जब घड़ियां बंद पड़ी थीं

कैलाश्ा वाजपेयी/वरिष्ठ कवि, चिंतक Updated Sun, 12 Jan 2014 12:59 AM IST
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When watches were closed
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अब तक के सारे लिखित इतिहास को पढ़कर लगता है कि आदमी हमेशा से अदृश्य के प्रति उत्सुक रहा है। आदमी की दिलचस्पी हमेशा से इस तथ्य के आस-पास मंडराती रही है कि अज्ञानता को थाहने का क्या कोई सुनिश्चित ढंग भी हो सकता है? या यह जानने में कि वह कौन सी शक्ति है जिसकी वजह से श्राप या वरदान फलित होता है।
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बात सन् 1975 की है। मैक्सिको के एक चैनल पर लगातार घोषणा हो रही थी कि रविवार को एक यूरी गैलर नामक नवयुवक दूरदर्शन पर अपनी अदृश्य शक्ति का प्रदर्शन करेगा। इससे पहले हम यूरी गैलर के बारे में ‘टाइम’ पत्रिका के विशिष्ट पन्ने में एक लेख पढ़ चुके थे, जिसमें कहा गया था कि यूरी गैलर एक यहूदी युवा है, जिसने यूरोप, अमेरिका और कनाडा के कई नगरों में, अपनी धारणा और ध्यान शक्ति से लोगों को हैरत में डाल दिया है, लेख में ये वाक्य भी मुद्रित थे कि यूरी गैलर मन की भाषा पढ़ना भी जानता है और बिना किसी प्रकार का आवरण ओढ़े वह सामान्य परिस्थितियों में कुछ ऐसा कर दिखाता है जिसका जवाब वैज्ञानिकों के पास भी नहीं है। निर्धारित संध्या को यूरी गैलर दूरदर्शन के पर्दे पर प्रकट हुआ।
लंबी नाक, घने केश के साथ यूरी गैलर को सुंदर, असुंदर जैसे विशेषणों से अलग, आकर्षक तो कहा ही जा सकता था। यूरी गैलर ने सभी दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा, ‘आप सभी लोग अपनी-अपनी घड़ियां जो खराब पड़ी हुई हैं, उन्हें लेकर दूरदर्शन यंत्र के सामने ले आएं। उसने दर्शकों से यह भी कहा कि वे टूटी हुई घड़ियां न लाएं सिर्फ वे घड़ियां लाएं, जो पुरानी और मशीन मैली होने के कारण बंद पड़ी हैं। इस बीच वह पांच मिनट तक लगातार बातें करता रहा। ऐसा शायद इसलिए कि वह चाहता था कि इस बीच दर्शकों को अपनी घड़ियां निकालकर टीवी के सामने आ बैठने का मौका मिल जाए।
इसके बाद यूरी गैलर ने दर्शकों से प्रार्थना की कि वे उसके ही साथ मन में यह दोहराएं कि उनकी बंद घड़ी चल जाए। यूरी गैलर ने स्टूडियो की मेज पर घड़ियां लाकर रखने का सुझाव दिया, जिनमें दीवार, मेजघड़ी और छोटी-छोटी दसियों कलाई पर बांधी जाने वाली घड़ियां शामिल थीं। इसके बाद यूरी गैलर ने अपनी दोनों आंखें उन हाथघड़ियों पर गड़ा दीं। हमने भी किया। घड़ी, टीवी के सामने रख दी। लगभग पांच मिनट तक यूरी गैलर स्टूडियो के भीतर रखी उन घड़ियों को देखता रहा। पांच मिनट के बाद यूरी गैलर ने घोषणा की कि स्टूूडियो की मेज पर रखी सारी घड़ियां चल पड़ी हैं। जिस समय यूरी गैलर यह घोषणा कर रहा था, हमारे आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब हमने देखा कि हमारी सिर्फ एक बची सुई वाली घड़ी भी एकाएक चल पड़ी है।

दूसरे दिन हमने भारतीय दूतावास के अपने मित्र श्री सिंह से प्रार्थना की कि हमें यूरी गैलर से मिलवाने की युक्ति करें। उसी दिन यूरी से उसी शाम मैक्सिको के रेस्त्रां वेजीतेरियानो में मुलाकात का समय तय हुआ। मेक्सिको में हमारे पब्लिशर डॉ. लुइस मुनीस की पत्नी गेल यहूदी हैं। यह सोचकर कि हो सकता है यूरी के लिए कोई भाषाई बाधा हो, हमने गेल को भी बुला लिया। यूरी गैलर ने बताया उसे खुद नहीं मालूम कि वह कैसे ऐसा कर पाता है। उसने कहा- ‘जब मैं बड़ा हो रहा था तब एक बार खाने की मेज पर बैठे-बैठे एक चम्मच को अपलक नेत्रों से देखता रहा। भोजन तब तक परोसा नहीं गया था। जिस चम्मच को मैं देख रहा था। वह थोड़ी देर में टेढ़ी होने लगी। मैं घबरा गया फिर मुझे डर की जगह उत्सुकता यानी कौतूहल ने घेर लिया।

अब मैंने दूसरे चम्मच की डंडी पर अपनी निगाहें गड़ा दीं। आश्चर्य कि दूसरे चम्मच की डंडी के साथ भी यही हुआ। इसके बाद मुझे विश्वास हो गया कि मेरी दृष्टि या निगाहों में कोई खास बात है। गेल के पति डॉ.लुइस मुनीस क्योंकि हमारी दो पुस्तकों के प्रकाशक हैं, इसलिए गेल ने हमारे विषय में जो भी जानकारी संक्षेप में हो सकती थी। सबकी सब, यहूदी भाषा में यूरी गैलर को दी। यूरी गैलर से हमने जब कुरुक्षेत्र में चलने वाले युद्ध का विवरण देने वाले संजय के विषय में बताया तब उत्तर में यूरी ने कहा, 'न तो मैं कोई साधक हूं न दिव्यदृष्टा।'

मुझे तो जब यह विश्वास हो गया तब हिम्मत करके मैंने सार्वजनिक प्रदर्शन शुरू किए। जब यूरी गैलर की इस क्षमता विशेष के बारे में अखबारों में खबर छपी तब टेडवास्तीन नामक एक वैज्ञानिक ने चुनौती भेजी। नतीजा यह कि यूरी ने एक नहीं कई वैज्ञानिकों के समक्ष बैठकर, बगल के कमरे में बनाए जा रहे एक रेखाचित्र को हूबहू कागज पर उतार दिया। बात यहां तक बढ़ी कि यूरी गैलर के रक्त और मस्तिष्क में पाए जाने वाले द्रव्य का परीक्षण किया गया। जो परिणाम सामने आए, यूरी ने बताया कि उन्हें गुप्त रखा गया है।
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