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उपभोक्ताओं के हित में : 21 दिन के भीतर उसकी शिकायत स्वत: दर्ज हो जाएगी

जयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 21 Aug 2019 01:01 AM IST
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Loksabha - फोटो : a
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हाल ही में संसद ने उपभोक्ता अधिकारों के संरक्षण के उद्देश्य से उपभोक्ता संरक्षण विधेयक, 2019 को मंजूरी दी है। इसका मकसद उपभोक्ताओं को अनुचित व्यापार व्यवहारों से होने वाले नुकसान से बचाना और व्यवस्था को सरल बनाना है। इसमें विवाद की न्याय प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है। अब कोई भी उपभोक्ता शिकायत कर सकता है और 21 दिन के भीतर उसकी शिकायत स्वत: दर्ज हो जाएगी।
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नए उपभोक्ता संरक्षण विधेयक के तहत पहली बार उपभोक्ताओं की शिकायतों की सुनवाई और निपटारे के लिए नियामक बनाने का प्रस्ताव किया गया है। अब उपभोक्ता पांच प्रमुख अधिकारों से सशक्त बनेंगे। उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण को तलाशी और जब्ती के अधिकार होंगे। खराब सामान बेचने पर विक्रेता और निर्माता, दोनों पर जुर्माने और पांच साल तक की सजा के प्रावधान लागू होंगे। अब शिकायतों की सुनवाई शीघ्र होगी।
भ्रामक विज्ञापन पर जेल और जुर्माना, दोनों संभव होंगे। उल्लेखनीय है कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 1986 उपभोक्ताओं के संरक्षण और उपभोक्ता विवादों के समाधान के लिए अधिनियमित किया गया था। पर इसमें कई कमियां थीं। उसके बाद से वस्तु एवं सेवाओं के उपभोक्ता बाजारों में भारी परिवर्तन आया है। विज्ञापन, टेलीमार्केटिंग, बहुस्तरीय विपणन, सीधे विक्रय और ई-वाणिज्य ने नई चुनौतियां पेश की हैं।
ऐसे में उपभोक्ताओं को क्षति से बचाने के लिए समुचित और शीघ्र हस्तक्षेप की जरूरत अनुभव की जा रही थी। भारत में ई-कॉमर्स बाजार सालाना 32 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है। निस्संदेह ई-कॉमर्स ने देश में खुदरा कारोबार में क्रांति ला दी है। देश में इंटरनेट के उपयोगकर्ताओं की संख्या 60 करोड़ से भी अधिक होने के कारण ई-कॉमर्स की रफ्तार तेजी से बढ़ रही है।
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