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भारत को क्रिकेट वर्ल्ड कप जिताने वाले कप्तान को अब है नौकरी की तलाश

इंदु पांडे, बीबीसी हिंदी/ नई दिल्ली Updated Thu, 09 Feb 2017 05:52 PM IST
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शेखर नाइक
शेखर नाइक - फोटो : Facebook
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क्या पद्मश्री अवॉर्ड के लिए चुना गया कोई व्यक्ति एक अदद नौकरी का भी तलबगार हो सकता है। शेखर नाइक के साथ कुछ ऐसा ही मामला है। शेखर नाइक भारतीय नेत्रहीन क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान हैं।
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विडंबना है कि वो भारतीय क्रिकेट के कैप्टन विराट कोहली के साथ पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित किए जाएंगे लेकिन वो फिलहाल बस एक नौकरी चाहते हैं। शेखर इसे एक सम्मान का मौका तो मानते हैं पर कहते हैं कि अगर एक नौकरी मिल जाती तो वो ब्लाइंड क्रिकेट की लिए और भी बहुत कुछ कर सकता हैं।
बचपन से ही आंखों की रोशनी से वंचित शेखर नाइक असल जिंदगी के भी नायक हैं। कर्नाटक के एक छोटे से जिले शिमोगा में पैदा हुए शेखर बचपन से ही नेत्रहीन हैं। ये उनके परिवार की आनुवांशिक बीमारी थी।
ग्यारह साल की उम्र में पहली कक्षा में दाख़िला लेने के समय से ही उन्होंने क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। अपने स्कूल के लिए शेखर ने स्टेट लेवल टूर्नामेंट खेला। ये सब बहुत मुश्किल रहा शेखर नाइक के लिए।
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