उत्तराखंड: जंगल की आग में आठ वर्ष का रिकॉर्ड ‘स्वाहा’, 2018 से सबसे अधिक आग की घटनाएं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 16 Jun 2018 08:49 PM IST
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बागेश्वर  जगलों  में  आग
बागेश्वर जगलों में आग - फोटो : ANI

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उत्तराखंड के जंगलों में लगी आग में पिछले आठ वर्ष का रिकॉर्ड ‘स्वाहा’ हो गया है। इस साल अभी तक प्रदेश में जंगल में आग की कुल 2151 घटनाएं हुईं, जिसमें 4480.04 हेक्टेयर जंगल को भारी नुकसान पहुंचा है।
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इससे पहले वर्ष 2016 में आग की 2074 घटनाओं में 4437.75 हेक्टेयर में फैली वन संपदा जलकर राख हो गई थी। हालांकि, प्रदेश में प्री मानसून की बारिश शुरू होने से जंगल की आग में कमी आई है। इससे सरकार और वन विभाग के अफसरों ने राहत की सांस ली है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2018 में गढ़वाल, कुमाऊं और शिवालिक रेंज के जंगलों में आग लगने की 2151 घटनाएं सामने आईं। इससे 4480.04 हेक्टेयर में फैली वन संपदा राख हो गई। जंगल में आग लगने की सबसे अधिक 970 घटनाएं गढ़वाल मंडल में हुईं और इससे 2533.05 हेक्टेयर जंगलों को नुकसान हुआ। जबकि, कुमाऊं रीजन में 641 घटनाओं में 1273.9 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। वन विभाग के मुताबिक, शिवालिक रेंज में आग की कुल 465 घटनाएं हुईं और इसमें 511 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा। इतना ही नहीं आग की घटनाओं से इस बार वन्य जीव अभ्यारण्य भी अछूते नहीं रहे। 
वर्ष 2018 में अब तक प्रदेश के वन्यजीव अभयारण्यों में आग लगने की 75 घटनाएं हुईं। इससे 161 हेक्टेयर जंगल जलकर स्वाहा हो गए। हालांकि, राहत की बात यह रही कि जंगल की आग से कोई जनहानि नहीं हुई। वन विभाग के अनुसार, जंगल में आग की घटनाओं से करीब 86 लाख रुपये की वन संपदा को नुकसान पहुंचा है। जंगलों में आग कई बार मानवीय गलतियों के चलते लगी, तो कई जगह अराजक तत्वों ने भी शरारतवश जंगलों में आग की घटनाओं को अंजाम दिया। इससे वन संपदा को नुकसान पहुंचा। ऐसे कुछ अराजक तत्वों के खिलाफ विभाग के अफसरों की ओर से केस दर्ज कराने के साथ कार्रवाई भी की गई। 

पिछले आठ वर्षों में जंगल की आग पर एक नजर 
वर्ष-घटनाएं-नुकसान (हेक्टेयर में)
2018-2151-4480.04  
2017-805-1244.64
2016-2074-4437.75
2015-412-701.61     
2014-515-930.33
2013-245-384.05
2012-1328-2823.09
2011-150-231.75
2010-789-1610.82

वर्ष 2018 में शीतकालीन वर्षा नहीं होने और मई में ड्राई स्पेल होने की वजह से जंगल में आग की घटनाएं बहुत ज्यादा हुईं। इसी तरह का मौसम वर्ष 2016 में भी बना था और तब भी आग की घटनाएं ज्यादा हुई थीं। जंगल में आग रोकने के लिए विभाग की ओर तमाम एहतियाती कदम उठाए गए हैं। 
- जयराज, प्रमुख वन संरक्षक/विभागाध्यक्ष
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