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रंगों में जीवन

हरेकृष्ण उपाध्याय Updated Sat, 07 Dec 2013 10:22 PM IST
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many colours in the life
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रंगों में जीवन
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कई बार चीजों को हम
उनके रंगों से याद रखते हैं
रंगों को कई बार हम
रंग की तरह नहीं फूल, चिड़िया या स्त्री की तरह देखते हैं
रंगों की दुनिया इतनी विविध, इतनी विशाल, इतनी रोचक है कि
कई बार हमें लगा है कि
हम आदमी से नहीं रंगों से करते हैं प्यार
रंगों से ही नफरत
कुछ रंग इतने प्यारे कि
हम उन्हें पोशाक की तरह पहनना
चाहते हैं
कुछ लोगों की कुछ रंगों से नफरत भी ऐसी ही
हम हर रंग को फूल की तरह देखें
अपने पसंदीदा फूल की तरह
तो कम हो कुछ रंग भेद - मुझे ऐसा
लगता है कि
रंग को हम सिर्फ फूल की तरह देखें तो हर रंग से हो जाए धीरे-धीरे प्यार
ढेर सारे रंगों से कर-करके प्यार
बनाया जाए एक विविधवर्णी संसार...

-हरेकृष्ण उपाध्याय
इनके शब्द हमारे समय में कविता की संभावना को आगे बढ़ाते हैं। लखनऊ में रहते हैं।
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