वनाग्नि से धधक रहे उत्तराखंड के जंगल, कई हेक्टेयर वन संपदा हुई खाक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गढ़वाल Updated Thu, 29 Mar 2018 09:47 PM IST
विज्ञापन
wildfire
wildfire - फोटो : amarujala

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
उत्तराखंड के जंगल धधक रहे हैं, जिससे रुद्रप्रयाग, चमोली, कर्णप्रयाग, श्रीनगर, कोटद्वार के कई हेक्टेयर जंगल खाक हो चुके हैं।
विज्ञापन

रुद्रप्रयाग में फायर सीजन के डेढ़ माह में जनपद में वनाग्नि की 20 से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें 15 हेक्टेयर से अधिक जंगल स्वाह हो गया। पिछले तीन दिनों से अगस्त्यमुनि और जखोली रेंज के कई क्षेत्रों में जंगल धधक रहे हैं। 15 फरवरी से शुरू फायर सीजन में वनाग्नि की घटनाओं में दिनोंदिन वृद्धि हो रही है। सर्दियों के सीजन में बारिश नहीं होने से मौसम शुष्क बना है, जिससे आग की चिंगारी कुछ ही देर में शोलों में तब्दील होकर वन क्षेत्र को स्वाह कर रही है। चीड़ के जंगलों की आग के भयावह होने के साथ ही कई जगहों पर बांज-बुराश के जंगल भी स्वाह हो चुके हैं। जनपद में वनाग्नि से बच्छणस्यूं पट्टी के क्वीली, पाटा के बांज-बुरांश के जंगलों से लेकर सौड़ी, गिवाला, सांदर, स्वीली, सेम, मेदनपुर, चंद्रापुरी, कंडारा, ओरिंग, अरखुंड, दानकोट, जाखणी, पठालीधार, स्यूंर, बांगर, बौंठा, तूना सहित जवाड़ी, भैंसगांव, लौंगा, सकलाणा, मुन्याघर के जंगल जलकर राख हो चुके हैं। उधर, केदारघाटी के कई गांवों के जंगलों में आग लगी हुई है, जिससे वातावरण में धुंध का गुबार फैल रहा है। वन प्रभाग के डीएफओ मयंक शेखर झा ने बताया कि अभी तक 15 हेक्टेयर से अधिक जंगल क्षेत्र जलकर राख हो चुका है।
चमोली में छह स्थानों पर धधक रहे जंगल
चमोली जिले में अभी तक केदारनाथ वन प्रभाग का 8.32 हेक्टेयर और बदरीनाथ वन प्रभाग का 12.62 हेक्टेयर वन क्षेत्र आग से स्वाह हो चुका है। बृहस्पतिवार को पिंडर, नंदप्रयाग और चमोली रेंज के अंतर्गत छह स्थानों पर जंगल सुलगते रहे। पिंडर रेंज के लोहाजंग के जंगलों की आग ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहुंच गई है। बदरीनाथ वन प्रभाग के कर्मी आग बुझाने के लिए मौके पर तो गए हैं, लेकिन आग की लपटें तेज होने से देर शाम तक भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका है। जिले में वनाग्नि पर प्रभावी रोक लगाने के लिए बदरीनाथ, केदारनाथ, अलकनंदा और नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क वन प्रभाग में एक सौ क्रू स्टेशन स्थापित किए गए हैं। 553 वाचरों की नियुक्ति की गई है, जो हर वक्त वनाग्नि की घटनाओं पर नजर रखे हुए हैं। केदारनाथ वन्य जीव प्रभाग के डीएफओ अमित कंवर का कहना है कि वनाग्नि पर प्रभावी रोक लगाने के पूरे प्रयास किए जा रहे हैं। इस बार रडार से आग की घटनाओं की त्वरित जानकारी मिल रही है, जिसके बाद मौके पर वन कर्मियों को भेजा जा रहा है। ग्रामीणों से भी वनों की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया गया है।

विगत पांच सालों में वनाग्नि का आंकड़ा----(आंकड़े हेक्टेयर में )
वर्ष बदरीनाथ केदारनाथ नंदा देवी अलकनंदा
2013 6.50 4.00 0.75 --
2014 39 46 5.00 0.50
2015 5.50 10.50 1.00 0.41
2016 166 231.75 9.50 68.20 
2017 26.80 18.00 1.50 11.30
2018 12.62 8. 32 -- -- (29 मार्च तक)

5 हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की भेंट चढ़े 
कर्णप्रयाग में जंगल की आग से निपटने के लिए प्रशासन वन पंचायतों, महिला और युवक मंगल दलों से भी सहयोग लेने की बात कह रहा है, इसके बाद भी कर्णप्रयाग, पोखरी, नारायणबगड़, थराली सहित आदिबदरी के आस पास के करीब 5 हेक्टेयर से अधिक जंगल आग की भेंट चढ़ चुके हैं। कर्णप्रयाग के एसडीएम केएन गोस्वामी ने बताया कि वनों को आग से बचाने के लिए तहसील की सभी वन पंचायतों को सक्रिय किया जा रहा है। इसके लिए निष्क्रय पड़ी करीब 120 वन पंचायतों के पुनर्गठन के आदेश राजस्व उपनिरीक्षकों को दिए गए हैं। साथ ही दावानल को एक आपदा के तौर पर लेते हुए आपदा प्रबंधन की तरह ही आग से जंगलों को बचाने के लिए प्रयास किए जाने की कार्रवाई की जा रही है।

फरवरी से ही आग की चपेट में हैं जंगल
श्रीनगर में सिविल सोयम वन क्षेत्र श्रीनगर में इस फायर सीजन में वनाग्नि की सात घटनाओं में 12 हेक्टेयर जंगल आग की भंट चढ़ चुका है। वन विभाग जंगलों की आग बुझाने के लिए झाड़ियों पर ही निर्भर हैं। इस वर्ष फरवरी माह से ही जंगल आग की चपेट में हैं। सिविल सोयम श्रीनगर वन क्षेत्राधिकारी राजेंद्र सिंह ने बताया कि अब तक उनके क्षेत्र में वनाग्नि की 7 घटनाएं हो चुकी हैं, जिसमें करीब 12 हेक्टेयर वन भूमि की संपदा को नुकसान पहुंचा। राजेंद्र सिंह ने बताया कि वनाग्नि पर काबू पाने के लिए फायर वाचर नियुक्त किए गए हैं। वनों की आग बुझाने के लिए ग्राम पंचायतों के सरपंचों से भी सहयोग लिया जाता है। ब्यूरो

लैंसडौन वन प्रभाग के 26 और केटीआर के 47 क्रू स्टेशन संवेदनशील
लैंसडौन वन प्रभाग के 38 और कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग के 66 फारेस्ट गार्डों के हड़ताल पर चले जाने से विभाग के लिए वनाग्नि को रोकना चुनौती बना हुआ है। लैंसडौन वन प्रभाग ने जंगल में आग को बचाने के लिए कोटद्वार रेंज, दुगड्डा, कोटड़ीढांग, लालढांग और लैंसडौन रेंज में 26 क्रू स्टेशन बनाए हैं। कालागढ़ टाइगर रिजर्व वन प्रभाग ने पाखरो रेंज, अदनाला, मैदावन, प्लेन, सोनानदी और मंदाल रेंज में 47 क्रू स्टेशनों की स्थापना की है, लेकिन, दोनों वन प्रभागों में 104 वन आरक्षियों के हड़ताल पर चले जाने से बीटों की जिम्मेदारी अब छोटे कर्मचारियों पर आ गई है। वन प्रभाग पहले से ही संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। कर्मचारियों के पास दस्ताने, जूते, फायर रैक, हेलमेट जैसा सामान भी नहीं है, उन्हें पेेड़ की टहनी तोड़कर उससे किसी प्रकार आग बुझानी पड़ती है। ऐसे में आग के भड़क जाने पर जंगल में आग पर काबू पाना मुश्किल हो सकता है। कोटद्वार रेंज अधिकारी एसपी कंडवाल ने बताया कि बीट अधिकारी अपनी बीट का जिम्मेदार अधिकारी होता है। ऐसे में जंगल को आग से बचाने की चुनौती है। वन दारोगा, डिप्टी रेंजर से लेकर रेंज अधिकारी तक वनों पर निगाह बनाए हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us

X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X