जब 'थलाइवर' और 'नम्मावर' मिलेंगे तो सिनेमा के प्रभुत्व के एक नए दौर का गवाह बनेगा तमिलनाडु

bhaskar saiभास्कर साई Updated Tue, 26 Nov 2019 07:07 AM IST
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When 'Thalaivar' and 'Nammawar' meet

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टीएन सिर्फ तमिलनाडु का संक्षिप्त रूप नहीं है, बल्कि इसका अर्थ 'टिंसेल नाडु' (तड़क-भड़क वाली जगह) भी होता है। इस राज्य की सियासत में सिनेमा का इतना जबर्दस्त प्रभाव है कि कॉलीवुड ने अब तक इस राज्य को पांच मुख्यमंत्री दिए हैं- सी एन अन्नादुरई, एम करुणानिधि, एम जी रामचंद्रन, वी एन जानकी और जे जयललिता। इनमें से शुरू के दो जहां पटकथा लेखक थे, वहीं बाकी के तीन अभिनेता व अभिनेत्री थीं। दक्षिण के फिल्म उद्योग के दो शीर्ष सितारे रजनीकांत और कमल हासन के पूर्णकालिक राजनीति में आने के एलान के बाद तमिलनाडु सिनेमा के प्रभुत्व के एक नए दौर का गवाह बनने जा रहा है।
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कमल हासन ने अपनी पार्टी 'मक्कल निधि मय्यम' की स्थापना की है, वहीं रजनीकांत ने कुछ महीने पहले ही जमीनी कार्य शुरू कर दिया था, हालांकि दोनों अब भी फिल्मों में काम कर रहे हैं। लेकिन ऐसा लंबे समय तक नहीं चल सकता, क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि 2021 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से पहले ये दोनों फिल्मों को अलविदा कह सकते हैं। दोनों सितारों ने हाल ही में कहा है कि 'तमिलनाडु के कल्याण के लिए जरूरत पड़ने पर हाथ भी मिला सकते हैं।  
इसकी शुरुआत हुई पिछले हफ्ते रजनीकांत के उस बयान से जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पलानीस्वामी के मुख्यमंत्री बनने पर हैरत हुई थी, जिसका कमल हासन ने समर्थन किया। कमल ने कहा, 'रजनी की टिप्पणी आलोचना नहीं, हकीकत है।'  कुछ घंटे बाद ही पत्रकारों से सवाल पूछने पर सुपरस्टार रजनीकांत ने भी यही बात दोहराई और कहा, यदि ऐसी परिस्थितियां बनती हैं, जिसमें मुझे और कमल को तमिलनाडु के लोगों के कल्याण के लिए हाथ मिलाना पड़ता है, तो हम निश्चित रूप से एक साथ आएंगे। रजनीकांत ने दिसंबर, 2017 में एलान किया था कि वह अपनी राजनीतिक पार्टी का गठन करेंगे और आगामी विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे।
इसके बाद 'रजनी मक्कल मंदरम' तले तमिलनाडु भर में फैले उनके फैन क्लब एकजुट हो गए और वे इसके जरिये झीलों की सफाई से लेकर गर्मियों में घर-घर पानी पहुंचाने जैसे कल्याणकारी काम कर रहे हैं। कमल हासन के फिल्म उद्योग में 60 वर्ष पूरे करने के मौके पर हुए एक कार्यक्रम में रजनीकांत ने कहा था कि पलानीस्वामी का तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनना एक चमत्कार था। उन्होंने कहा, 'यहां तक कि खुद पलानीस्वामी ने सपने में भी नहीं सोचा था कि वह कुछ वर्ष में मुख्यमंत्री बन जाएंगे। और जब वह मुख्यमंत्री बने तो हर कोई यही सोच रहा था कि उनकी सरकार कुछ महीने भी नहीं चल पाएगी। लेकिन वह दो साल से सरकार चला रहे हैं। यानी चमत्कार हुआ, चमत्कार हो रहा है और चमत्कार होते रहेंगे।'

राज्य के अनेक वरिष्ठ मंत्रियों ने इन टिप्पणियों की आलोचना की। इनमें पलानीस्वामी का समर्थन करने वाले उपमुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेलवम भी शामिल हैं और उन्होंने कहा कि वह चमत्कार के कारण नहीं, बल्कि कठोर परिश्रम और गंभीरता के कारण मुख्यमंत्री बने। लेकिन सबसे चुभने वाली टिप्पणी शुक्रवार को शाम को सामने आई। गोवा में चल रहे अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में आइकॉन ऑफ गोल्डन जुबली अवार्ड से सम्मानित होने के बाद चेन्नई पहुंचे रजनीकांत को पत्रकारों ने फिर घेरा और उनसे उनके 'चमत्कार' वाले बयान के बारे में पूछा। इस पर उन्होंने कहा, 'तमिलनाडु के लोग 2021 के विधानसभा चुनाव में निश्चित रूप से चमत्कार करेंगे।' कहने की जरूरत नहीं कि रजनीकांत ने राज्य के शीर्ष पद को लेकर अपनी महत्वाकांक्षा जाहिर कर दी है।

उनके इतना कहने के तुरंत बाद जवाब मुख्यमंत्री पलानीस्वामी की ओर से आया। उन्होंने कटाक्ष किया, 'रजनीकांत जिस चमत्कार की बात कर रहे हैं, वह 2021 में अन्नाद्रमुक के भारी बहुमत के साथ दोबारा सत्ता में आने को लेकर है... पहले वह सियासत में आ तो जाएं।' रजनीकांत और कमल हासन के संभावित सियासी गठजोड़ को लेकर दिए गए बयानों के बाद सत्तारूढ़ अन्नाद्रमुक के मुखपत्र नमाधु अम्मा में उनके खिलाफ कई आलेख प्रकाशित हुए हैं। अन्नाद्रमुक ही नहीं, बल्कि उसकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी एम के स्टालिन की अगुआई वाली द्रमुक में भी रजनीकांत और कमल हासन के साथ आने को लेकर घबराहट है। द्रमुक के मुखपत्र मुरासोली ने भी इन दो सितारों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की आलोचना करते हुए आलेख प्रकाशित किए हैं।

इसकी वजह साफ है और वह है, रजनीकांत और कमल हासन की लोकप्रियता। रजनी को उनके लाखों प्रशंसक थलाइवर (नेता) के रूप में सम्मान देते हैं और हर आयु वर्ग तथा आर्थिक तबके में उनके समर्थक मौजूद हैं। वहीं अपने समर्थकों के लिए कमल नम्मावर ( हमारा आदमी) हैं और पढ़े-लिखे और कुलीन तबके में उनकी अच्छी पैठ है। संयोग से रजनीकांत की एक आगामी फिल्म का नाम थलाइवर है और नम्मावर नाम से 1994 में कमल हासन की एक फिल्म आ चुकी है। डीएमके या द्रमुक की स्थापना अन्नादुरई ने की थी और कुछ वर्ष पहले तक करुणानिधि उसके प्रमुख थे। ये दोनों तमिल सिनेमा के प्रतिष्ठित पटकथा लेखक थे। वहीं अन्नाद्रमुक का गठन एमजी रामचंद्रन (एमजीआर) ने किया था, जिसे जयललिता ने पल्लवित किया और ये दोनों तमिल सिनेमा का सितारा थे। लिहाजा द्रमुक और अन्नाद्रमुक के लोग बखूबी जानते हैं कि फिल्मी लोकप्रियता का मतलब क्या है और कैसे वह वोट में तब्दील होती है। इसी वजह से द्रविड़ राजनीति के दिग्गज रजनी और कमल के राजनीतिक प्रवेश को लेकर असहज हैं।

लोकसभा चुनाव में कमल की पार्टी को राज्य में चार फीसदी वोट मिले थे। यदि रजनी के साथ उनका गठबंधन हो जाता है, तो राजनीतिक पंडितों के मुताबिक यह अन्नाद्रमुक, द्रमुक और अन्य पार्टियों के लिए घातक साबित हो सकता है। हालांकि इन दोनों अभिनेताओं के प्रशंसक उनके एक साथ आने को लेकर बहुत सहज नहीं हैं। कहा जाता है कि इन दोनों ने वर्षों पहले तय किया था कि वे परदे में एक साथ नजर नहीं आएंगे ताकि दोनों का करिअर प्रभावित न हो। चार दशकों से दोनों मित्र हैं और मतभेदों के बावजूद सियासत में एक साथ आना चाहते हैं, जहां न तो स्थायी दोस्ती की कोई जगह है और न ही शालीनता की।
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