तीन दिन दुकानें खोलकर भी नहीं आ रहे ग्राहक, सैलून दुकानदार परेशान

Amarujala Local Bureauअमर उजाला लोकल ब्यूरो Updated Thu, 02 Jul 2020 05:42 PM IST
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तीन दिन दुकानें खोलकर भी नहीं आ रहे ग्राहक, सैलून दुकानदार परेशान

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कृपया खबर को जगह दें तीन दिन दुकानें खोलकर भी नहीं आ रहे ग्राहक, सैलून दुकानदार परेशान - वैशाली के सैलून संचालकों ने प्रशासन से की दिन बदलने की मांग माई सिटी रिपोर्टर  साहिबाबाद। अनलॉक-1 में सैलून की दुकानें खोलने के लिए निर्धारित किए गए हफ्ते के दिन से सैलून संचालक बेहद परेशान हैं। वैशाली के तमाम संचालकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से दिन बदलने की मांग की है। उनका कहना है कि मंगलवार, बृहस्पति और शनिवार को ग्राहक दुकानों पर नहीं पहुंचते हैं। ऐसे में उन्हें दिनभर दुकानें खोलने के बावजूद कोई आमदनी नहीं होती। इससे तमाम संचालकों पर आर्थिक संकट बढ़ने लगा है।  वैशाली सेक्टर-3 में सैलून चलाने वाले साहिल का कहना है कि प्रशासन ने दुकानें खोलने के लिए मंगल, बृहस्पति और शनिवार का दिन तय किया है। जबकि इन दिनों में ग्राहक कटिंग या सेविंग कराने से बचते हैं। दिनभर में सिर्फ इमरजेंसी कार्य के लिए ही एक या दो ग्राहक काम के लिए आते हैं। इससे दुकानों का किराया और साथी कर्मचारियों की सैलरी भी नहीं निकल रही है। जबकि वैशाली में अधिकांश दुकानों का किराया 15 से 18 हजार रुपये महीना है। इसके इतर कर्मियों की सैलरी का भी आर्थिक बोझ पड़ना शुरू हो गया है। दुकानों में काम न होने से संचालक बेहद परेशान हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि दुकानें खोलने के लिए केवल दिन बदलकर उन्हें राहत दी जाए। वहीं, जूल्फिकार का कहना है कि महीने में महज 12 दिन दुकानें खोलने से भी कोई लाभ नहीं हो रहा है। इसके अलावा आने-जाने में खर्चा भी होता है। इस खर्चे को बचाने के लिए कुछ दुकानदार अब दुकानों में ही रहने लगे हैं।  परिचर्चा ः - प्रशासन से जो दिन तय किए हैं उसमें काम नहीं होता। अधिकांश ग्राहक कटिंग और सेविंग करने से बचते हैं। ऐसे में राहत मिलने के बावजूद भी दिनभर खाली बैठे रहते हैं। अधिकारियों से मांग है कि सिर्फ दिन बदलकर हम लोगों को राहत दी जाए। असलम, सैलून संचालक - मैं तो दुकान खोलने के लिए कई दिनों से घर भी नहीं जा पाया हूं। किराया तो दूर साथी कर्मियों की सैलरी भी नहीं निकल रही है। काम अब बंद होने से साथियों ने भी आना बंद कर दिया है। इससे काम पूरी तरह ठप हो गया है। ताहिर, सैलून संचालक - तीन दिनों के अलावा दुकानें खोले तो चालान कटने का भी डर रहता है। प्रशासन के नियमों का उल्लंघन भी नहींं कर सकते हैं। तो दूसरी ओर दुकान खोलने पर भी काम नहीं हो पाता है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। रियासद, सैलून संचालक --------------------------- सुमित कुमार      
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