बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
INSTALL APP

अमर उजाला संवाद : अभिभावक बोले-फीस में राहत मिले, रिजर्व फंड इस्तेमाल हो

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 15 Jun 2020 12:47 PM IST
विज्ञापन
रुपये
रुपये - फोटो : pixabay

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

ख़बर सुनें
कोरोना के खौफ के बीच तीन महीने से स्कूल बंद पड़े हैं। अभिभावकों और स्कूल संचालकों के बीच फीस को लेकर रस्साकसी चल रही है। इस हालात पर अमर उजाला ने वेबिनार आयोजित किया। स्कूल और अभिभावक एक मंच पर आए। एक ओर जहां अभिभावकों ने मांग की कि तीन माह की फीस माफ की जाए। रिजर्व फंड से पैसा खर्च किया जाए। दूसरी ओर स्कूल पक्ष ने इस फंड को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि जो अभिभावक सक्षम हैं, अगर वह भी फीस देने को सामने आएंगे तो समस्या का हल निकल जाएगा। 
विज्ञापन


रविवार को हुए वेबिनार में प्रिंसिपल प्रोगेसिव स्कूल्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष एवं दून इंटरनेशनल के चेयरमैन डीएस मान, हाईकोर्ट में फीस माफी के लिए याचिका दायर करने वाले कुंवर जपिंदर सिंह, नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स एंड स्टूडेंट्स राइट्स के राष्ट्रीय अध्यक्ष आरिफ खान, उत्तराखंड अभिभावक संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंघल, दून ग्लोबल स्कूल के चेयरमैन अंकित अग्रवाल, द एशियन स्कूल के एकेडमिक डायरेक्टर एवीडी थपलियाल और सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार शामिल हुए।


एक ओर जहां पैरेंट्स एसोसिएशन ने अभिभावकों के नजरिए से अपना पक्ष रखा तो दूसरी ओर स्कूल एसोसिएशन ने अपनी परेशानियां और चुनौतियां सामने रखीं। अहम बात यह भी है कि ऐसे हालात में स्कूल खोलने को न तो अभिभावक तैयार दिखे और न स्कूल संचालक। सभी का कहना था कि पहले कोरोना का संकट खत्म हो जाए तो ही बच्चों को स्कूल भेजना मुनासिब होगा।

फीस एक्ट आएगा तो सुधर जाएंगी समस्याएं

सामाजिक कार्यकर्ता कुंवर जपिंदर सिंह ने कहा कि अगर फीस एक्ट आ जाएगा तो निश्चिततौर पर काफी समस्याओं का हल हो जाएगा। जिस तरह के हालात उत्पन्न हो रहे हैं उसमें फीस एक्ट का आना बहुत जरूरी है। उत्तराखंड अभिभावक संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंघल ने भी फीस एक्ट की पैरवी की।

स्कूल अपने कॉशन मनी और एफडी से चलाएं खर्च

अभिभावकों का यह भी कहना था कि स्कूल इस मुश्किल हालात में अपने कॉशन मनी और एफडी से काम चलाएं। हर बच्चे की एक कॉशन मनी हर स्कूल में दाखिले के वक्त जमा होती है। स्कूल चाहेंगे तो अभिभावकों से फीस मांगने की बजाय शिक्षकों के वेतन आदि खर्च इस फंड से निकाल सकते हैं। उत्तराखंड अभिभावक संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंघल ने कहा कि अगर स्कूल रोजाना 40 मिनट की क्लास ऑनलाइन दे रहे हैं तो उसी हिसाब से फीस लें। न कि रोजाना आठ घंटे के हिसाब से।

ऑनलाइन एजुकेशन टीवी आदि माध्यमों से हो

बंद स्कूल इन दिनों ऑनलाइन कक्षाएं चला रहे हैं। बच्चा दिनभर मोबाइल में उलझकर रह जा रहा है। नेशनल एसोसिएशन फॉर पैरेंट्स के अध्यक्ष आरिफ खान का कहना है कि वह इस एजुकेशन के विरोधी नहीं हैं लेकिन वर्तमान परिपेक्ष्य की बात करें तो बच्चों के लिए मुश्किल पैदा हो रही है। लिहाजा, ऑनलाइन एजुकेशन के विकल्प के तौर पर टीवी आदि माध्यम का इस्तेमाल किया जाए।

पैरेंट्स फीस नहीं देंगे तो कैसे चलेंगे स्कूल

प्रिंसिपल प्रोग्रेसिव स्कूल्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डीएस मान का कहना है कि अभिभावकों से हर माह जो फीस आती है उसका 75 प्रतिशत हिस्सा सीधे शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन में खर्च हो जाता है। शेष स्कूल के रख रखाव व अन्य खर्चों में जाता है। उनका कहना है ऐसे हालात में अगर अभिभावक फीस नहीं देंगे तो काम कैसे चलेगा। जो अभिभावक मजबूर हैं, नौकरी चली गई है, फीस देने में सक्षम नहीं हैं, हम उनकी पूरी फीस माफ करने को तैयार हैं लेकिन जो अभिभावक सरकारी नौकरी या अच्छे बिजनेस वाले हैं, वह तो फीस देने को सामने आएं। उन्होंने कहा कि स्कूल के पास इतने फंड्स नहीं होते कि वह दो-चार माह तक वेतन आदि खर्च वहन कर सकें। एशियन स्कूल के एकेडमिक डायरेक्टर एवीडी थपलियाल का कहना था कि तीन माह की फीस माफ करना समस्या का समाधान नहीं है। सभी को मिलजुलकर समाधान निकालना होगा।

जब तक कोरोना नहीं जाएगा, स्कूल कैसे खुलेंगे

वेबिनार में स्कूल खुलने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। दून ग्लोबल स्कूल के चेयरमैन अंकित अग्रवाल और एशियन स्कूल के एकेडमिक डायरेक्टर अनंत वीडी थपलियाल का कहना था कि स्कूलों में सोशल डिस्टेंसिंग जैसे नियमों का अनुपालन करना संभव नहीं है। लिहाजा, जब तक कोरोना खत्म नहीं होगा स्कूल चलाना मुश्किल काम है। इस मसले पर उत्तराखंड अभिभावक संघ के अध्यक्ष रामकुमार सिंघल का कहना है कि स्कूल में बच्चे की सुरक्षा की जिम्मेदारी न सरकार और न स्कूल ले सकता है। ऐसे में बच्चों की जान जोखिम में डालना कहीं की समझदारी नहीं है।

स्मार्ट क्लास की ओर जाना होगा

सामाजिक कार्यकर्ता अजय कुमार का कहना है कोरोना की लड़ाई लंबी है। ऐसे में हम सभी को सरकारी और निजी स्कूलों की स्मार्ट क्लास पर विचार करना होगा। अगर जरूरी लगे तो अक्तूबर के बाद हालात देखकर स्कूल खोलने पर विचार किया जाए। वह भी ऑड-ईवन के फार्मूले पर। यानी सप्ताह में आधे दिन एक नाम के बच्चे और आधे दिन दूसरे नाम के बच्चे स्कूल जाएं।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us