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अब नए सुधारों की उम्मीद

jayantilal bhandariजयंतीलाल भंडारी Updated Wed, 16 Jan 2019 07:46 PM IST
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जयंतीलाल भंडारी
जयंतीलाल भंडारी
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इस समय जहां देश के आयकरदाता आयकर में छूट की अपेक्षा कर रहे हैं, वहीं जीएसटी के और अधिक सरलीकरण की अपेक्षा भी की जा रही है। वित्त मंत्री अरुण जेटली एक फरवरी को अंतरिम बजट पेश करेंगे, क्योंकि मई में आम चुनाव होने हैं। ऐसे में करदाता करमुक्त आय की वर्तमान सीमा 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की अपेक्षा कर रहे हैं। यह अपेक्षा भी है कि आयकर की 30 फीसदी वाली सबसे ऊंची दर, सालाना 20 लाख रुपये से ऊपर की आमदनी वालों पर ही लागू हो और आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत बचत की सीमा 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर तीन लाख रुपये की जाए। इसी तरह सभी कंपनियों के लिए कॉरपोरेट टैक्स की दर 30 से 25 फीसदी के स्तर पर लाई जाए।
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जीएसटी के और अधिक सरलीकरण की अपेक्षाएं भी हैं। 10 जनवरी को जीएसटी परिषद की बैठक में सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को बड़ी राहत दी गई है। अब करीब 20 लाख एमएसएमई अगले वित्त वर्ष 2019-20 से जीएसटी के दायरे के बाहर होने के पात्र हो जाएंगे। जीएसटी परिषद ने जीएसटी से छूट की सीमा को बढ़ाकर दोगुना कर दिया है। यानी अब 40 लाख रुपये तक के सालाना कारोबार वाले उद्यमों को जीएसटी पंजीकरण कराने की जरूरत नहीं होगी।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि टैक्स सुधारों से आर्थिक चुनौतियों के बावजूद 2018 की तुलना में 2019 में देश का आर्थिक परिदृश्य बेहतर होगा, जिससे विकास दर 7.5 फीसदी से अधिक हो सकती है। 2019 में भी भारत सबसे तेज अर्थव्यवस्था बना रहेगा। गौरतलब है कि विभिन्न आर्थिक अध्ययन रिपोर्टों से यह बात उभरकर सामने आ रही है कि जीएसटी भारत के लिए लाभप्रद है, लेकिन उपयुक्त क्रियान्वयन के अभाव में इसका लाभ अर्थव्यवस्था को पर्याप्त रूप में नहीं मिल पाया। जीएसटी लागू होने के बाद वस्तुओं की ढुलाई सुगम हुई और टैक्स भी एक समान हुए। जीएसटी को कारगर बनाने के लिए 28 फीसदी की श्रेणी खत्म की जानी चाहिए और 12 और 18 फीसदी की दर का विलय कर एकल मानक दर की जानी चाहिए।
 
वर्ष 2019 में जीएसटी सरलीकरण के बाद उद्योग-कारोबार और प्रतिस्पर्धा के क्षेत्रों में भारत की कई उपलब्धियां रेखांकित होती हुई दिखाई दे सकती हैं। विश्व बैंक की कारोबारी सुगमता रिपोर्ट 2018 में भारत को 190 देशों की सूची में 77वां स्थान दिया गया। यह रैंकिंग रिपोर्ट 2019 में बढ़ सकती है।
 
यह विडंबना ही है कि वेतनभोगी वर्ग को छोड़कर अन्य वर्गों के लोग अच्छी कमाई रखते हुए भी आयकर नहीं देते हैं। यद्यपि नोटबंदी से अर्थव्यवस्था में कुछ मुश्किलें बढ़ी, लेकिन आयकरदाताओं की संख्या बढ़ी। जिस तरह मैक्सिको ने डिजिटल कर प्रशासन अपनाकर कर के अनुपालन में ऊंची सफलता प्राप्त की है, उसी तरह भारत में डिजिटल कर प्रशासन और इलेक्ट्रॉनिक तरीके से लेन-देन का विस्तृत ब्योरा दर्ज होने से अच्छा कर प्रशासन दिखाई दे सकेगा। निश्चित रूप से कर अधिकारियों को अपना काम करने के लिए सूचना तकनीक के अधिकाधिक इस्तेमाल की जरूरत है। ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि करदाताओं को कर अधिकारियों से न मिलना पड़े। विभाग से किसी भी तरह के सवाल-जवाब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हो सकते हैं। कंप्यूटर का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल हो, ताकि भ्रष्टाचार में कमी आए।

उम्मीद है कि सरकार एक प्रभावी जीएसटी कर प्रणाली के तहत कर व्यवस्था सरल और पारदर्शी बनाएगी और प्रत्यक्ष कर संहिता के तहत वेतनभोगी तथा छोटे आयकरदाताओं को राहत देगी और कर संग्रह की लागत कम करने के बारे में विचार करेगी। इससे देश की अर्थव्यवस्था विकसित देशों की अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले खड़ी हो सकती है।
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