आर्थिक मोर्चे पर उम्मीदें : भारत की धमक और बढ़ने की उम्मीद है

जयंतीलाल भंडारी Updated Fri, 31 May 2019 03:32 AM IST
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जयंतीलाल भंडारी - फोटो : a

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नरेंद्र मोदी दोबारा प्रधानमंत्री का पदभार ग्रहण कर चुके हैं, जिसके बाद आर्थिक मोर्चे पर भारत की धमक और बढ़ने की उम्मीद है। पिछले दिनों स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने कहा कि मोदी की अगुवाई में एनडीए सरकार भारत को आर्थिक विकास और सुधारों की डगर पर तेजी से आगे बढ़ाएगी। इससे आर्थिक नीतिगत स्थिरता बनी रहेगी, विदेशी पूंजी प्रवाह में सुधार आएगा, कारोबार सुगमता बढ़ेगी, कर व्यवस्था ज्यादा सरल बनेगी और निजी खपत व निजी निवेश में वृद्धि होगी।
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प्रधानमंत्री मोदी ने भी कहा है कि नई सरकार आगामी पांच साल में देश को आर्थिक शक्ति बनाने की डगर पर आगे बढ़ेगी। वैश्विक सुस्ती के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को गतिशील बनाने के लिए नई सरकार मैन्यूफैक्चरिंग, बैंकिंग और कॉरपोरेट क्षेत्र, निर्यात, ई-कॉमर्स, ग्रामीण विकास, भूमि एवं श्रम सुधार और काले धन पर नियंत्रण से लेकर रोजगार को बढ़ावा देने के लिए कई प्रभावी और कठोर कदम उठाते हुए दिखाई देगी।
पिछली सरकार के अधूरे एजेंडे को पूरा करने के लिए मोदी-2 सरकार के सामने वैश्विक सुस्ती, कच्चे तेल में तेजी और अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क बढ़ाने की चेतावनी जैसी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। वर्ष 2020 में भारत की विकास दर 7.5 फीसदी से घटकर सात फीसदी रह जाने का अनुमान है। ऐसे में बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाना होगा, कृषि पर ध्यान देना होगा, वैश्विक कारोबार में वृद्धि करनी होगी, उदार टैक्स कानून बनाना होगा, ज्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश सुनिश्चित करना होगा, निर्यात में सुधार और विनिर्माण को आगे बढ़ाने की रणनीति बनानी होगी, भूमि एवं श्रम सुधार और डिजिटलीकरण को आगे बढ़ाना होगा, ग्रामीण विकास, सड़क निर्माण, बुनियादी ढांचा विकास, आवास एवं स्मार्ट सिटी जैसी परियोजनाओं को गतिशील करना होगा।
ब्लूमबर्ग का 2020 के लिए विकास संबंधी अध्ययन आर्थिक विकास में गिरावट का संकेत दे रहा है। ऐसे में ऋण बाजार के दबाव को दूर करना सरकार और रिजर्व बैंक के एजेंडे में होना चाहिए। रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में कटौती कर अर्थव्यवस्था में नकदी का प्रवाह बढ़ाने की जरूरत है। रोजगार भी नई सरकार के लिए निश्चित रूप से एक चुनौती होगा।

मनरेगा के अलावा स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए मुद्रा योजना को और गतिशील करना होगा और कौशल प्रशिक्षण को ऊंचाइयां देनी होंगी। कृषि कल्याण के लिए नए कदम उठाने होंगे। निजी क्षेत्र को कृषि के साथ जोड़ने के साथ खाद्य प्रसंस्करण का दायरा बढ़ाना होगा और पेट्रो उत्पादों को जीएसटी के दायरे में लाना होगा।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी सरकार के लिए चुनौती है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंध कड़ा किए जाने से वैश्विक तेल बाजार का संतुलन गड़बड़ा गया है और कीमतें सात महीने के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं। ऐसे में, सरकार को बाजार और नए विकल्प तलाशने होंगे। अमेरिका और चीन के बीच गहराते ट्रेड वार के बीच अमेरिका द्वारा भारत पर भी आयात शुल्क बढ़ाए जाने की आशंका है। भारत से सबसे अधिक निर्यात अमेरिका को होता है, अतः प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ अपने अच्छे संबंधों का उपयोग करते हुए एक अच्छा समाधान निकाला जाना चाहिए।

उम्मीद करनी चाहिए कि इस ऐतिहासिक जनादेश से चुनी गई नरेंद्र मोदी की सरकार नई आर्थिक चुनौतियों का रणनीतिपूर्वक मुकाबला कर देश को विकास और खुशहाली की डगर पर आगे बढ़ाने में कामयाब होगी।
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