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#LadengeCoronaSe: दसवीं के छात्र ने तैयार की COVID-19 ट्रैकिंग की मोबाइल एप, सीएम ने की लांच

कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने एक मोबाइल एप (उत्तराखंड कोविड19 ट्रेकिंग सिस्टम) लांच की है। यह एप एक दसवीं कक्षा क...

27 मार्च 2020

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देहरादून

सोमवार, 30 मार्च 2020

हेल्पलाइन पर की मदद:

रोडवेज संविदा कर्मियों को सता रहा खाने-पीने का संकट, बसों का संचालन ठप होने से बढ़ी मुसीबत

माय सिटी रिपोर्टर देहरादून जहां देश दुनिया में कोरोना वायरस का खौफ सिर चढ़कर बोल रहा है और केंद्र व राज्य सरकार की ओर से 21 दिन का लाकडाउन लागू किया गया है वहीं रोडवेज में तैनात हजारों संविदा कर्मचारियों को खाने-पीने का संकट खड़ा होने का डर सताने लगा है । परिवहन निगम में तैनात हजारों संविदा चालकों परिचालकों के अलावा तकनीकी कर्मचारियों को ड्यूटी करने के एवज में ही एक निश्चित भुगतान किया जा सकता है ।लेकिन अब जबकि पूरी तरह लाकडाउन है और गाड़ियों का संचालन ठप है तो ऐसे कर्मचारियों खाने-पीने का डर सताने लगा है । कई कर्मचारियों ने साफ शब्दों में कहा कि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वह आने वाले 10 दिन बाद कुछ खरीद सकें । ऐसे कर्मचारियों की मदद के लिए तमाम कर्मचारी संगठन आगे आ रहे हैं । उत्तरांचल रोडवेज कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि यदि परिवहन निगम प्रबंधन के सामने बजट का संकट है तो सरकार को वित्तीय वर्ष 2020-21 में प्रावधान किए गए बजट में से कुछ बजट तत्काल परिवहन निगम प्रबंधन को दे देना चाहिए, ताकि कम से कम संविदा कर्मचारियों का वेतन दिया जा सके । महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि प्रबंधन को सबसे पहले संविदा कर्मचारियों का वेतन भुगतान करना चाहिए क्योंकि उन्हें नियमित कर्मचारियों को जितना वेतन नहीं मिलता है । महामंत्री अशोक चौधरी का कहना है कि सरकार को नए बस अड्डों के निर्माण व सुविधाओं के विकास के लिए जो 60 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है उसमें से कुछ का कुछ बजट का आवंटन तत्काल किया जाए ताकि वित्तीय संकट से जूझ रहे परिवहन निगम को मदद मिल सके और कर्मचारियों का बकाया वेतन भुगतान किया जा सके ... और पढ़ें

पंजाब के होशियारपुर में फंसे देहरादून के 500 से अधिक मजदूर पीएम मोदी से मदद की गुहार

माय सिटी रिपोर्टर देहरादून देहरादून जिले के विभिन्न इलाकों के रहने वाले 500 से अधिक मजदूर पंजाब के होशियारपुर में फंस गए हैं . इन मजदूरों ने प्रधानमंत्री मोदी व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से मदद की गुहार की है। .समाजवादी पार्टी के जिला अध्यक्ष गुलफाम अली व मानवाधिकार एसोसिएशन के अरविंद शर्मा के मुताबिक जिले के ग्राम सभा वाला, पीपरपुर, बांदीपुर, जाटोवाला माजरी , मेदनीपुर , धर्मा वाला, खुशहालपुर, थ सहसपुर, चांदचक, लक्ष्मीपुर समेत कई इलाकों के 500 से अधिक मजदूर पंजाब के होशियारपुर में फंसे हुए हैं । कोरोना वायरस के चलते केंद्र सरकार की ओर से देशव्यापी लाक डाउन घोषित किए जाने व गाड़ियों का संचालन पूरी तरह ठप होने की वजह से ये मजदूर होशियारपुर से देहरादून नहीं आ पा रहे हैं। मजदूरों के परिजन अपनों को लेकर खासे परेशान हैं । मानवाधिकार एसोसिएशन के अध्यक्ष अरविंद शर्मा ने बताया कि इस संबंध में उनकी कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक से भी वार्ता हुई है उन्होंने मजदूरों की मदद के लिए आश्वासन दिया है इतना ही नहीं सपा जिलाध्यक्ष गुलफाम अली का कहना है कि यदि राज्य सरकार पहल करें तो वह अपने खर्चे पर इन मजदूरों को होशियारपुर से लाने के लिए तैयार हैं ... और पढ़ें

Coronavirus in Uttarakhand: देहरादून में सामने आया कोरोना का सातवां मामला, राजस्थान के युवक में हुई पुष्टि

लॉकडाउन के बाद भी उत्तराखंड में कोरोना वायरस के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। रविवार को भी देहरादून के एक युवक में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई है। डीजी हेल्थ डॉ. अमिता उप्रेती ने मरीज में कोरोना की पुष्टि की है। इसके साथ ही अब प्रदेश में कोरोना के सात मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, इनमें से एक स्वस्थ होकर अपने घर लौट चुका है। वहीं। एक ट्रेनी आईएफएस की दोबारा की गई जांच पॉजिटिव आई है। 

जानकारी के अनुसार,  47 वर्षीय युवक में 24 मार्च को कोरोना संक्रमण के लक्षण दिखाई दिए थे। 26 मार्च को उसे मिलिट्री हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। जिसके बाद 27 मार्च को उसका सैंपल हल्द्वानी लैब में जांच के लिए भेजा गया था।  युवक मूल रूप से राजस्थान का रहने वाला है। वह सेना में सूबेदार है। 10 मार्च को वह छुट्टी बिताकर देहरादून लौटा था। तब युवक में कोई लक्षण नहीं थे। 14 दिन बाद युवक में लक्षण नजर आए। 

बता दें कि इससे पहले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के तीन ट्रेनी आईएफएस, एक अमेरिकी नागरिक और स्पेन से लौटे कोटद्वार के एक युवक में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। वहीं, शनिवार को भी दुबई से लौटे एक युवक में कोरोना वायरस की पुष्टि हुई थी। वहीं डॉ. अमिता उप्रेती ने बताया कि आज 27 सैंपलों की जांच रिपोर्ट मिली है। इसमें से 26 रिपोर्ट नेगेटिव है। जबकि एक पॉजिटिव पाई गई है। 
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कोरोना वायरस कोरोना वायरस

Uttarakhand Lockdown: 31 मार्च को दूसरे जिलों में आवाजाही की नहीं मिलेगी छूट, श्रमिकों का एक महीने का किराया माफ

त्रिवेंद्र सरकार ने 31 मार्च को लॉक डाउन में 13 घंटे की ढील देकर अंतर जनपदीय यातायात खोलने का आदेश वापस ले लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रविवार को सभी राज्यों के लिए लॉकडाउन को लेकर सख्त गाइडलाइन जारी की है। इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने यातायात संचालित करने का आदेश वापस ले लिया। इसी के साथ एक जिले से दूसरे जिले में यातायात पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने शनिवार को एक दिन के लिए राज्य के भीतर सभी जिलों की सीमाएं यातायात के लिए खोलने का आदेश दिया था। 31 मार्च को सुबह सात से रात आठ बजे तक जरूरतमंद लोग प्रशासन से अनुमति लेकर आवाजाही कर सकते थे। सरकार ने राज्य परिवहन निगम की बसों को भी संचालित करने का फैसला लिया था। हालांकि कई लोग सरकार के इस फैसले को लॉकडाउन के पक्ष में नहीं मान रहे थे।

इसी बीच रविवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के उच्च अधिकारियों की गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में कई राज्यों में मजदूरों के पलायन को लेकर मंथन हुआ। इसके बाद गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को आदेश दिया कि राज्यों और जिलों के बीच लॉकडाउन की अवधि तक किसी भी तरह का यातायात संचालित नहीं किया जाए। केंद्र के इस आदेश पर मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को इस आदेश का सख्ती से अनुपालन कराने के लिए पत्र भेज दिया है। इससे सरकार के 31 मार्च को अंतर जनपदीय यातायात खोलकर एक जिले के दूसरे जिले में फंसे लोगों को राहत देने का प्लान भी निरस्त हो गया।
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Lockdown In Uttarakhand : देहरादून में बनाए सात क्वारंटीन सेंटर, खाद्य सामग्री की थोक और फुटकर दरें तय

कोरोना वायरस को मात देने के लिए देहरादून में सात क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। इनमें बाहर से आए लोगों और कोरोना के संदिग्धों को क्वारंटीन करने के लिए 638 बेड लगाए गए हैं। ये सेंटर जिले के टूरिस्ट रेस्टहाउस, होटलों और महिला हॉस्टल को अधिग्रहित कर बनाए गए हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि क्वारंटीन सेंटर की व्यवस्था कर ली गई है। इसके लिए कोटला संतोर स्थित एक होटल को पहले ही अधिग्रहीत कर लिया गया था।

जबकि, वन स्टॉप सेंटर के पास बनाए गए वुमेन हॉस्टल को भी अब इसी के लिए आरक्षित कर लिया है। जिलाधिकारी ने बताया कि बाहर से आने वाले व्यक्तियों के संबंध में प्रदेश सरकार फैसला लेगी। इस
वक्त जितने लोगों को प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग ने क्वारंटीन किया है उनकी व्यवस्था संबंधित अस्पतालों में की है। जबकि, अन्य लोगों को सेंटरों में भेजने की तैयारी है। उन्होंने बताया कि निर्धन लोगों और बेघरों के लिए प्रशासन लगातार व्यवस्थाएं कर रहा है। कुछ को भोजन और जिनके पास खाना बनाने की व्यवस्था है उन्हें राशन दिया जा रहा है।

कहां कितनी हुई व्यवस्था
सेंटर        -                   कमरे- बेड
टीआरएच डाकपत्थर             16   32
टीआरएच मसूरी                 28   62
टीआरएच भारत भूमि ऋषिकेश   60-160
स्पॉट ऑन होटल कोटला संतोर  36-36
ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी    60-120
फाइनेंस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट सुद्धोवाला-34-68
वुमेन हॉस्टल ईसी रोड-80-160
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Corona: 104 विदेशी नागरिकों को भेजा दिल्ली दूतावास, प्रवासी मजदूरों के लिए बनाए जाएंगे शेल्टर होम

भारत सरकार के निर्देश पर तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले 104 विदेशी नागरिकों को दिल्ली स्थित दूतावास भेजा गया। दिल्ली से अग्रिम कार्रवाई के बाद सभी नागारिकों को उनके देश भेजा जाएगा।

शनिवार शाम रामझूला, लक्ष्मणझूला, स्वर्गाश्रम, तपोवन, ऋषिकेश, रायवाला आदि क्षेत्रों में रह रहे विदेशी मूल के लोगों को लेने के लिए बस ट्रांजिट कंपाउंड में केटीसी ट्रेवल एजेंसी की चार वॉल्वो बसे पहुंची। इनमें से रविवार सुबह को दो बसें तपोवन, एक रायवाला के लिए रवाना हुई। शेष एक बस में बीटीसी से ही विदेशी लोग सवार हुए।

इस दौरान तीर्थनगरी और आसपास के क्षेत्रों से कुल 104 विदेशी मूल के लोग दिल्ली के लिए रवाना हुए। एक वॉल्वो बस के चालक शकील ने बताया कि हरिद्वार व देहरादून से भी कुछ विदेशी लोगों को दिल्ली ले जाया गया है। तीर्थनगरी से भेजे जाने वाले विदेशियों में अधिकांश फ्रांस, आयरलैंड, बेल्जियम, नीदरलैंड, फिनलैंड, स्वीडन, सोमानिया, यूके, अंडौरा आदि देशों के नागरिक शामिल हैं।
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Uttarakhand Lockdown: पुलिस की नजर हटते ही राशन की दुकानों पर लगी भीड़, तस्वीरों में देखिए आंखों देखा हाल...

Coronavirus in Uttarakhand: टिहरी मूल के 18 लोगों को किया क्वारंटीन, भारत में फंसे 350 से ज्यादा नेपाली मजदूरों में आक्रोश

लॉकडाउन के कारण भारत-नेपाल सीमा पर बने झूला पुलों पर भी आवाजाही बंद कर दी गई है। इसके चलते उत्तराखंड में धारचूला काम करने आए करीब 350 से ज्यादा नेपाली मजदूर भी यहां फंसे हुए हैं। 

मजदूर अपने वतन वापस लौटना चाहते हैं लेकिन नेपाल की ओर से झूलापुर न खुलने के कारण वे वहां नहीं लौट पा रहे हैं। ऐसे में एसएसबी सभी मजदूरों को खाना पीना खिला रही है।

रविवार को मजदूरों में आक्रोश दिखाई दिया। नेपाली नागरिकों का कहना था कि वह कोरोना की आशंका से भयभीत हैं। इसके बावजूद नेपाल सरकार पुल के गेट खोलने को लेकर गंभीर नहीं है। हम वापस जाना चाहते हैं। सरकार को इस बात पर ध्यान देना चाहिए।
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Coronavirus Alert: प्रभावित देशों से उत्तराखंड पहुंचे 3000 लोग, दो हजार लोगों को किया होम क्वारंटीन

नोवल कोरोना वायरस (कोविड 19) के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पूरे उत्तराखंड में दो हजार लोगों को होम क्वारंटीन में रखा गया है। प्रदेश में अब तक कोरोना प्रभावित देशों से लगभग तीन हजार लोग आए हैं। इनमें 800 लोगों ने 28 दिन की निगरानी अवधि पूरी कर ली है।

कोरोना वायरस को नियंत्रित करने के लिए सरकार की ओर से लोगों को घरों से बाहर न निकलने का सख्त फैसला लिया गया है, ताकि वायरस को स्थानीय स्तर पर फैलने से रोका जा सके। स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश भर में दो हजार लोगों पर निगरानी के लिए उन्हें होम क्वारंटीन में रखा है। 

स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के अनुसार होम क्वारंटीन लोगों की संख्या बढ़ रही है। होम क्वारंटीन किए गए लोग न तो किसी से मिल सकते हैं और न ही घर से बाहर निकल सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि स्वास्थ्य कर्मचारियों की टीम होम क्वारंटीन लोगों पर निगरानी रख रही है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि केंद्र सरकार के निर्देशानुसार दूसरे देशों से आने वाले लोगों पर फरवरी माह के अंतिम सप्ताह से ही नजर रखी जा रही थी।

निगरानी के लिए 55 लोग अस्पतालों में भर्ती
कोरोना वायरस के संदिग्ध लक्षणों के आधार पर 55 लोगों को निगरानी के लिए अस्पतालों में भर्ती किया गया है। प्रदेश में राहत की बात ये है कि कोरोना वायरस अभी कंट्रोल में है। प्रभावित देेशों की यात्रा से लौटे लोगों में ही कोरोना की पुष्टि हुई है।
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उत्तराखंड: प्रदेशभर की जेलों में रखे गए क्षमता से कई गुना अधिक कैदी, 61 फीसदी विचाराधीन 

उत्तराखंड की जेलों में उनकी क्षमता से कई गुना अधिक कैदी रखे गए हैं। इन कैदियों में 61 प्रतिशत कैदी विचाराधीन हैं, जबकि 39 प्रतिशत ही सिद्धदोष कैदी हैं। हल्द्वानी जेल में क्षमता से 241 प्रतिशत अधिक कैदी रखे गए हैं। उत्तराखंड में तीन जेलें ऐेसी भी हैं जिनमें उनकी क्षमता से कम कैदी हैं। पहली संपूर्णानंद शिविर सितारगंज, दूसरी चमोली और तीसरे स्थान पर केंद्रीय कारागार सितारगंज है।

बता दें कि कोरोना के बचाव के लिए सुप्रीम कोर्ट के कैदियों को रिहा करने के आदेश के पालन में उत्तराखंड में बड़ी संख्या में कैदी रिहा किए जाने हैं। काशीपुर निवासी आरटीआई कार्यकर्ता नदीमउद्दीन ने मुख्यालय, महानिरीक्षक कारागार से उत्तराखंड की जेलों की क्षमता तथा उसमें बंद कैदियों के संबंध में सूचना मांगी थी। इसके उत्तर में कारागार मुख्यालय के लोक सूचना अधिकारी/वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सीएस जोशी ने 5 मार्च 2020 तक कारागारों में क्षमता के सापेक्ष कुल निरुद्ध बंदियों की संख्या की सूचना उपलब्ध कराई है।

इसके अनुसार उत्तराखंड में कुल 11 जेलों की क्षमता 3540 कैदियों की है जबकि उसमें सूचना उपलब्ध कराने की तिथि को 5748 कैदी बंद है। इनमें 2259 सिद्धदोष (सजायाफ्ता) और 3489 विचाराधीन कैदी है। कुल कैदियों में 61 प्रतिशत कैदी विचाराधीन है, केवल 39 प्रतिशत ही न्यायालय से सजा पाए कैदी हैं।
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उत्तराखंड: कालाढूंगी की सिंचाई नहर में गिरा हाथी का बच्चा, बाहर न निकल पाने से हुई मौत

उत्तराखंड के कालाढूंगी में एक हाथी का बच्चा नहर में गिर गया। इस दौरान उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों की मदद से वन कर्मियों ने मृत हाथी के बच्चे को नहर से निकाला।

जानकारी के अनुसार, कालाढूंगी में वन निगम डिपो में गुलजारपुर बंकी के पास शानिवार की शाम को जंगल से हाथियो का एक झुंड गांव में घुस गया था। इसके बाद जब हाथी वापस जंगल की तरफ लौट रहे थे तो वहां एक हाथी का बच्चा सिंचाई नहर में गिर गया। इस दौरान हाथियों ने उसे बाहर निकालने के लिए नहर को क्षतिग्रस्त कर दिया। 

इसके कारण चकलुवा, विदरामपुर, देवीपुरा, सकतपुर, हरिपुरा, नरीपुरा आदि गांवों में सिंचाई का संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने विभाग को इसकी सूचना दी और शीघ्र ही नहर मरम्मत की मांग की है। वन विभाग की टीम ने वहां पहुंचकर हाथी के बच्चे के शव को बाहर निकाला और पोस्टमार्टम के लिए भेजा। 
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हरिद्वार: स्वामी शिवानंद और साध्वी पद्मावती ने आमरण अनशन किया स्थगित

देशभर में कोरोना वायरस फैलने के बाद मातृ सदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अपना आमरण अनशन स्थगित कर लिया है। उन्होंने साध्वी पद्मावती का अनशन भी समाप्त करवा दिया। साध्वी कुछ दिन पहले ही एम्स दिल्ली से हरिद्वार पहुंची थी।

स्वामी शिवानंद सरस्वती ने 10 मार्च को आमरण अनशन यह कहते हुए शुरू किया था की सरकार गंगा की रक्षा करने के लिए संघर्ष करने वाले संतों की आवाज को नहीं सुन रही। उनका कहना था कि मातृ सदन के ब्रह्मचारी आत्मबोधानंद, साध्वी पद्मावती और ब्रह्मलीन स्वामी सानंद की मांगों को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अनशन शुरू किया था।

स्वामी शिवानंद का कहना है कि उन्होंने अपने चिंतकों के आग्रह अनशन स्थगित किया है। स्वामी शिवानंद सरस्वती ने दोहराया कि गंगा के लिए मातृ सदन का संघर्ष किसी भी रूप में कम होने वाला नहीं है।
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