुझाव और कार्ययोजना प्रस्तुत करेगी।
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भारत में रोजगार अवसरों पर आधारित रिपोर्टों में यह कहा जा रहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में श्रम का आधिक्य है, लेकिन कौशल की काफी कमी है। अमेरिका और जापान सहित दुनिया के कई विकसित और विकासशील देशों में मेरिट और टैलेंट के आधार पर विदेशी युवाओं के लिए रोजगार की संभावनाओं का जो नया परिदृश्य उभरकर सामने आया है, उसमें भारतीय प्रतिभाओं के लिए अच्छी संभावनाएं हैं। अब तक अमेरिका सहित कई देशों में लंबे समय से निवास करने वाले, उन निवासियों के पारिवारिक संबंधों के आधार पर तथा सस्ती मजदूरी पर काम करने वाले लोगों को नागरिकता और वीजा दिए जाने में प्राथमिकता दी जाती थी। लेकिन अब अमेरिका और जापान सहित विभिन्न देशों में उनके नवनिर्माण और विकास में योगदान दे सकने वाली विदेशी प्रतिभावान नई पीढ़ी को प्राथमिकता दिए जाने के साफ संकेत हैं।
17 मई को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने योग्यता आधारित एवं अंक आधारित जो नई आव्रजन नीति (इमिग्रेशन पॉलिसी) पेश की है, उसके तहत मौजूदा ग्रीन कार्ड की जगह ‘बिल्ड अमेरिका’ वीजा लाने का प्रस्ताव रखा गया है। इससे उन हजारों भारतीय पेशेवरों और दक्ष कर्मियों को लाभ होने की उम्मीद है, जो औसतन करीब एक दशक से अधिक समय से ग्रीन कार्ड के लिए इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह जापान के प्रसिद्ध उद्यमी हिरोयुकी तायकुची सान ने कहा कि जापान की औद्योगिक और कारोबार आवश्यकताओं में तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल तेज होने की वजह से जापान में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) के साथ ही कई अन्य क्षेत्रों में मसलन हेल्थकेयर, कृषि, अनुसंधान और विकास, सेवा व वित्त आदि क्षेत्र में कौशल प्रशिक्षित कार्यबल की भारी कमी अनुभव की जा रही है। खासतौर से बुजुर्ग होती जनसंख्या और जन्म दर गिरने की वजह से जापान में पेशेवरों की सबसे अधिक जरूरत है। चूंकि जापान में विभिन्न सांस्कृतिक व कारोबारी संबंधों के कारण अन्य विदेशियों की तुलना में भारतीयों को अधिक सम्मान दिया जाता है, इसलिए वहां भारतीय पेशेवरों के लिए रोजगार की अच्छी संभावनाएं हैं। जापान विदेश व्यापार संगठन (जेईटीआरओ) ने वर्ष 2020 तक दो लाख भारतीय पेशेवरों की पूर्ति के लिए कार्ययोजना बनाई है। वहीं जापान के निजी क्षेत्र ने तीन लाख भारतीय पेशेवरों की जरूरत प्रस्तुत की है। ऐसे में दो साल में पांच लाख भारतीय पेशेवर जापान में अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकेंगे। दुनिया के ख्याति प्राप्त मानव संसाधन परामर्श संगठन कॉर्न फेरी और विश्व बैंक की रिपोर्टों में कहा गया है कि जहां दुनिया में 2030 तक कुशल कामगारों का संकट होगा, वहीं भारत के पास 24.5 करोड़ अतिरिक्त कुशल कामगार होंगे।
कृत्रिम बुद्धिमता (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) के कारण उच्च कौशल प्रशिक्षित भारत की नई पीढ़ी को देश और दुनिया में अच्छे मौके मिलने की संभावना रहेगी। विश्व बैंक की रोजगार रहित विकास नामक रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में तेजी से रोजगार के दरवाजे पर दस्तक देने वाले युवाओं की संख्या को देखते हुए हर साल 81 लाख नई नौकरियां और नए रोजगार अवसर पैदा करने की जरूरत है।
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