अमित शाह के पास कुछ तो है जिसके बल पर वे 45 सीट जीतने का दावा कर रहे हैं... 

डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 06 Feb 2020 09:47 PM IST
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Amit shah
Amit shah - फोटो : ANI

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कहा जाता है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की चुनावी रणनीति को समझना हर किसी के वश की बात नहीं है। पहले किसी ने नहीं सोचा था कि 'शाहीन बाग' का विरोध प्रदर्शन ही दिल्ली चुनाव का मुख्य मुद्दा बन जाएगा। मगर ऐसा हो गया।भाजपा ने इस मुद्दे को अंदरुनी नहीं, बल्कि खुले तौर पर पार्टी का चुनावी एजेंडा बना डाला। इस मुद्दे को लेकर अमित शाह ने कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को चुनौती दे दी।
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किसी से जवाब नहीं बन पा रहा था। यहां तक कि केजरीवाल को कहना पड़ा कि शाहीन बाग की सड़क को खाली कराना चाहिए। इससे लोगों को दिक्कत हो रही है।वीरवार को अब उसी शाह ने वोटिंग से ठीक 48 घंटे पहले यह घोषणा कर दी कि भाजपा 45 सीटें जीतेगी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, दिल्ली में भाजपा के लिए जो समर्थन देखा है, उससे साफ है कि भाजपा 45 से अधिक सीट जीतकर सरकार बनाने जा रही है।
अमित शाह और जेपी नड्डा ने मिलकर दिल्ली चुनाव की रणनीति बनाई थी, वे शुरु से ही सीएए व शाहीन बाग को लेकर केजरीवाल सरकार पर आक्रामक रहे। दिल्ली भाजपा के कार्यकर्ताओं को भी यह अंदाजा नहीं था कि शाह इस चुनाव को ऐसे भी घुमा सकते हैं। उन्हें लग रहा था कि पार्टी के स्टार प्रचारक केजरीवाल को विकास के मुद्दों पर घेरेंगे, लेकिन ऐसी नहीं हुआ।
दिल्ली दंगल में भाजपा का चुनावी एजेंडा क्या रहेगा, पार्टी कार्यकर्ताओं को कौन सी लाइन लेकर आगे बढ़ना है, यह बात अमित शाह ने मटियाला विधानसभा क्षेत्र में हुई पहली जनसभा में क्लीयर कर दी थी। उन्होंने बता दिया कि दिल्ली के चुनाव में 'राम, अनुच्छेद 370, सीएए, कश्मीर, आयुष्मान योजना और शाहीन बाग सब कुछ होगा।

यही हुआ, भाजपा के तमाम नेता जो दूसरे प्रदेशों से प्रचार करने के लिए दिल्ली आए थे, उन सभी ने शाहीन बाग पर फोकस किया। वीरवार को जब चुनाव प्रचार का अंतिम दिन था, तब भी अमित शाह ने सीमापुरी, हरिनगर और मादीपुर में अपने रोड शो के दौरान लोगों से बातचीत में यह साफ कर दिया कि इस बार दिल्ली बदलने जा रही है।

उन्होंने कहा, इस चुनाव के दौरान दिल्ली की जनता से संवाद करने का मौका मिला है। झूठे वादे, तुष्टिकरण और अराजकता से त्रस्त दिल्ली को अब बस विकास चाहिए। भाजपा के लिए जो समर्थन देखा है, उससे साफ है कि भाजपा दिल्ली में सरकार बनाने जा रही है। उनके इस ट्वीट के बाद आप में भी कुछ बौखलाहट दिखी।

हालांकि यह इशारा तभी मिल गया था, जब अरविंद केजरीवाल को गत सप्ताह दिल्ली विकास मॉडल से हटकर शाहीन बाग पर बोलना पड़ा। वे केवल बोले ही नहीं, उन्होंने यह कह दिया कि शाहीन बाग में लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अमित शाह को सड़क खाली करानी चाहिए। उनके पास सारी शक्तियां हैं।

इससे पहले संसद परिसर में पत्रकारों के साथ एक अनौपचारिक वार्ता में उन्होंने दिल्ली चुनाव के बारे में ऐसा ही इशारा किया था। तब उनका कहना था कि इस बार भाजपा 40 से अधिक सीटें लाएगी। भाजपा नेताओं का कहना है कि पिछली बार केजरीवाल के साथ युवाओं की बड़ी संख्या थी। ये सभी वो युवा थे जो अन्ना आंदोलन के समय से केजरीवाल के पीछे चल रहे थे।

पहले 2013 के चुनाव में और उसके बाद 2015 के चुनाव में भी ऐसे युवाओं ने पूरी तन्मयता से केजरीवाल का साथ दिया था।इस बार परिस्थितियां बदल चुकी हैं। कोई वालंटियर नहीं है, अब सभी कार्यकर्ता हैं। पार्टी की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट बताती है कि कुछ सीटों को छोड़ दें तो भाजपा और आप के बीच कड़ा मुक़ाबला है।

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