तब्लीगी जमात मामलाः कोर्ट ने थाईलैंड के 34 जमातियों को रिहा किया

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Updated Fri, 17 Jul 2020 09:59 PM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : फाइल फोटो

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

*Yearly subscription for just ₹299 Limited Period Offer. HURRY UP!

ख़बर सुनें
साकेत कोर्ट ने तब्लीगी जमात मामले में शुक्रवार को थाईलैंड के 34 नागरिकों को रिहा कर दिया। इन विदेशी नागरिकों को निजामुद्दीन मरकज में अवैध रूप से आयोजित तब्लीगी जमात में शामिल होने, वीजा नियमों और सरकारी दिशा निर्देशों के उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था।
विज्ञापन

महानगर दंडाधिकारी गगनदीप ने प्रत्येक विदेशी नागरिक को 6-6 हजार रुपये जुर्माना भरने के आधार पर रिहा कर दिया गया। अदालत ने इन नागरिकों की ओर से दायर समझौता याचिका के आधार पर रिहा किया है। इन विदेशी जमातियों को थाईलैंड के उच्चायोग और मामले के आईओ ने वीडियो कॉन्फ्रेंस से कोर्ट में पेश किया। इन नागरिकों से लिए गए जुर्माने को पीएम केयर फंड में जमा करने का निर्देश दिया गया है।
हालांकि इससे पहले कोर्ट ने कहा था कि इन विदेशी नागरिकों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं, लेकिन इन विदेशियों की ओर से दायर समझौता याचिका के आधार पर कोर्ट ने इन्हें रिहा कर दिया। समझौता याचिका में विदेशी नागरिकों ने अपने अपराध को स्वीकार किया और सजा कम करने की गुहार लगाई थी। इन नागरिकों की ओर से महिला वकील आशिमा मंडला ने पैरवी की।
गुरुवार को दी थी 92 इंडोनेशियाई नागरिकों को जमानत
अदालत ने तब्लीगी जमात मामले में इंडोनेशिया के 92 नागरिकों को गुरुवार को जमानत प्रदान कर दी। इन पर वीजा नियम तथा महामारी अधिनियम संबंधी सरकारी आदेश के उल्लंघन तथा अवैध रूप से मिशनरी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। दिल्ली पुलिस ने इन्हें मार्च में निजामुद्दीन मरकज में आयोजित जमात से हिरासत में लिया था। दिल्ली पुलिस इनके खिलाफ आरोप पत्र दाखिल कर चुकी है।

साकेत जिला अदालत की सीएमएम गुरमोहिना कौर ने इन विदेशी जमातियों को दस-दस हजार रुपये के निजी मुचलके पर जमानत प्र्रदान की। इन जमातियों को संबंधित दूतावास तथा जांच अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश किया। यह जमाती अपनी सजा कम कराने के लिए शुक्रवार को अदालत में समझौता याचिका दायर करेंगे। यह याचिका उन्हीं मामलों में दायर की जाती है जिनमें अधिकतम सात साल तक सजा का प्रावधान है।

दिल्ली पुलिस ने इन जमातियों को हिरासत में लेने के बाद सरकारी क्वारंटीन में भेज दिया था। वहां जांच के दौरान इनकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आई थी। इसके बाद हाईकोर्ट की अनुमति से इन जमातियों को अन्य स्थानों पर रखा गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
X

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00
X
  • Downloads

Follow Us