बाढ़ में क्यों डूब गया पटना, आने वाले दिन और ज्यादा भयावह होने वाले हैं

पंकज चतुर्वेदी Updated Tue, 08 Oct 2019 07:03 AM IST
विज्ञापन
Flood in Bihar
Flood in Bihar - फोटो : Amar Ujala

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹249 + Free Coupon worth ₹200

ख़बर सुनें
कह सकते हैं कि इस बार बरसात ज्यादा हो गई, लेकिन यह कहना ठीक नहीं होगा कि इसी कारण पटना शहर का अधिकांश हिस्सा दस दिनों तक पानी में डूबा रहा। यह भी जान लें कि भले ही पंप लगाकर आवासीय क्षेत्रों से पानी निकाला गया, पर इस महानगर के आने वाले दिन बाढ़ के पानी की त्रासदी से भी ज्यादा भयावह होने वाले हैं।
विज्ञापन

जिस शहर ने गंगा जैसी नदी को हड़प लिया, जहां दशकों से कूड़े का माकूल निस्तारण न कर उसे शहर की सीवर लाइनों में दबाया जा रहा हो, जहां चार हजार करोड़ से ज्यादा के सालाना बजट वाला स्थानीय निकाय हो और उसके पास शहर के ड्रैनेज सिस्टम का नक्शा तक न हो, वहां ऐसे जल प्लावन पर आश्चर्य नहीं होना चाहिए। हां, इस बात पर क्षोभ जरूर होना चाहिए कि शिक्षा, संस्कृति, धर्म और आध्यात्म, साहित्य और विज्ञान में कभी दुनिया को राह दिखाने वाले शहर के लोग इस खतरे से अनभिज्ञ या बहुत कुछ उसे न्यौता देने वाले कैसे बन गए।
स्मार्ट सिटी परियोजना में शामिल पटना शहर देश का ऐसा पांचवां शहर है, जो सबसे तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2001 से 2011 के बीच शहर की आबादी 24 फीसदी बढ़ी और अनुमान है कि उसके बाद के आठ वर्षो में इसका विस्तार तीस फीसदी की दर से हुआ। पटना कई नदियों से घिरा हुआ है- गंगा के विशाल विस्तार के किनारे तो यह शहर बसा ही है, इसके एक ओर पुनपुन है, तो सोन नदी भी कुछ दूर गंगा में मिलती है। जाहिर है कि बढ़ती आबादी को समाने के लिए जगह भी चाहिए थी।
विज्ञापन
आगे पढ़ें

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us