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बदलेगी आर्थिक तस्वीर : अब जम्मू-कश्मीर का विकास भी दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसा होगा

जयंतीलाल भंडारी Updated Thu, 08 Aug 2019 01:21 AM IST
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अनुच्छेद 370 के हटने के बाद तैनात सेना के जवान
अनुच्छेद 370 के हटने के बाद तैनात सेना के जवान - फोटो : अमर उजाला
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कल तक यह कहा जाता रहा है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के कारण विकास की संभावनाएं धरातल पर नहीं आ पा रही थीं। अब अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद जम्मू-कश्मीर के आर्थिक विकास का परिदृश्य उभरकर दिखाई दे रहा है। देश और दुनिया के अर्थविशेषज्ञ यह कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि अब जम्मू-कश्मीर का विकास भी दिल्ली, नोएडा और चंडीगढ़ जैसा होगा।
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यदि हम अर्थव्यवस्था के आंकड़ों को देखें, तो पाते हैं कि जम्मू-कश्मीर की विकास दर धीमी गति से बढ़ी है। पिछले वर्ष 2018-19 में जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था की विकास दर 6.9 प्रतिशत रही थी। जबकि यह 2017-18 में 8.5 प्रतिशत रही थी। कृषि क्षेत्र में 2018-19 में 6.8 प्रतिशत की वृद्धि रही। मैन्यूफैक्चरिंग, बिजली, जल आपूर्ति, निर्माण और खनन क्षेत्र में छह प्रतिशत की वृद्धि रही। सेवा क्षेत्र जम्मू-कश्मीर राज्य की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण रूप से योगदान प्रदान करता है।
इसमें व्यापार, पर्यटन, रियल एस्टेट, ब्रॉडकास्टिंग और वित्तीय सेवाएं शामिल हैं। वर्ष 2018-19 में इस क्षेत्र का योगदान 56 प्रतिशत रहा था। वास्तव में जम्मू-कश्मीर की सबसे बड़ी चुनौती राजस्व की प्राप्ति से संबंधित रही है। इसका सबसे प्रमुख कारण इसका केंद्रीय संसाधनों पर निर्भर होना रहा है।
जम्मू-कश्मीर के कुल राजस्व का 50 प्रतिशत भाग अनुदान के तौर पर केंद्र से आता रहा है। ऐसे में अब अनुच्छेद 370 के निष्प्रभावी होने के बाद राजस्व के नए साधनों से जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकेगी।
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